सिरदर्द एक आम समस्या है, जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। कभी यह हल्का होता है तो कभी इतना तेज कि रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो जाता है। हर सिरदर्द एक जैसा नहीं होता। इसके अलग-अलग कारण और प्रकार होते हैं, इसलिए सही समय पर इसकी पहचान और इलाज बहुत जरूरी है।
*मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, द्वारका के न्यूरोलॉजी विभाग के वाइस चेयरमैन एवं यूनिट हेड, डॉ. रजनीश कुमार ने बताया*, "सिरदर्द के पीछे तनाव, पर्याप्त पानी न पीना, नींद की कमी, लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर का इस्तेमाल, भोजन समय पर न करना, माइग्रेन, साइनस या हाई ब्लड प्रेशर जैसी कई वजहें हो सकती हैं। यदि सिरदर्द बार-बार हो रहा है या बहुत तेज है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।"
सिरदर्द मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। पहला प्राइमरी सिरदर्द, जिसमें टेंशन सिरदर्द, माइग्रेन और क्लस्टर सिरदर्द शामिल हैं। दूसरा सेकेंडरी सिरदर्द, जो किसी दूसरी बीमारी, साइनस संक्रमण, सिर में चोट या दर्द की दवाओं के अधिक इस्तेमाल के कारण हो सकता है।
*डॉ. कुमार ने आगे कहा*, "यदि सिरदर्द अचानक बहुत तेज हो, सिर में चोट के बाद शुरू हो, इसके साथ कमजोरी, धुंधला दिखाई देना, तेज बुखार, गर्दन में अकड़न या बार-बार उल्टी हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।"
सिरदर्द से बचाव के लिए पर्याप्त पानी पिएं, समय पर संतुलित भोजन करें, 7–9 घंटे की नींद लें, तनाव कम करें और स्क्रीन का लगातार उपयोग करने से बचें। नियमित व्यायाम और सही जीवनशैली भी सिरदर्द की समस्या को काफी हद तक कम कर सकती है। यदि सिरदर्द बार-बार हो या लंबे समय तक बना रहे, तो विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना सबसे बेहतर विकल्प है।

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