दिल्ली जंतर मंतर पर 20 जुलाई को हुए लाठीचार्ज की घटना के विरोध में विपक्षी दलों एवं विभिन्न संगठनों का धरना प्रदर्शन जारी है. इसी कड़ी में शनिवार को रेवाड़ी के नेता जी सुभाष चन्द्र बोस पार्क में दो दर्जन से संगठनों ने प्रदर्शन में भाग लिया.
वरिष्ठ समाजसेवी महाशय मूलचंद की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता राजेन्द्र सिंह कामरेड व भगतसिंह सांभरिया के संयोजन व कैलाश यादव व एडवोकेट राज कुमार जलवा के संचालन में जिला रेवाड़ी के विभिन्न जागरूक सामाजिक संगठनों, छात्र-युवा संगठनों एवं प्रबुद्ध नागरिकों के संयुक्त तत्वावधान में आज शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार, प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं तथा 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्र-छात्राओं पर हुए असंवैधानिक पुलिस बल प्रयोग के विरोध में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दिवंगत युवाओं की आत्मिक शांति के लिए दो मिनट के मौन धारण करते हुए सामुहिक संविधान की प्रस्तावना वाचन के साथ किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों ने भाग लेकर लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। कार्यक्रम का मूल उद्देश्य 20 जुलाई की घटना के विरोध और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जवाबदेही की मांग को उठाना था।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है तथा किसी भी शांतिपूर्ण आंदोलन पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करना नितांत आवश्यक है। सभा के उपरांत उपस्थित जनसमूह ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए नेताजी सुभाष चन्द्र बोस पार्क से झज्जर चौक तक नारेबाजी करते हुए पैदल मार्च किया, इसके बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का प्रतीकात्मक पुतला दहन किया तथा शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने और छात्र-युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की जोरदार मांग की।
इस दौरान रेवाड़ी प्रशासन ने ज्ञापन लेने से इनकार कर दिया, जिसकी सभी द्वारा निंदा की गई और हरियाणा मुख्यमंत्री को भी इस बारे पत्र भेजकर वाकिफ करवाया गया। वक्ताओं ने सरकार से मांग की कि 20 जुलाई की घटना की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों के विरुद्ध निष्पक्ष कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं में निष्पक्षता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित कर युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बंद किया जाए व पीड़ित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाए। हालांकि इसमें मुख्य मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा को लेकर भी थी लेकिन दोपहर को धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया.
इस दौरान एडवोकेट राजेंद्र सिंह कामरेड, सुभाष अग्रवाल, मनोज यादव पूर्व ईओ, पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी धर्मबीर सिंह, बुद्ध राम पंवार, कामरेड सत्यवान, एडवोकेट अजय सिंह, हरिकिशन जाटव, कुलदीप यादव, सुमन कुमारी, पूर्व प्रधान सोरभ यादव, रोहित वाल्मीकि, अमित कुमार, एडवोकेट कशुम, आर डी शर्मा, ओम प्रकाश, अरविंद कुमार, धर्म सिंह, राम किशन महलावत, कामरेड शेर सिंह, सुरेश राव, हवा सिंह बोद्ध, रामोतार यादव एकलव्य, भगत सिंह सांभरिया, शशी देवी, सुभाष, ईश्वर सिंह सुठाणी, अजीत सिंह, प्रवीन कुमार पार्षद, सुभाष छाबड़ी, कमल सिंह ने भी अपनी बात रखी. कार्यक्रम का समापन संविधान की रक्षा, शिक्षा बचाओ और युवाओं के अधिकारों की सुरक्षा के संकल्प के साथ शांतिपूर्वक हुआ।





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