Sunderpahari News: सुंदरपहाड़ी में पहाड़िया महिला मौत होते ही डॉक्टर फरार, क्लीनिक बना क्राइम सीन सड़क जाम


ग्राम समाचार, सुंदरपहाड़ी। गोड्डा जिले के सुंदरपहाड़ी थाना क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई है। बांसजोरी पंचायत के सरय टोला गांव स्थित एक प्राइवेट क्लीनिक में आदिम जनजाति पहाड़िया समुदाय की एक महिला की डिलीवरी के दौरान मौत हो गई, जबकि नवजात बच्ची सुरक्षित बताई जा रही है। घटना के बाद क्लीनिक संचालक, डॉक्टर और कर्मी मौके से फरार हो गए, जिससे पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया।

यह घटना बीती रात की बताई जा रही है, लेकिन सुबह होते ही आसपास के गांवों में यह चर्चा का विषय बन गई। सूचना मिलने पर पुलिस घटनास्थल पर पहुंचकर मामले की जांच में जुट गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार संबंधित क्लीनिक सनलाइफ हेल्थ केयर के नाम से किराए के मकान में संचालित हो रहा था और इसके वैध होने पर भी सवाल उठ रहे हैं।


मृतक महिला कुसुमघाटी पहाड़िया गांव की रहने वाली बताई जा रही है, जिसे प्रसव के लिए क्लीनिक में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद बच्ची का जन्म तो हुआ, लेकिन उचित देखभाल के अभाव में मां की मौत हो गई। सबसे गंभीर पहलू यह रहा कि घटना के तुरंत बाद क्लीनिक को बंद कर सभी जिम्मेदार लोग फरार हो गए।

मामले को लेकर सुंदरपहाड़ी थाना प्रभारी विधान पटेल ने पुष्टि की है कि महिला की मौत हुई है और बच्चा सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि क्लीनिक के सभी कर्मी फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश में जुटी है। स्थानीय सूत्रों का यह भी दावा है कि जिस जमीन पर यह क्लीनिक चल रहा था, वह पहाड़िया समुदाय की गोचर भूमि है, जिस पर अवैध तरीके से निर्माण कर क्लीनिक संचालित किया जा रहा था। यह इलाका झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बरहेट विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही पर और भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।


घटना से नाराज ग्रामीणों ने राजाभिट्ठा–सुंदरपहाड़ी मुख्य मार्ग को जाम कर दिया है। लोगों का कहना है कि जब सरकार मातृ-शिशु स्वास्थ्य को लेकर कई योजनाएं चला रही है, तब इस तरह के अवैध क्लीनिकों का संचालन और वहां ऐसी घटनाएं होना बेहद चिंताजनक है।

यह घटना सिर्फ एक लापरवाही नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य तंत्र की कमजोरियों, प्रशासनिक ढिलाई और अवैध चिकित्सा संस्थानों के बढ़ते जाल का गंभीर संकेत है। आदिम जनजाति जैसे संवेदनशील समुदायों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा देने के बजाय उन्हें जोखिम में डालना निंदनीय है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसी घटनाएं आगे भी दोहराई जा सकती हैं। प्रशासन को न केवल दोषियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करनी होगी, बल्कि क्षेत्र में संचालित सभी अवैध क्लीनिकों की जांच कर कठोर कदम उठाने होंगे। अब देखना होगा क्लीनिक संचालक पर कार्रवाई होगी या मामला यूं ही दब जाएगा?


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Editor - विलियम मरांड़ी। 9905461511

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- राजीव कुमार (Editor-in-Chief)

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