ग्राम समाचार, भागलपुर। भागलपुर के टाउन हॉल में रविवार को अंग शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक अंग शिखर सम्मेलन में देश-प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए विद्वानों, चिंतकों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की गरिमामयी उपस्थिति के बीच खानकाह पीर दमड़िया शाह के सज्जादानशीन सैय्यद शाह फखरे आलम हसन ने "सामाजिक समरसता" विषय पर अपना महत्वपूर्ण वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि सामाजिक समरसता ही एक सशक्त, समृद्ध और विकसित समाज की आधारशिला है। सरकार, समाज और सामाजिक संस्थाओं को मिलकर शिक्षा, न्याय, रोजगार, संवाद, सेवा, नैतिकता और मानवीय मूल्यों के आधार पर ऐसा वातावरण तैयार करना होगा, जहाँ प्रत्येक नागरिक सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर के साथ जीवन जी सके। उन्होंने कहा कि अंग प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत सद्भाव, सह-अस्तित्व और सांस्कृतिक समन्वय की रही है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुँचाना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। सज्जादानशीन ने कहा कि भागलपुर टाउन हॉल में आयोजित यह अंग शिखर सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अंग प्रदेश के इतिहास में एक ऐसा महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसका आने वाले वर्षों और दशकों तक संदर्भ दिया जाएगा। सम्मेलन में अंग प्रदेश के अतीत, वर्तमान और भविष्य से जुड़े विविध विषयों पर बारह चुनिंदा विद्वानों ने अपने विचार रखे, जो समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायक और मार्गदर्शक सिद्ध होंगे। उन्होंने अंग मुक्तिदल के सभी पदाधिकारियों, सदस्यों एवं आयोजकों को इस ऐतिहासिक आयोजन की सफलता के लिए हार्दिक बधाई दी। विशेष रूप से अंग मुक्तिदल के अध्यक्ष, सचिव तथा आयोजन समिति के सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही कार्यक्रम की उत्कृष्ट रूपरेखा तैयार करने और प्रभावशाली संचालन के लिए प्रोफेसर देव ज्योति मुखर्जी का विशेष धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि उनके कुशल नेतृत्व और समर्पित प्रयासों से यह सम्मेलन अत्यंत सफल एवं यादगार बन सका। अंत में सैय्यद शाह फखरे आलम हसन ने विश्वास व्यक्त किया कि इस सम्मेलन से निकले विचार और सुझाव अंग प्रदेश के सर्वांगीण विकास, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में दूरगामी भूमिका निभाएँगे।
अंग शिखर सम्मेलन के दौरान सामाजिक समरसता संकल्प हम, अंग शिखर सम्मेलन में उपस्थित सभी प्रतिनिधिगण, सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा जागरूक नागरिक, यह सामूहिक संकल्प कि हम सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और मानवीय मूल्यों को अपने जीवन और समाज में सर्वोच्च स्थान देंगे। हम धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र और वर्ग के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव, घृणा और वैमनस्य का विरोध करेंगे। हम संवाद, सहयोग और सेवा की संस्कृति को बढ़ावा देंगे तथा विवादों का समाधान शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीकों से करने का प्रयास करेंगे। हम युवाओं को शिक्षा, कौशल, रोजगार, नैतिकता और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य करेंगे। हम महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और समाज के वंचित वर्गों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों के प्रति प्रतिबद्ध रहेंगे। हम नशामुक्ति, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा को सामाजिक समरसता का अभिन्न अंग मानकर जन-जागरण चलाएँगे। हम मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च तथा सभी धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के बीच सहयोग और सद्भाव की परंपरा को सुदृढ़ करेंगे। हम सरकार, प्रशासन, सामाजिक संस्थाओं और नागरिक समाज के साथ मिलकर सामाजिक समरसता को जन-आंदोलन बनाने का प्रयास करेंगे। हम अंग प्रदेश की गौरवशाली विरासत—सद्भाव, सह-अस्तित्व, ज्ञान और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का संकल्प लेते हैं। हम यह विश्वास व्यक्त करते हैं कि "समरस समाज ही समृद्ध राष्ट्र की सबसे मजबूत नींव है।" आइए, हम सब मिलकर ऐसा भारत और ऐसा अंग प्रदेश बनाएँ जहाँ प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान, न्याय, सुरक्षा, अवसर और अपनापन मिले; जहाँ विविधता हमारी शक्ति बने और मानवता हमारी पहचान।


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