रेवाड़ी। 37वें वर्षयोग के अवसर पर रानीला से पैदल विहार करते हुए मुनि संघ के रेवाड़ी पहुंचने पर जैन समाज की ओर से श्रद्धा और भक्ति के साथ स्वागत किया गया। श्री दिगम्बर अतिशय नसिया जी में आयोजित कार्यक्रम में मंगलाचरण मीनाक्षी जैन ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में डॉक्टर घनश्याम मित्तल और डॉक्टर सीमा मित्तल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
समारोह के दौरान कलश स्थापना का आयोजन किया गया। कलश स्थापना की जिम्मेदारी दीनदयाल, राहुल जैन, महेंद्र जैन, अजय जैन, धीरज जैन और हेमराज जैन सहित समाज के लोगों ने निभाई। झंडारोहण अजीत पंसारी परिवार द्वारा किया गया। वहीं माता जी को वस्त्र भेंट हेमराज और विजय जैन परिवार द्वारा किए गए।
इस अवसर पर सरस्वती भूषण माता जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि कलश स्थापना का उद्देश्य घर-घर में मांगलिक भावनाओं का संचार करना और सभी को मंगल भावना से इस चातुर्मास के भक्ति सागर से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि चातुर्मास के दौरान समय का सदुपयोग करना चाहिए।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सरिता बहती चली जाती है, जो व्यक्ति किनारे पर खड़ा रहता है, वह अपनी प्यास नहीं बुझा सकता। लेकिन जो नदी में उतर जाता है, वही निर्मल जल से अपनी प्यास शांत कर सकता है। इसी प्रकार जीवन में भी अवसर का लाभ उठाकर धर्म और साधना से जुड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां-जहां गुरु आते हैं, वह स्थान तीर्थ बन जाता है।
वहीं संघस्थ प्रियंका दीदी ने भी श्रद्धालुओं से समय का सदुपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समय रूपी सर के पीछे कांटे होते हैं और आगे बाल होते हैं, इसलिए जो समय को आगे से पकड़ लेता है, वही जीवन में उसका लाभ उठा पाता है। समय निकल जाने के बाद उसे पकड़ना संभव नहीं होता।
कार्यक्रम में त्रिलोक धाम के कार्याध्यक्ष महेंद्र जैन सहित विवेक विहार दिल्ली, रोहिणी दिल्ली, ज्योति कॉलोनी दिल्ली, कैलाश नगर और विहारी कॉलोनी रोहतक पश्चिम विहार बहादुरगढ़ गोहाना से आए श्रद्धालु भी शामिल हुए।
इसके अलावा जैन समाज के प्रधान महेंद्र जैन, अजय जैन, हेमराज जैन, अरविंद जैन, राकेश जैन, मुनि संघ के प्रधान सतीश जैन, अमित जैन, नितिन जैन, प्रीति जैन, पूनम जैन, रितु जैन तथा नसिया जी के प्रधान राज कुमार जैन सहित बड़ी संख्या में समाज के गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिला। मुनि संघ के रेवाड़ी आगमन को लेकर जैन समाज में काफी उत्साह रहा और श्रद्धालुओं ने चातुर्मास के दौरान धर्म, साधना और सेवा से जुड़कर समय का सदुपयोग करने का संकल्प लिया।


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