रेवाड़ी के मोहल्ला गुर्जरवाड़ा में स्थित प्राचीन सिद्ध श्री नगरकोट कांगड़ा वाली माता मंदिर भक्तों की आस्था, श्रद्धा और विश्वास का एक अद्भुत केंद्र है। मोहल्ले के बुजुर्गों के अनुसार यह पावन मंदिर लगभग 100 से 150 वर्ष पुराना है और इसकी महिमा दूर-दूर तक प्रसिद्ध है।
मंदिर के इतिहास के बारे में बताया जाता है कि इस पावन धाम की स्थापना का श्रेय स्वर्गीय श्री मनोहर लाल अग्रवाल जी को जाता है। उस समय उनके जीवन में एक बड़ी कमी थी, उन्हें संतान सुख की प्राप्ति नहीं हुई थी। अपनी मनोकामना को लेकर वे हिमाचल प्रदेश स्थित मां नगरकोट कांगड़ा देवी के दरबार में पहुंचे और सच्चे मन से माता रानी से पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद मांगा।
मां भगवती की असीम कृपा से कुछ समय बाद उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। माता की इस अनंत कृपा से भाव-विभोर होकर श्री मनोहर लाल अग्रवाल जी ने अपने हिस्से की भूमि में से एक पवित्र स्थान माता रानी के मंदिर निर्माण हेतु दान कर दिया और विधि-विधान के साथ माता की प्राण प्रतिष्ठा करवाई।
तभी से लेकर आज तक इस मंदिर में नियमित रूप से पूजा-पाठ, आरती, भजन-कीर्तन, जागरण और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता आ रहा है। इस पवित्र परंपरा को अग्रवाल परिवार पीढ़ी-दर-पीढ़ी श्रद्धा और समर्पण के साथ निभाता चला आ रहा है। मोहल्ला गुर्जरवाड़ा तथा आसपास के क्षेत्रों में माता रानी की अपार महिमा मानी जाती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि जो भी भक्त सच्चे मन से माता के चरणों में अपनी अरदास लेकर आता है, माता उसकी झोली खुशियों से भर देती हैं और उसकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।
माता की महिमा इतनी प्रसिद्ध है कि अनेक बड़ी हस्तियां, जनप्रतिनिधि, व्यापारी और दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु यहां माथा टेकने और अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं। मां नगरकोट वाली का यह दरबार आज भी भक्तों की आस्था का जीवंत प्रतीक बना हुआ है।




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