ग्राम समाचार, ब्यूरो रिपोर्ट गोड्डा। संथाली रात्रि आर्केस्ट्रा प्रोग्राम को लेकर आदिवासी समाज में लगातार विरोध तेज होता जा रहा है। समाज के लोगों और विभिन्न आदिवासी सामाजिक संगठनों का स्पष्ट कहना है कि रात में होने वाले संथाली नाइट प्रोग्राम सामाजिक ताने-बाने पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं, इसलिए इन्हें बंद किया जाना चाहिए। सोशल मीडिया के माध्यम से भी इस मुद्दे पर निरंतर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
इसी विरोध के मद्देनज़र हाल ही में गोड्डा जिले के बोआरीजोर प्रखंड अंतर्गत दलदली गोपालपुर में 26 जनवरी के अवसर पर प्रस्तावित रात्रि आर्केस्ट्रा कार्यक्रम को बंद कर दिया गया था। अब इसका असर महादेवबथान महाशिवरात्रि मेले पर भी साफ दिखाई दे रहा है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 15 फरवरी से महादेवबथान में महाशिवरात्रि मेला आयोजित किया जाना है। परंपरागत रूप से मेला दो दिनों के जागरण के बाद अंतिम दिन रात्रि संथाली आर्केस्ट्रा के साथ संपन्न होता था, लेकिन इस बार समाज के विरोध को देखते हुए रात्रि संथाली आर्केस्ट्रा का आयोजन नहीं किया जाएगा।
महादेवबथान मेला गोड्डा जिले का एक अत्यंत लोकप्रिय मेला है, जहां महाशिवरात्रि के अवसर पर दूर-दराज से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। इस वर्ष मेला समिति द्वारा लिया गया निर्णय समाजहित में बताया जा रहा है। मेला दिन में पूर्ववत जारी रहेगा, लेकिन रात्रि कार्यक्रम को पूरी तरह से बंद रखने का फैसला किया गया है।
महादेवबथान मेला समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र किस्कू ने मीडिया से बातचीत में बताया कि समाज जिस तरह से रात्रि संथाली आर्केस्ट्रा के विरोध में एकजुट होकर आवाज उठा रहा है, समिति उसका समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि महादेवबथान गांव में भी समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि रात्रि संथाली आर्केस्ट्रा का आयोजन नहीं होगा। साथ ही उन्होंने आसपास के क्षेत्रों में भी ऐसे रात्रि आदिवासी संथाली आर्केस्ट्रा कार्यक्रमों को बंद करने का आह्वान किया है, ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जाए।
समिति अध्यक्ष का मानना है कि फुटबॉल प्रतियोगिता हो या धार्मिक मेला उनकी आड़ में बढ़ते रात्रि संथाली आर्केस्ट्रा कार्यक्रमों पर अंकुश लगना जरूरी है। इससे आदिवासी समाज की सांस्कृतिक गरिमा और सामाजिक संतुलन दोनों सुरक्षित रहेंगे।
अब देखने वाली बात यह होगी कि महादेवबथान मेला समिति के इस निर्णय का आसपास के क्षेत्रों पर कितना प्रभाव पड़ता है और क्या अन्य स्थानों पर भी रात्रि संथाली आर्केस्ट्रा कार्यक्रमों पर रोक लगाई जाती है। फिलहाल, समाज के व्यापक हित में उठाया गया यह कदम आने वाले समय में एक मिसाल बन सकता है।

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