पीएम नरेंद्र मोदी के 'हरित भारत' मिशन के सपनों को साकार करने हेतु इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के कल्पना चावला ब्लॉक की वाटिका में सांयकाल पर्यावरण व जल संरक्षण, स्वच्छ भारत मिशन के सपनों को साकार करने हेतु वैदिक गायत्री मंत्रों उच्चारण के साथ पौधारोपण कार्यक्रम "ग्रीन इंडिया क्लीन - इंडिया मिशन" के तत्वाधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कुलपति प्रोफेसर असीम मिगलानी ने कहा 'हरित भारत मिशन' को सफल बनाने हेतु अधिक से अधिक पौधारोपण,वन क्षेत्रों को बढ़ाना और उनकी गुणवत्ता में सुधार करने की आवश्यकता है। जलवायु परिवर्तन में सुधार के लिए भारत में वन क्षेत्रों के विकास से वृक्षों द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड सोखने की क्षमता में वृद्धि होगी और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल होगी। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एस.एन.सचदेवा ने कहा पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनायें रखने हेतु पौधारोपण एवं संरक्षण के साथ-साथ प्लास्टिक प्रदूषण खत्म करना आज की समय की आवश्यकता है।प्रोफेसर अश्विनी महाजन ने कहा मानव जीवन प्रकृति के साथ अनुकूलता में ही संभव है। हम प्रकृति के पोषण संरक्षण तथा आवर्तनशील पद्धति से अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करें तो सदियों तक प्रकृति हमें पोषित करती रहेगी। इग्नू की प्रोफेसर इतिहासकार नंदिनी ने कहा पर्यावरण व जल संरक्षण पर हमें गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता है। कुलसचिव प्रोफेसर दिलबाग सिंह ने कहा प्रकृति के साथ समरसता में जीना सीखने से पर्यावरण की पहल के सुखद परिणाम मिलेंगे।प्रोफेसर रितु बजाज ने कहा पौधारोपण को हमें जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने की आवश्यकता है। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.जया शर्मा ने कहा वन या वृक्षों के आवरण को 50 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाना और 50 लाख हेक्टेयर वन या गैर वन भूमि में वन आवरण की गुणवत्ता में सुधार करने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के संयोजक सामाजिक कार्यकर्ता डॉ.आर.के.जांगड़ा विश्वकर्मा, राष्ट्रीय संयोजक, "ग्रीन इंडिया क्लीन- इंडिया मिशन" ने कहा हमें पीएम नरेंद्र मोदी के हरित भारत के सपनों को साकार करने हेतु पर्यावरण व जल संरक्षण एवं प्रकृति का संरक्षण करना हम सभी का नैतिक दायित्व बनता है। हरित भारत मिशन को सफल बनाने में जलवायु परिवर्तन,पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली और वैश्विक स्तर पर प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करना आज की समय की आवश्यकता है। उन्होंने विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से स्थानीय स्तर पर अधिक से अधिक पौधारोपण करने की अपील की गई।उन्होंने कहा जल संरक्षण मिशन के अंतर्गत पानी की बर्बादी रोकने और वर्षा जल संचय को जीवन का अहम हिस्सा बनाने की आवश्यकता है।ग्लोबल वार्मिंग के खतरों से बचने हेतु वैश्विक तापमान वृद्धि को रोकने के लिए ठोस कदमों की आवश्यकता पर विचार करने की जरूरत है। कार्यक्रम में समाज सुधारक व नारी शिक्षा के जनक ज्योतिबा फुले को नमन कर उनकी याद में भी पौधारोपण किया गया।इस अवसर पर कुलपति प्रोफेसर असीम मिगलानी, कुलपति प्रोफेसर एसएन सचदेवा, प्रो. एसके अग्रवाल, प्रो. अश्विनी महाजन, प्रोफेसर दिलबाग सिंह, प्रो. रितु बजाज, प्रो. नंदिनी, प्रो. रविंद्र, प्रो. अदिति शर्मा, डॉ. जया शर्मा, असिस्टेंट प्रो. कुसुम, डॉ. ईश्वर शर्मा, रिटायर्ड प्रो. एल.एन. शर्मा, प्रो. तेज सिंह, विश्व हिंदू परिषद रिटायर्ड प्रिंसिपल प्रो.एलएन शर्मा, रिसर्च स्कॉलर विपिन शर्मा,सरिता यादव आदि अनेक शिक्षाविद विशेष रूप से उपस्थित रहे।


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