राँची, 5 जून 2026 — देश के प्रतिष्ठित शिक्षा संस्थानों में शुमार बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (BIT), मेसरा में झारखंड राज्य कोटे के समाप्त हो जाने की सूचना ने छात्रों और अभिभावकों में व्यापक चिंता पैदा कर दी है। संस्थान की कुल 1342 इंजीनियरिंग सीटों में से लगभग 650 सीटें पिछले वर्षों में झारखंड राज्य कोटे के तहत आरक्षित रखी जाती थीं, जिनमें SC, ST, OBC और EWS श्रेणियाँ शामिल थीं, और ये सीटें उन स्थानीय छात्रों को प्राथमिकता के साथ मिलती थीं जो JEE Main में अच्छा रैंक लाते थे। अब झारखंड सरकार और BIT Mesra के बीच मौजूद मौजूदा समझौते (M.O.U.) के समाप्त हो जाने के कारण यह स्टेट कोटा हट गया है, जिसका मतलब है कि ये सीटें अब राष्ट्रीय/सामान्य कैटेगरी के अनुसार भरी जाएँगी। शिक्षा के अवसरों में यह बदलाव स्थानीय प्रतिभा के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है क्योंकि झारखंड के विद्यार्थी अब राष्ट्रीय स्तर की कठोर प्रतिस्पर्धा में सीधे मुकाबला करेंगे।
समझौते की समाप्ति की खबर मिलते ही छात्र समुदाय, अभिभावक और स्थानीय संगठनों में असमंजस और नाराज़गी देखी गई। कई परिवारों ने बिट मेसरा में दाखिले की आशा पर अपनी परीक्षाओं की तैयारी और आर्थिक योजनाएँ बनाईं थीं; अचानक हुए इस परिवर्तन से उनकी योजनाओं और परिश्रम पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। छात्र प्रतिनिधियों और युवा संगठनों का कहना है कि BIT Mesra जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में स्टेट कोटा हटने से झारखंड के स्थानीय छात्रों के अवसर सीमित होंगे और शैक्षिक असमानता बढ़ेगी। इस कारण उन्होंने माननीय मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से शीघ्र हस्तक्षेप कर नया M.O.U. करवाने या राज्य के छात्रों के लिए वैकल्पिक आरक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
यह मुद्दा केवल सीटों के बँटवारे तक सीमित नहीं है; BIT Mesra का सुंदर कैंपस और शैक्षिक परंपरा राज्य के युवाओं के करियर निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, इसलिए यहां की सीटों का असमय परिवर्तन शैक्षिक नीति और अवसर समानता के संवेदनशील प्रश्न खड़े करता है। स्थानीय विधायकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल समिति गठित कर BIT प्रशासन से वार्ता शुरू करने का सुझाव दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि तात्कालिक समाधान के रूप में सरकार को BIT Mesra प्रशासन के साथ पुनः बातचीत कर नया समझौता कराना चाहिए; यदि वह संभव न हो तो राज्य-स्तरीय नीतिगत हस्तक्षेप के जरिए स्थानिक छात्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। दीर्घकालिक तौर पर सुझाव दिया जा रहा है कि झारखंड उच्च शिक्षा नीति में संशोधन कर प्रतिष्ठित संस्थानों में स्थानीय छात्रों के लिए स्थायी और स्पष्ट प्रविधान निर्धारित करे।
छात्र समुदाय से अपील की जा रही है कि वे शांतिपूर्ण और संगठित तरीके से अपनी आवाज़ उठाएँ, स्थानीय प्रतिनिधियों और प्रशासन के साथ संवाद कराएँ और आवश्यकता अनुसार कानूनी विकल्पों पर भी विचार करें। एक छात्र प्रतिनिधि ने कहा, “हमारे लहू में जुनून, मिट्टी से इश्क और रगों में इंकलाब है — पर हमारी माँग सरल है: झारखंड के युवाओं को उनके घर के नज़दीक ही उच्च शिक्षा के अवसर मिलें।” यदि सरकार समय पर प्रभावी कदम नहीं उठाती है तो यह मुद्दा सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी तेज़ी से उभर सकता है।
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