ग्राम समाचार कोलकाता, पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के 142 साल पुराने प्रतिष्ठित सुरेंद्रनाथ कॉलेज में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस से लेकर राजनीति तक को हिला दिया है। कैंपस में चल रहे सफाई अभियान के दौरान एक बंद स्टोररूम टूटा तो अंदर से दो सूटकेस मिले, और जब वो खोले गए तो सबकी आँखें फटी की फटी रह गईं। पहले सूटकेस में लाखों रुपये के नोट थे, लेकिन दीमक ने नोटों को बुरी तरह खा लिया था। दूसरे सूटकेस में एक रिवॉल्वर मिला जो बिल्कुल सुरक्षित था लेकिन अवैध था। कॉलेज के यूनियन रूम के अंदर ही एक और गुप्त बेडरूम-बाथरूम वाला कमरा भी मिला, जिसका ताला लंबे समय से लगा था।
यह घटना कैसे सामने आई यह समझना ज़रूरी है। KMC के डेंगू-रोकथाम अभियान के आदेश पर कैंपस में सफाई अभियान चल रहा था। सफाई टीम को एक बंद कमरा नज़र आया, जिसका ताला तोड़ा गया। अंदर स्टोररूम मिला, जहाँ से ये दोनों सूटकेस मिले। कॉलेज प्रशासन ने तुरंत मोचीपारा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। बंगाल पुलिस ने मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी है। अब तक दो लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है—देबाशीषBanर्जी जो कॉलेज के पूर्व गवर्निंग बॉडी सदस्य थे और परितोष दत्ता जो कॉलेज का वेंडर है।
पुलिस के अनुसार, इन दोनों ने लंबे समय से आपराधिक साजिश के तहत कॉलेज के ग्राउंड फ्लोर के कुछ कमरों और छात्र संघ के कमरे पर जबरन दखल कर अपना ताला लगा दिया था। अभी तक कई सवाल खुले हैं। पुलिस यह जानना चाहती है कि नोट कहाँ से लाए गए थे, कितने रुपये थे, किसके पैसे थे। हथियार क्यों रखा गया था, किसकी सुरक्षा के लिए। कमरा कब से बंद था और कितने समय से यह साजिश चल रही थी। क्या पूरे कैंपस में और भी बंद कमरे हैं जहाँ छानबीन की ज़रूरत है।
चूंकि पश्चिम बंगाल में टीएमसी सरकार के जाने के बाद पुलिस और प्रशासन एक्शन में है, इस मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। विपक्ष ने सवाल उठाए हैं कि इतना बड़ा कमरा कैसे लंबे समय तक छिपा रह सका। यह मामला सिर्फ एक कॉलेज तक सीमित नहीं है—यह शासन, पारदर्शिता और संस्थागत नज़रिए पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। पुलिस की जांच जैसा ही परिणाम आएगा, देश भर में इसकी चर्चा छिड़ जाएगी। छात्र, शिक्षक और स्थानीय लोग सभी अब इस जांच के नतीजे का इंतज़ार कर रहे हैं।
- न्यूज डेस्क कोलकाता।
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