खदान क्षेत्र में बच्चों से काम? सोशल मीडिया पर बड़ा खुलासा! कोयला खदान में बाल मजदूर का वीडियो वायरल, सिस्टम पर उठे सवाल!
ग्राम समाचार ललमटिया, गोड्डा। झारखंड के गोड्डा जिले के ललमटिया कोयला खदान प्रभावित क्षेत्र से विकास कार्य के बीच एक ऐसी वीडियो सामने आई है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि खदान प्रभावित गांव भेरेंडा साइड में गढ़वाल (संरक्षण दीवार) निर्माण का काम चल रहा है, जहां कुछ बच्चे काम करते नजर आ रहे हैं। ललमटिया कोयला खदान, जिसे Eastern Coalfields Limited (ECL) के अंतर्गत संचालित किया जाता है, लंबे समय से इस क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्यों के लिए जानी जाती है। लेकिन हाल में सामने आई तस्वीरों और वीडियो ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और बाल श्रम को लेकर सोशल मीडिया में नई बहस छेड़ दी है।
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में बच्चों को निर्माण स्थल पर औजारों के साथ काम करते देखा जा रहा है। किसी के हाथ में कुदाल तो कोई मसाला मिलाते दिखाई दे रहा है। इसके बाद बाल श्रम और घटिया निर्माण कार्य को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे हैं
हालांकि दूसरी ओर वही सोशल मीडिया चैनल में कुछ खबरों में यह भी दावा किया जा रहा है कि बच्चे वहां केवल मजदूरों के लिए खाना पहुंचाने आए थे। वही वही रिपोर्टर द्वारा मजदूरों से पूछे जाने पर मजदूर ने बताया कि पिताजी के लिए खाना पहुंचाने आए थे लेकिन तस्वीरों में बच्चों के हाथों में औजार और काम करते हुए दृश्य इस दावे पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।
मामले ने अब एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि क्या वास्तव में निर्माण कार्य में बाल श्रम हो रहा है या फिर राजमहल परियोजना के किसी अधिकारी को बदनाम करने के लिए यह खबरें फैलायी जा रही हैं। वहीं कुछ लोग इसे प्रायोजित खबर भी बता रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस मामले में कंपनी के अधिकारी या जिला बाल श्रम विभाग जांच करेंगे या यह मामला यूं ही सोशल मीडिया की बहस तक सीमित रह जाएगा।इस संबंध में संवाददाता से राजमहल परियोजना के डिप्टी मैनेजर (सिविल) संजीव कुमार से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि मामले की जानकारी ली गई है और उनके अनुसार बच्चे अपने पिता के लिए खाना पहुंचाने आए थे। हालांकि जब उनसे दोबारा पूछा गया कि वीडियो में तस्वीरों में बच्चों के हाथों में कुदाल और करनी जैसे औजार दिखाई दे रहे हैं और वे काम करते नजर आ रहे हैं, तो इस सवाल पर उन्होंने स्पष्ट जवाब देने के बजाय टाल-मटोल करते हुए अपनी बात रखने की कोशिश की।
क्षेत्र में पूरे मामले में यह भी चर्चा है कि बिना सही जांच और पुष्टि के कुछ खबरों में विकास कार्य की सराहना की जा रही है, जबकि कुछ रिपोर्टों में बाल श्रम का आरोप लगाया जा रहा है। खबर या भ्रम फैलाया गया ? ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि वास्तविक स्थिति क्या है। अब आगे देखना होगा जिला बाल श्रम विभाग इस मामले की जांच करेंगे या फिर यह मामला सोशल मीडिया की बहस बनकर ही रह जाएगा।



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