Bhagalpur News:लोक कला ने जीता लोगों का दिल, मंजूषा महोत्सव में लोगों ने बिहार की दूसरी लोक कला को करीब से देखा


ग्राम समाचार, भागलपुर। मंजूषा महोत्सव के पाँचवे दिन पटना से आई सांस्कृतिक टीम की प्रस्तुति पर लोग बुधवार को झूम उठे। चार दिन बाद भी महोत्सव में दिन भर लोगों की भीड़ देखने को मिली। लोग आश्चर्य और गौरव कर रहे अपने क्षेत्र की लोक कला की इस प्रसिद्धि पर। सुबह 11 बजे से आम जनों के लिए मंजूषा महोत्सव अन्य दिनों की तरह ही खुला और देखते देखते लोगों की संख्या भीड़ में तब्दील हो गई। मंजूषा कला के बारे में लोगों को जानकर काफी आश्चर्य होता है और इसके इतिहास को जानकर गौरवान्वित होते हैं। उपेन्द्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान के अधिकारी चंद्र भूषण सिंह ने बताया कि आज सैकड़ों लोगों से उनके फीडबैक के बारे में पूछा गया तो पता चला कि खुद भागलपुर एवं आसपास के लोग इस लोक कला से अनजान थे। अभी भी बिहार की इस समृद्ध लोककला के प्रति लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। वहीं नई पीढ़ी में इस कला को लेकर गजब का उत्साह दिखा। जब भी किसी यूथ से इस कला के बारे में पूछा गया तो वे गूगल का सहारा लेने लगे। वहीं संस्थान की ओर से लगाया गया टेस्ट मार्केटिंग का स्टॉल लोगों के लिए एक नया अनुभव है। इन स्टॉल पर प्रदर्शित किये गए कलाकृतियों की बारीकी देख लोग काफी सराहना करते हैं और शिकायत भी करते हैं कि इन उत्पादों की बिक्री की व्यवस्था संस्थान द्वारा क्यों नहीं की गई है। 6 स्टॉल में 16 विभिन्न जिलों के कलाकारों द्वारा तैयार चयनित कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है। टेस्ट मार्केटिंग की निगरानी कर रहे संस्थान के अधिकारी विवेक ने बताया कि लोग इन कलाकृतियों को खरीदना चाहते हैं। संस्थान द्वारा इनके आनलाइन बिक्री की व्यवस्था की जा रही है। टिकुली क्राफ्ट के स्टॉल की स्टेट अवार्ड से सम्मानित शबीना ईमाम ने बताया कि लोगों ने मंजूषा एवं मधुबनी के साथ-साथ टिकुली क्राफ्ट की भी अच्छी खरीदारी की। मुनव्वर अख्तर ने बताया कि पटना से आयी सांस्कृतिक टीम ने शानदार प्रस्तुति से लोगों का दिल जीत लिया। स्वर आंगन सांस्कृतिक कल्याण सेवा समिति के कलाकारों द्वारा दी गई प्रस्तुति में भोजपुरी गानों के पार्श्व गायक धीरज पांण्डेय द्वारा निमिया के डाढ़ मैया, पनिया भरे साँवर गोरिया निमन लागे, हमके पैठा दे नैहरवा बलमजी गाया। वहीं संस्था की दूसरी कलाकारा मेनका कुमारी द्वारा टी सिरीज एवं टिप्स कैसेट पार्श्व गायिका द्वारा शिवरात्रि के उपलक्ष्य में कालहे के शिव के मनाईब शिव मानत नाही, कलकतवा में मोरतिया बारे ललटेन, सिया निकले अवधवा की ओर का गायन किया। डॉ विश्वनाथ चरण सिंह के नेतृत्व में संगत कलाकार बृजबिहारी मिश्रा नाल पर, आॅक्टोपैड पर शिवनाथ प्रसाद और आॅर्गन पर विनोद कुमार, तबलावादक शिवजी सिंह, विशेष ध्वनी अनंत कुमार मिश्रा साथ अन्य कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति दी। वहीं महोत्सव के अंतिम दिन भागलपुर एवं आसपास के जिलों से चयनित छात्र-छात्राओं द्वारा मंजूषा कला पर रैम्प शो का आयोजन किया जाएगा। उनके इस आयोजन के लिए संस्थान द्वारा तैयारियाँ शुरू कर दी गई है। स्टेज के समक्ष रैम्प शो के लिए जगह चयनित कर प्लेटफार्म तैयार करवाया जाएगा। बिहार में मंजूषा कला पर संभवतः यह पहला इतना बड़ा आयोजन होगा। मंजूषा कला को आमजन से जोड़ने में परिधान पर इस प्रयोग से दूरगामी असर होगा।  स्मार्ट सिटी की परिकल्पना मंजूषा कला के बगैर नहीं की जा सकती है। पूर्व में भी संस्थान द्वारा न्यायालय एवं जिलाधिकारी कार्यालय की चाहरदिवारी पर इस कला को उकेरने का कार्य किया गया है। भागलपुर स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील कुमार आज मंजूषा महोत्सव में आए और संस्थान से जुड़े कलाकारों से बातें की। उन्होंने बताया कि उपेन्द्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान द्वारा आयोजित महोत्सव अद्भुत प्रयास है। भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड इस कला को लेकर संस्थान के अधिकारियों के साथ मिलकर इस कला के विकास को लेकर योजना पर निकट भविष्य में कार्य करेगा। जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक रामषरण राम ने महोत्सव में लगे स्टॉल का निरीक्षण किया। उन्होंने उपेन्द्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान एवं उद्योग विभाग के साझा प्रयास से आयोजित मंजूषा महोत्सव की सराहना की। उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा किया गया प्रयास संतोषप्रद है। इस महोत्सव को आगे भी आयोजित किया जाएगा जिससे अधिक से अधिक लोग इस कला के प्रति जागरूक हो सके। महोत्सव में कल आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में संस्था दिशा ग्रामीण विकास मंच द्वारा कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। जिसमें भागलपुर एवं आसपास के कवियों द्वारा प्रस्तुति की जाएगी। वहीं अंग हेरिटेज म्यूजिकल ग्रुप, गोपी मोहन लेन, बूढ़ानाथ द्वारा नृत्य एवं गायन की प्रस्तुति की जाएगी। मंजूषा महोत्सव में संस्थान के प्रकाश कुमार, रोमिला भारती एवं मंजूषा कलाकार में अनुकृति, श्वेता कुमारी, विषुद्धानंद मिश्रा एवं अन्य लोग सहयोग कर रहे हैं।



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