रेवाड़ी में वाल्मीकि जन कल्याण सभा की ओर से महर्षि वाल्मीकि जयंती धूमधाम से मनाई गई. महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया नमन. महर्षि वाल्मीकि चौक से डंपिंग यार्ड को हटाए जाने की मांग की.
रेवाड़ी में आदि कवि महर्षि वाल्मीकि जी की जयंती पर वाल्मीकि जनकल्याण सभा की ओर से महर्षि वाल्मीकि चौक पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद तथा विभिन्न हिंदू संगठनों ने शामिल होकर महर्षि वाल्मीकि जयंती श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाई. संस्था के प्रधान रोहतास सिंह वाल्मीकि के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोगों ने महर्षि वाल्मीकि चौक पर इकट्ठा होकर प्रतिमा पर माल अर्पण कर उन्हें नमन किया. महर्षि वाल्मीकि संस्कृत साहित्य के सबसे पहले कवि माने जाते हैं और उन्हें समकालीन ऋषि और महान कवि के रूप में पूजा जाता है। महर्षि वाल्मीकि जयंती पर रामायण का पाठ करना, धार्मिक प्रवचन सुनना, जरूरतमंदों की मदद करना अत्यंत फलदायी माना जाता है और इससे जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है। इस प्रकार महर्षि वाल्मीकि जी की जयंती अत्यंत शुभ दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन ज्ञान प्रदान करने वाले महान शिक्षक को याद करने का एक माध्यम भी है।
रोहतास सिंह वाल्मीकि ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कृत साहित्य का आदिकवि और रामायण का रचयिता माना जाता है. भारतीय संस्कृति में उनका विशेष स्थान है. महर्षि वाल्मीकि ने हजारों साल पहले विश्व विख्यात रामायण रुपी जिस महाकाव्य की रचना की थी, उसका आज तक केवल अनुसरण ही हो पाया है। ऐसा सर्वश्रेष्ठ महान ग्रंथ कभी दोबारा नहीं लिखा गया। हिंदू धर्म में महर्षि वाल्मीकि को आदि कवि कहा जाता है, उन्हें मूल रामायण का रचयिता माना जाता है। हर साल आश्विन माह की पूर्णिमा को वाल्मीकि जयंती मनाई जाती है। माता सीता और महर्षि वाल्मीकि से जुड़ी कथा रामायण के सबसे भावुक प्रसंगों में से एक है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब भगवान राम ने लोकापवाद के कारण माता सीता को अयोध्या से दूर भेजने का निर्णय लिया, तब लक्ष्मण जी उन्हें वन में छोड़ आए। उस समय माता सीता गर्भवती थीं। वन में माता सीता को महर्षि वाल्मीकि का आश्रय मिला था। महर्षि वाल्मीकि को सदियों से एक महान ऋषि के रूप में पूजा जाता है जिन्हें भक्ति के मार्गदर्शक के रूप में याद किया जाता है। रामायण जैसे महाकाव्य की रचना करने वाले वाल्मीकि ने रामायण के माध्यम से सत्य, धर्म, त्याग और कर्तव्य परायण होने का पाठ सिखाया। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने पवित्र रामायण की रचना कर पूरी मानव जाति के कल्याण हेतु धर्म का मार्ग प्रशस्त किया। उन्हें आज के युग में एक महान शिक्षक की तरह भी याद किया जाता है। वाल्मीकि जयंती का दिन रामायण पाठ करके जीवन में सकारात्मक सिद्धांतों का पालन करने की शिक्षा प्रदान करता है।
इस मौके पर मीडिया से बात करते हुए रोहतास वाल्मीकि ने महर्षि वाल्मीकि चौक के ठीक सामने बने कूड़े के डंपिंग यार्ड को यहां से हटाने की मांग की. संस्था के प्रधान रोहतास सिंह वाल्मीकि ने कहा कि नगर परिषद की ओर से शहर के बीचों बीच यह डंपिंग यार्ड कई वर्षों से चल रहा है जिस कारण यहां दुर्गंध आती है. कूड़े की गाड़ियां शहर से कूड़ा कचरा उठाकर यहां डंप करने आती है यहां मंदिर भी है और आसपास लोगों की बसावट भी है इसलिए आबादी क्षेत्र से इस डंपिंग यार्ड को यहां से हटाया जाना चाहिए. इस बारे में नगर परिषद की ओर से हाउस में प्रस्ताव भी परित हो चुका है.




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