Bengal Politics: टूट गई ममता बनर्जी की TMC: बंगाल की राजनीति में बड़ा धमाका, 59 विधायकों ने बनाया अलग गुट


ग्राम सामाचार, कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता बदलते ही ममता बनर्जी की टीएमसी के लिए बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। पहले चुनाव हार गए, अब पार्टी भी हाथों से खिसकती दिख रही है। टीएमसी में बड़ी बगावत हो गई है और करीब 59 विधायकों ने अलग गुट बना लिया है। इससे ममता बनर्जी और उनके चचेरे भाई अभिषेक बनर्जी को बड़ा धक्का लगा है। बागी विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) के तौर पर पेश किया है और उन्हें ही नया नेता बनाया जा रहा है।

ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा, जो टीएमसी से निष्कासित हो चुके हैं, ने खुलकर बगावत का बिगुल फूंक दिया है। सूत्रों की मानें तो ऋतब्रत बनर्जी को टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से 59 से ज्यादा विधायकों का समर्थन है। बागी गुट की ओर से ऋतब्रत बनर्जी को TMC के नए नेता प्रतिपक्ष के तौर पर पेश किया जा रहा है और विधानसभा में उनका कमरा सौंप दिया गया है। टीएमसी के करीब 20 विधायक पहले ही विधानसभा पहुंच चुके हैं, जो इस बगावत का संकेत देता है।

बागी विधायकों में शामिल मुस्तफिजुर रहमान ने कहा कि टीएमसी के 59 विधायकों ने हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हम सभी ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हम चाहते हैं कि किसी वरिष्ठ नेता को नेता प्रतिपक्ष बनाया जाए। इतना ही नहीं, बागी गुट ने ममता बनर्जी को पार्टी की चीफ एडवाइजर बनाने की इच्छा भी जताई है। यह ममता बनर्जी की पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि इससे उनकी पार्टी में फूट साफ नज़र आती है।

बंगाल में सत्ता बदलते ही ममता बनर्जी की सियासी चुनौतियां तेजी से बढ़ती जा रही हैं। पहले सत्ता गई और अब पार्टी हाथों से खिसकती दिख रही है। टीएमसी में बड़ी बगावत हो गई है जो पार्टी के भविष्य को लेकर सवाल खड़े करती है। बागी विधायकों का दावा है कि वे ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन पार्टी के भीतर बदलाव चाहते हैं। इसके बावजूद, 59 विधायकों का अलग होना किसी बड़े धमाके से कम नहीं है।

इस घटना के बाद बंगाल की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। विपक्ष अब मजबूत होता दिख रहा है और टीएमसी के लिए रास्ता संख्या गणित में मुश्किल हो गया है। पुलिस और प्रशासन एक्शन में आने के बाद टीएमसी के पुराने वफादार भी अब सोच में पड़ गए हैं। यह मामला सिर्फ एक पार्टी तक सीमित नहीं है—यह पूरे बंगाल के शासन और भविष्य पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। पुलिस की जांच और आगे की রাজনৈतिक विकास जैसा ही परिणाम आएगा, देश भर में इसकी चर्चा छिड़ जाएगी।

टीएमसी के निष्कासित नेताओं और वर्तमान नेतृत्व के बीच का विवाद क्या है ?

टीएमसी के निष्कासित नेताओं और वर्तमान नेतृत्व के बीच का मुख्य विवाद 2026 के विधानसभा चुनाव में करारी हार, भ्रष्टाचार के आरोपों, और पार्टी नेतृत्व के तरीके को लेकर है।


मुख्य विवाद के बिंदु:

1. चुनावी हार और I-PAC पर गुस्सा

बंगाल चुनाव में TMC की हार के बाद पार्टी के भीतर विद्रोह के स्वर खुलकर सामने आ गए हैं। कई नेता राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और चुनावी रणनीति बनाने वाली कंसल्टेंसी फर्म I-PAC पर गुस्सा फूट रहे हैं। कई नेता अभिषेक के "घमंडी व्यवहार" को हार का मुख्य कारण बता रहे हैं ।

2. "साइनगेट" - फर्जी हस्ताक्षर घोटाला

विधानसभा में जमा दस्तावेजों पर टीएमसी के ही कई विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर होने के आरोप लगे हैं। यह विवाद 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पार्टी के मुख्य सचेतक (व्हिप) की नियुक्ति के लिए सौंपे गए दस्तावेजों को लेकर है। आरोप है कि दस्तावेजों पर जो हस्ताक्षर हैं, वे या तो फर्जी हैं या विधायकों की उचित सहमति के बिना किए गए हैं। इस मामले में अभिषेक बनर्जी को समन मिला है और दो विधायकों को निष्कासित कर दिया गया है ।

3. घमंड, परिवारवाद और सीनियर नेताओं को किनारे करना

टीएमसी के कई नेता और विधायक पार्टी की इस हालत के लिए खुले तौर पर अभिषेक बनर्जी को दोषी ठहरा रहे हैं। 

4. ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा की बगावत

ऋतब्रत बनर्जी (ममता बनर्जी के चचेरे भतीजे) और संदीपन साहा, जो टीएमसी से निष्कासित हो चुके हैं, ने खुलकर बगावत का बिगुल फूंक दिया है। ऋतब्रत बनर्जी ने टीएमसी के करीब 50-59 विधायकों के समर्थन का दावा किया है और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने की कवायद में है। बागी गुट ने ममता बनर्जी को पार्टी की चीफ एडवाइजर बनाने की इच्छा जताई है ।

5. फाल्टा विवाद से फूटा असंतोष

21 मई को होने वाले पुनर्मतदान से फाल्टा के उम्मीदवार जहांगीर खान के नाटकीय रूप से हटने के फैसले ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोलकाता के दो और हावड़ा के एक विधायक ने जहांगीर के हटने को आधार बनाकर तीखे सवाल किए ।

6. पार्टी बैठकों में घटती मौजूदगी

पार्टी की बैठकों में विधायकों की घटती मौजूदगी, फर्जी हस्ताक्षर विवाद और कुछ नेताओं के इस्तीफों ने राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। कई विधायक बैठकों से दूर रहने लगे हैं ।

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- राजीव कुमार (Editor-in-Chief)

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