मानसून के मौसम में जलभराव और गंदे पानी के कारण *डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, टाइफाइड, हेपेटाइटिस- ए, डायरिया* जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विभाग ने जिले में निगरानी बढ़ा दी है। हरियाणा में हर साल जुलाई-सितंबर में वेक्टर-जनित बीमारियों के केस बढ़ते हैं। रेवाड़ी में भी कूलर, टंकी, गमले में जमा पानी मच्छर का मुख्य कारण है।
*स्वास्थ्य विभाग के निर्देश:*
*मच्छर नियंत्रण*: घर में कूलर, फ्रिज ट्रे, फूलदान का पानी हर हफ्ते बदलें। टंकियों को ढक कर रखें। घर के आसपास पानी जमा न होने दें।
*जलजनित रोग से बचाव*: हमेशा उबला हुआ या फिल्टर पानी पिएं। खाना ढक कर रखें। हाथ साबुन से धोएं।
*लक्षण दिखे तो तुरंत जांच*: तेज बुखार, शरीर दर्द, उल्टी-दस्त, पीला पड़ना, पेट दर्द होने पर तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं।
*टीम एक्शन*: आशा कार्यकर्ता और डीबीसी, एमपीएचडब्ल्यू और एएनएम घर-घर जाकर बुखार सर्वे और ब्रीडिंग चेक करेंगी। फॉगिंग और लार्वा नाशक छिड़काव किया जाए। वहीं किसी भी संदिग्ध मरीज की सूचना तुरंत एचडब्ल्यूसी, पीएचसी और सीएचसी रेवाड़ी को दें।
बरसात के मौसम में 2 तरह की बीमारी बहुत बढ़ती हैं।
पहली - मच्छर से होने वाली बीमारी: डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया मच्छर साफ पानी में पनपता है। कूलर, गमले, टायर में 1 हफ्ते से ज्यादा पानी न रहने दें। पूरे कपड़े पहनें, मच्छरदानी लगाएं, घर के आसपास सफाई रखें। दूसरी - गंदे पानी-खाने से होने वाली बीमारी: टाइफाइड, पीलिया, दस्त। बचाव के लिए हमेशा उबला पानी पिएं। फल-सब्जी धोकर खाएं। खाने से पहले हाथ धोएं। बुखार आए तो घबराएं नहीं, पर 2 दिन से ज्यादा रहे तो तुरंत जांच करवाएं।

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