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Bhagalpur News:"किसानों की बात, कृषि मंत्री के साथ" कार्यक्रम में मंत्री कृषि विभाग ने किसानों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की सीधी बात, लगभग 01 लाख किसान कार्यक्रम में हुए शामिल



ग्राम समाचार, भागलपुर। मंत्री कृषि विभाग बिहार डॉ. प्रेम कुमार द्वारा किसानों की बात कृषि मंत्री के साथ कार्यक्रम के माध्यम से गुरुवार को बिहार के लगभग 01 लाख किसानों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीधी बात की गई। इस कार्यक्रम में वेबलिंग, राज्य के सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों में जूम, आत्मा के पदाधिकारी/किसान गुगल मिट से जुड़े। इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग से कृषि विभाग के फेसबुक लाईव, ट्विटर तथा बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर के यूट्यूब पर तथा मंत्री के फेसबुक एवं ट्विटर पर किया गया। इसके अतिरिक्त दो सामुदायिक स्टेशन अगवानपुर (बाढ़) तथा सबौर से इस कार्यक्रम को सीधा प्रसारण किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों द्वारा अपनी समस्याओं तथा उनके द्वारा किये जा रहे कार्यों के बारे में अपनी जानकारी साझा किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने बारी बारी से कृषि के साथ-साथ आधुनिक फसल ड्रैगन फूड, स्ट्रॉबेरी, मशरूम आदि की खेती करने वाले किसानों से बात की तथा उनके अनुभवों एवं सुझावों को सुना तथा अन्य किसानों को इससे प्रेरणा लेने का अनुरोध किया। उन्होंने किसानों की समस्याओं के त्वरित निदान करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया। मंत्री ने अपने सम्बोधन में कहा कि सरकार की योजनायें तभी सफल हो पायेगी, जब इसमे जन-भागीदारी सुनिश्चित होगी। योजनाओं के निर्माण एवं कार्यान्वयन में किसानों का सुझाव काफी बहुमूल्य है। इसलिए हम आज आपसे सुझाव भी प्राप्त करेंगे, आपकी समस्याएँ भी सुनेंगे तथा सरकार द्वारा आपके लिए चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी भी आपको मिलेगी। जैविक खेती हेतु गंगा के तटवर्ती क्षेत्रों एवं राष्ट्रीय /राजकीय सड़क के दोनों तरफ पड़ने वाले 13 जिला पटना, नालंदा, बक्सर, भोजपुर, वैशाली, सारण, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर, खगड़िया से कटिहार के चयनित गाँवों में सब्जी उत्पादन हेतु जैविक कोरिडोर विकसित किया जा रहा है। बिहार राज्य बीज एवं जैविक प्रमाणन एजेंसी द्वारा निःशुल्क जैविक प्रमाणन की व्यवस्था की गई है। इसके लिए तीन वर्षों 2019-20 से 2021-22 तक के लिए कुल 160.07 करोड़ रूपये की योजना स्वीकृत किया गया है। इस वर्ष खरीफ, वर्ष 2020 में राज्य के 48,525 किसानों के बीच खरीफ फसलों के बीज का होम डिलीवरी किया गया साथ ही, खरीफ, 2020 में 6,56144 किसानों के बीच अनुदानित दर पर खरीफ फसलों के बीज किसानों से ऑन-लाईन आवेदन प्राप्त कर वितरित किया गया। उन्होंने कहा कि आज के इस कार्यक्रम में पूरी सरकार किसानों के समक्ष उपस्थित है। कृषि मंत्री से लेकर विभागीय सचिव सभी निदेशक तथा वरीय पदाधिकारीगण किसानों की बातों को सुनने तथा आपकी समस्याओं को सुनने के लिए आज उपस्थित हैं। बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है। राज्य कि लगभग 76 प्रतिशत आबादी की आजीविका कृषि पर आधारित है तथा लगभग 89 प्रतिशत लोग गाँवो में रहते हैं। इसलिए राज्य के विकास के लिए कृषि का विकास सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि केन्द्र एवं राज्य की सरकार द्वारा कृषि के विकास को सबसे ज्यादा महत्त्व दिया जा रहा है। केन्द्र एवं राज्य सरकार के समन्वित प्रयास से प्रदेश आज कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश में बिहार की छवि एक प्रगतिशील राज्य के रूप में स्थापित हुई है। बिहार पाँचवी बार कृषि कर्मण पुरस्कार हासिल किया है, जो एक असाधारण उपलब्धि को दर्शाता है। गत वर्ष बिहार की आर्थिक वृद्धि दर स्थिर मूल्य पर 10 प्रतिशत से ज्यादा दर्ज की गई, जो राष्ट्रीय औसत से ज्यादा रही तथा इस दर को हासिल करने में कृषि और खासकर पशुपालन, मत्स्यपालन और मुर्गी पालन का बहुत बड़ा योगदान रहा है। डॉ० प्रेम ने कहा कि तीसरे कृषि रोड मैप के तहत बड़े लक्ष्य रखे गए और सभी विभाग समन्वित रूप से उन योजनाओं को कार्यान्वित कर रहे हैं। बिहार सरकार कृतसंकल्प है कि प्रदेश के किसानों और पशुपालकों को सभी संभव सुविधाएँ और लाभ दिए जाएं। बिहार देश का पहला राज्य है जहाँ कृषि के टिकाऊ विकास के लिए तीन-तीन कृषि रोड मैप बनाया गया है। बीज से लेकर बाजार तक की सुविधा, बीज की ऑनलाइन व्यवस्था, बीजों की होम डिलीवरी का गृह मंत्रालय द्वारा सराहना की गई है। खेती के लिए कृषि यंत्र, कस्टम हायरिंग सेन्टर, उर्वरक, कीटनाशी की सुविधाएँ दी जा रही है। फसल अवशेष प्रबंधन से संबंधित यंत्रों पर 75 प्रतिशत तक अनुदान दी जा रही है। सिंचाई की सुविधा के लिए सूक्ष्म सिंचाई संबंधित उपकरणों पर 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। हर खेत को पानी के लिए हर गाँव का सर्वेक्षण किया जा रहा है। दक्षिण बिहार के सूखाग्रस्त जिलों में भूमि संरक्षण की योजनाओं से सिंचाई स्रोत का सृजन किया जा रहा है। अन्न भंडारण हेतु 200 मे0 टन के गोदाम निर्माण पर अनुदान दिया जा रहा है। साथ ही, बाजार की व्यवस्था दुरूस्त करने के लिए 54 बाजार प्रागणों की सफाई, सुरक्षा, सड़क, बिजली, शौचालय, डिजिटल रेट डिस्प्ले बोर्ड की व्यवस्था की जा रही है। इसे राष्ट्रीय एवं अन्तराष्ट्रीय मडियो से जोड़ा जायेगा। किसानों की आमदनी बढ़ाने हेतु फल-सब्जी, मसाला, मशरुम, सुगधित पौधों, शहद उत्पादन बढ़ावा दिया जा रहा है। उद्यानिकी विकास योजना के अंतर्गत 14 फसलों का 23 जिलों में उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। डॉ० कुमार ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत अभी तक 75 लाख 72 हजार 620 किसानों के खाते में 5852 करोड़ से अधिक की राशि भेजी जा चुकी है। किसान मानधन योजना के तहत् पेंशन का लाभ उठाएं। किसान रेल का परिचालन किया जा रहा है। पूरे देश में ए०पी०एम०सी० एक्ट को समाप्त किया गया है। अब किसान देश के किसी कोने में अपनी फसल बेच पायेंगे। 7 ई०सी० एक्ट को संशोधित किया गया है। अब कृषि उत्पादों के भडारण पर कोई रोक नहीं रहेगी। 01 लाख करोड़ रुपये का एग्री इन्फ्रा फण्ड तथा मत्स्य सम्पदा योजना कार्यान्वित किया जायेगा वाढ़, सुखाड हर स्थिति में नुकसान की भरपाई की जायेगी। फरवरी, मार्च एवं अप्रैल में ओलावृष्टि एवं आँधी से फसलों की हुई क्षति के लिए 18 लाख 39 हजार 666 किसानों के खाते में 568 करोड़ 14 लाख 46 हजार रुपये कृषि इनपुट अनुदान डी० बी० के माध्यम से भेजे गये इस वर्ष भी उत्तर बिहार के 20 जिलों के 272 प्रखंडों में बाढ़ से फसलों का नुकसान का प्रारमिक आकलन करा लिया है। अभी कुल 7 लाख 53 हजार 534 हे0 क्षेत्र में क्षति प्रतिवेदन प्राप्त हुआ है। जिसके आलोक में 999 करोड़ 60 लाख की राशि का आकलन किया गया है। शीघ्र ही किसानों से आवेदन प्राप्त कर उन्हें कृषि इनपुट अनुदान उपलब्ध कराया जायेगा। सरकार के नीतियों का ही परिणाम है कि आज नई पीढ़ी कृषि की ओर आकर्षित हो रही है। राज्य में किसान पारम्परिक फसल उत्पादन के साथ-साथ आधुनिक तरीके से खेती, पशुपालन, मत्स्यपालन, मुर्गीपालन आदि को अपनाकर काफी अधिक लाभान्वित हो रहे है तथा लाखों रूपये कमा रहे है। प्रधानमंत्री ने किसानों की आमदनी दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए हमें पारंमपरिक फसल उत्पादन के स्थान पर आधुनिक तरीके से समेकित कृषि प्रणाली को अपनाना पड़ेगा। इस अवसर पर कृषि विभाग के सचिव जय कुमार, बी०ए०यू० के निदेशक, प्रसार शिक्षा डॉ० आर०के० सुहाने, सह निदेशक, प्रसार शिक्षा डॉ० आर०एन० सिंह, संयुक्त निदेशक (रसायन), कम्पोस्ट एवं बायोगैस बैंकटेश नारायण सिंह, निदेशक बामेती डॉ. जितेन्द्र प्रसाद सहित कृषि विभाग के अन्य पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में राज्य के किसानों उपस्थित थे।



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Editor - Bijay shankar

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- राजीव कुमार (Editor-in-Chief)

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