नई दिल्ली, 4 जून 2026. हाल ही में सोशल मीडिया पर तूफ़ान खड़ा करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 3 जून को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में अपनी पहली आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। मंच पर मुख्य रूप से तीन चेहरे नज़र आए—सौरभ दास, विजेता दहिया और आशुतोष रंका। पार्टी द्वारा इन तीनों को आधिकारिक प्रवक्ता घोषित किया गया है। कैमरे के सामने खुद को देश के युवाओं और छात्रों की आवाज़ बताने वाले इन प्रवक्ताओं की असल पृष्ठभूमि (Background) और उनके राजनीतिक झुकाव को लेकर अब कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
‘द न्यूज़ बेल्ट’ की एंकर राज नंदिनी द्वारा की गई एक खोजी रिपोर्ट के अनुसार, खुद को गैर-राजनीतिक (Apolitical) बताने वाले इस आंदोलन के पीछे एक ही विशेष राजनीतिक इकोसिस्टम का हाथ होने का अंदेशा है। आइए विश्लेषण करते हैं इन तीनों प्रवक्ताओं के इतिहास और उनके 'आम आदमी पार्टी' (AAP) कनेक्शन का।
1. सौरभ दास: स्वतंत्र पत्रकार या लेफ्ट इकोसिस्टम का हिस्सा?
सीजेपी के चीफ स्पोक्सपर्सन (मुख्य प्रवक्ता) बनाए गए सौरभ दास खुद को एक 'स्वतंत्र खोजी पत्रकार' बताते हैं। लेकिन उनके सोशल मीडिया (ट्विटर/X) हैंडल को खंगालने पर जो बातें सामने आई हैं, वे काफी चौंकाने वाली हैं:
उमर खालिद के साथ तस्वीरें: 30 दिसंबर 2025 को सौरभ दास ने दिल्ली दंगों और देशद्रोह के आरोपी उमर खालिद के साथ मुस्कुराते हुए अपनी एक तस्वीर पोस्ट की और लिखा—"Mad respect for him"
न्यायपालिका पर टिप्पणी और केजरीवाल का समर्थन: सौरभ ने दिल्ली हाई कोर्ट के एक जज के खिलाफ एक लंबा थ्रेट (ट्वीट शृंखला) लिखा था, जिसे स्वयं अरविंद केजरीवाल ने रीट्वीट किया था। यह थ्रेट केजरीवाल की दिल्ली लिकर पॉलिसी केस से जुड़ा था, जिसमें आम आदमी पार्टी के नेताओं को सही ठहराने की कोशिश की गई थी।
प्रदूषण पर चुनिंदा चुप्पी (Selective Activism): नवंबर 2025 में उन्होंने इंडिया गेट पर 'एंटी-पॉल्यूशन प्रोटेस्ट' का नेतृत्व किया था। गौर करने वाली बात यह है कि यह विरोध प्रदर्शन ठीक उसी समय हुआ जब दिल्ली में भाजपा की सरकार बनी थी। भाजपा के आते ही अचानक सड़क पर उतर जाना और स्टबल बर्निंग (पराली जलाने) पर पहले मौन रहना, उनके विरोधाभास को दर्शाता है।
वैचारिक झुकाव: सौरभ दास के लेख अल जज़ीरा, द कैरेवन, द फ्रंटलाइन, द हिंदू, द क्विंट, आर्टिकल 14 और द वायर जैसे पोर्टल्स पर छपते रहे हैं, जिन्हें एक निश्चित वामपंथी वैचारिक झुकाव के लिए जाना जाता है। 6 दिसंबर 2024 को उन्होंने बाबरी मस्जिद को लेकर एक फोटो पोस्ट करते हुए इसे भारत के लिए एक "Sad Day" (दुखद दिन) भी बताया था।
2. आशुतोष रंका: कॉर्पोरेट करियर छोड़ आम आदमी पार्टी से जुड़ाव
तीनों प्रवक्ताओं में सबसे दिलचस्प और हाई-प्रोफाइल बैकग्राउंड आशुतोष रंका का है:
शैक्षणिक योग्यता: रंका ने IIT कानपुर से 'मटीरियल साइंस एंड इंजीनियरिंग' में बीटेक किया है और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) से 'पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन' में मास्टर्स किया है। वह 2016-17 में IIT कानपुर के स्टूडेंट्स जिम्खाना के प्रेसिडेंट भी रहे।
कॉर्पोरेट से एक्टिविज़्म: लंदन में मैकिन्से एंड कंपनी (McKinsey & Company) जैसी नामी फर्म में मैनेजमेंट कंसल्टेंट के तौर पर काम करने के बाद वह भारत लौट आए और पब्लिक पॉलिसी और सोशल एक्टिविज़्म में उतर गए।
आप (AAP) से सीधा कनेक्शन: 'संडे गार्जियन लाइव' समेत कई मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों के अनुसार, आशुतोष रंका आम आदमी पार्टी के पूर्व सहयोगी और प्रवक्ता के रूप में काम कर चुके हैं। वर्तमान में वह राजस्थान में शिक्षा सुधार, पर्यावरण संरक्षण और युवा कल्याण के अभियानों में सक्रिय हैं।
3. विजेता दहिया: MEA से लेकर ध्रुव राठी और सीजेपी के मंच तक
सीजेपी के तीसरे प्रवक्ता विजेता दहिया को एक पॉलिटिकल रिसर्चर, लेखक और फिल्म निर्माता के रूप में पेश किया गया है:
सरकारी नौकरी से यू-टर्न: दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) से पढ़े विजेता के फेसबुक प्रोफाइल के मुताबिक, वह भारत सरकार के विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs - MEA) में पूर्व असिस्टेंट रह चुके हैं। एक तरफ सरकारी मंत्रालय में काम और दूसरी तरफ अचानक सरकार विरोधी आंदोलनों के मंच पर आना एक दिलचस्प बदलाव है।
लेखन और क्षेत्रीय फ़िल्में: उन्होंने दो किताबें लिखी हैं—‘Power of Universe’ और ‘To Hell with Damn Job’। इसके अलावा उन्होंने दो हरियाणवी फिल्में—‘डरन’ और ‘ओपरी पराई’ भी बनाई हैं।
ध्रुव राठी कनेक्शन: विजेता दहिया ने कई बड़े यूट्यूब क्रिएटर्स के लिए रिसर्च और कंटेंट राइटिंग का काम किया है, जिनमें सबसे बड़ा नाम मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी का है।
सीजेपी का 'आम आदमी पार्टी' कनेक्शन: संयोग या सोची-समझी रणनीति?
इस पूरे मामले का सबसे बड़ा मोड़ कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत डीपके (Abhijeet Dipke) से जुड़ा है।
क्या है अभिजीत डीपके का इतिहास?
अभिजीत डीपके साल 2020 से 2023 तक आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम के एक प्रमुख वालंटियर रहे हैं। 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल के पक्ष में चलाए गए 'मीम कैंपेन' के पीछे उन्हीं का दिमाग माना जाता था और वह सीधे 'आप' के आईटी मीडिया हेड अंकित लाल को रिपोर्ट करते थे।
अब कड़ियों को जोड़कर देखें तो:
संस्थापक (अभिजीत डीपके) - आम आदमी पार्टी के पूर्व सोशल मीडिया रणनीतिकार।
प्रवक्ता 1 (आशुतोष रंका) - आम आदमी पार्टी के पूर्व सहयोगी।
प्रवक्ता 2 (सौरभ दास) - जिनके ट्वीट्स को अरविंद केजरीवाल खुद रीट्वीट करते हैं।
प्रवक्ता 3 (विजेता दहिया) - ध्रुव राठी के कंटेंट रिसर्चर, जो सीजेपी संस्थापक के जुड़े नेटवर्क का हिस्सा हैं।
क्या है 6 जून के प्रदर्शन का पूरा विवाद?
3 जून की अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीजेपी प्रवक्ताओं ने NEET-UG 2026 पेपर लीक और CBSE की अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। पार्टी का दावा है कि उनके इस ऑनलाइन पिटीशन पर 8 लाख लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। इसी सिलसिले में उन्होंने 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़े विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है, जिसे अमेरिका से लौटकर अभिजीत डीपके और क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक लीड करेंगे।
टूलकिट और विदेशी मीडिया का एंगल:
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि जिस विरोध प्रदर्शन और रणनीति की घोषणा सीजेपी ने 3 जून को भारत में की, उसकी पुष्टि विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स में 5 दिन पहले ही की जा चुकी थी। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या इस आंदोलन के पीछे कोई 'टूलकिट गैंग' या सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय नैरेटिव काम कर रहा है?
छात्रों का दर्द बनाम राजनीतिक एजेंडा
इसमें कोई दो राय नहीं है कि NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की खामियां बेहद गंभीर और वास्तविक मुद्दे हैं। लाखों छात्रों का दर्द और उनका आक्रोश बिल्कुल सच्चा है। लेकिन जब खुद को युवाओं का "गैर-राजनीतिक मोर्चा" बताने वाले संगठन के सारे सूत्रधार, प्रवक्ता और संस्थापक घूम-फिरकर एक ही राजनीतिक दल (Aam Aadmi Party) और एक ही वैचारिक इकोसिस्टम से जुड़े हों, तो आंदोलन की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब यह जनता और देश के युवाओं को तय करना है कि क्या 'कॉकरोच जनता पार्टी' सचमुच युवाओं के हक की आवाज़ है, या फिर यह सटायर (व्यंग्य) और जेन-जी (Gen-Z) एक्टिविज़्म के मुखौटे के पीछे छिपा हुआ एक सुनियोजित राजनीतिक अभियान है।
इस पूरे खुलासे और कॉकरोच जनता पार्टी के बैकग्राउंड पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट सेक्शन में ज़रूर बताएं। (साभार: द न्यूज़ बेल्ट / राज नंदिनी)
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