ग्राम समाचार, भागलपुर। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में आम आदमी खुद के लिए समय नहीं निकाल पाता है। इस वजह से लोग धीरे-धीरे कई तरह की बीमारी के शिकार हो जाते हैं। लेकिन इससे बचने के लिए लोग घर में ही योग का सहारा ले सकते हैं। इसलिए कहा जाता है करें योग और रहें निरोग। योग शिक्षिका रीतिका का कहना है कि थायराइड ग्रंथि को स्वस्थ रखने और थायराइड के हार्मोन्स को संतुलित करने के लिए नियमित रूप से सर्वांगासन, हलासन, भुजंगासन, मत्स्यासन और उष्ट्रासन जैसे योगासन बेहद लाभकारी हं। इसके साथ ही उज्जायी प्राणायाम और कपालभाति का अभ्यास थायराइड के लिए अचूक माना जाता है।
सर्वांगासन
पीठ के बल लेटकर पैरों को ऊपर उठाएं और हाथों से पीठ को सहारा देते हुए शरीर को कंधे के बल सीधा खड़ा करें। यह आसन गले की थायराइड ग्रंथि में रक्त के प्रवाह को बढ़ाकर उसे सक्रिय करता है।
हलासन
सर्वांगासन के बाद पैरों को सिर के पीछे ले जाएं। यह मुद्रा गले और गर्दन पर दबाव डालती है, जिससे थायराइड का कार्यप्रणाली सुधरता है।
भुजंगासन
पेट के बल लेटकर शरीर के ऊपरी हिस्से को सांप की फन की तरह उठाएं। यह गले और छाती की मांसपेशियों को अच्छी स्ट्रेचिंग देता है।
उष्ट्रासन
घुटनों के बल बैठकर पीछे की ओर झुकें और एड़ियों को पकड़ें। यह गले की ग्रंथि को उत्तेजित करता है और हार्मोन संतुलन में मदद करता हह।
मत्स्यासन
पीठ के बल लेटकर पीठ को ऊपर उठाएं और सिर के ऊपरी हिस्से को जमीन से लगाएं। इससे गले और गर्दन में खिंचाव आता है, जो थायराइड के लिए फायदेमंद है।
प्राणायाम जो थायराइड में मदद करते हैं।
उज्जायी प्राणायाम: इसमें गले को सिकोड़कर सांस अंदर भरी जाती है और घर्षण की आवाज निकाली जाती है। यह गले की ग्रंथियों के लिए सबसे बेहतरीन अभ्यास है।
कपालभाति और अनुलोम-विलोम: यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को ठीक करते हैं और तनाव को कम करते हैं।
सावधानी: थायराइड के मरीजों को गर्दन को ज्यादा मोड़ने वाले या दबाव डालने वाले आसन हमेशा किसी योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही करने चाहिए।


0 comments:
एक टिप्पणी भेजें