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Godda News: video- राजमहल परियोजना प्रबंधक तालझारी के पांच रैयतों को दिया नौकरी, बिना ग्रामसभा के ही भू दाताओं को दिए जा रहे हैं नियुक्ति पत्र

ग्राम समाचार, बोआरीजोर(गोड्डा)। गोड्डा जिला में स्थित राजमहल कोल परियोजना के ललमटिया एरिया कार्यालय में बुधवार को परियोजना महाप्रबंधक देवेंद्र कुमार नायक ने प्रभावित क्षेत्र तालझारी गांव के पांच रैयतों को नियुक्ति पत्र दिया। वहीं नायक ने अपने कार्यालय कक्ष में उक्त रैयतो को नियुक्ति पत्र देने के दौरान उनके प्रति सहानुभूति दिखाते हुए रैयतो की तारीफ की। 

प्रभावित तालझारी गांव के रहने वाले रैयतो में मुख्य रूप से हीरालाल हाँसदा,प्रीति हाँसदा,पवन टुडू,कमलेश्वर मुर्मू,प्रेमलाल मुर्मू को नौकरी मिली है यह सभी रैयत को रैयती जमीन जमाबंदी नंबर 27,12 व 22 से हुई है। उक्त सभी रैयतों ने परियोजना में कोयला उत्पादन के लिए अपनी जमीन तो दी है लेकिन दरअसल वहीं तालझारी गांव के ग्राम प्रधान व रैयतो ने राजमहल परियोजना को जमीन नहीं देने को लेकर लगातार तालझारी ग्रामीण द्वारा ग्राम सभा किये जा रहा है यह भी समझ से परे है। आखिर क्यों सामूहिक वार्ता करके परियोजना द्वारा भुदाताओ को नियुक्ति पत्र देने का काम नहीं कर रही है वहीं परियोजना एक एक रैयतों को नियुक्ति पत्र दे रही है।

नियम कानून को ताक में रखकर कोयला खनन का कार्य किया जा रहा है। तालझारी ग्रामीणों ने पूर्व में भी विरोध जताते हुए कहा है कि ग्राम सभा को प्राथमिकता दिया जाय। बिना ग्राम सभा किए  खनन कार्य को आगे नहीं होने दिया जाएगा। 

संथाल परगना शेड्यूल क्षेत्र में ग्राम सभा को ताक में रखकर राजमहल परियोजना द्वारा कोयला खनन कार्य किया जा रहा है। जिस तरह से नियुक्ति पत्र दे रहे हैं पारदर्शीता से दिखाई दे रही है कि दो चार रैयतों को लेकर ईसीएल अपने ओर समर्थन देकर पूरे तालझारी गांव के जमीन को अधिग्रहीत करने का ईसीएल द्वारा कयास लगाये हुए है। लगातार प्रभावित गांव से सहमति व विश्वास नहीं होना परियोजना यहां के क्षेत्रीय भुदाताओ के साथ सौतेला व्यवहार ही कर रही है।

तालझारी रैयतो का मानना है कि परियोजना को जमीन देना पूरे ग्राम सभा की सहमति होने के बाद ही खनन कार्य किया जाना चाहिए। लेकिन दुर्भाग्य की बात तो यह है कि परियोजना क्षेत्र में कोई भी प्रभावित गांव तालझारी हो या पुर्व में बसडीहा गांव या बड़ा भोड़ाई गांव के साथ भी सहमति व विश्वास को लेकर खनन कार्य को आगे नहीं बढ़ाया गया था। बिना ग्राम सभा किए ही गांव के एक एक रैयतो को नियुक्ति पत्र देने का काम परियोजना द्वारा किया जा रहा है। पेसा कानून का उल्लंघन है ग्राम सभा के बाद ही वहां के रैयतों को नियुक्त पत्र देना चाहिए। वही कुछ दिन पूर्व में भी बसडीहा गांव को भी विस्थापित किया गया था वहां के रैयतो के साथ भी बिना ग्राम सभा किए ही जमीन अधिग्रहित का कार्य धड़ल्ले से किया था। बिना ग्राम सभा व समिति के ही खनन कार्य को  आगे बढ़ाना  भू दाताओं के साथ धोखा है लगातार राजमहल परियोजना से प्रभावित भुदाताओ के साथ ग्राम सभा को ताख में रख कर खनन कार्य की जा रही है। 

संविधान के तहत दिए गए पेसा कानून 1996 ग्राम सभा को सर्वोपरि माना गया है यह आदिवासियों का सुरक्षा कवच है इस कानून व्यवस्था को खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही है। वही जनप्रतिनिधि व जिला प्रशासन रैयतों के साथ ग्राम सभा हो रही है, या नहीं हो रही है। इसके प्रति चुपचाप मौन साधे हुए हैं। किस परिस्थिति में यहां के भोले भाले आदिवासी रैयतों के जमीन को परियोजना द्वारा लिया जा रहा है या कौन सी कानून व्यवस्था द्वारा अधिग्रहित किया जा रहा है यह भी समझ से परे है है।
                                        -ग्राम समाचार, बोआरीजोर(गोड्डा)।
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Editor - विलियम मरांड़ी।

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- राजीव कुमार (Editor-in-Chief)

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