रेवाड़ी से शिक्षाविद मनोज वशिष्ठ ने कहा कि आज लोकसभा में पेश किया गया केंद्रीय बजट शिक्षा क्षेत्र के लिए "परिवर्तनकारी और भविष्योन्मुखी" है। मेरा मानना है कि बजट में शिक्षा के डिजिटलीकरण और स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) लैब्स की स्थापना के लिए आवंटित फंड मील का पत्थर साबित होगा। इस बजट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और मेधावी छात्रों के बीच की खाई को पाटने का प्रयास किया है।
मैं एक 'एकल खिड़की' (Single Window) पोर्टल की सराहना करता हूं, जो भ्रष्टाचार को कम करेगा और सीधे छात्रों के बैंक खातों में पैसा (DBT) पहुंचाएगा।पीएचडी और शोध कर रहे छात्रों के लिए 'नेशनल रिसर्च फाउंडेशन' के तहत फेलोशिप राशि में बढ़ोतरी "ब्रेन ड्रेन" (प्रतिभा पलायन) रोकने वाला कदम है।नए IIT और IIM का सुदृढ़ीकरण भी नई संस्थाओं की घोषणा के बजाय मौजूदा संस्थानों में सीटों की संख्या बढ़ाने और उनकी इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने पर जोर दिया गया है जिसको मैं "गुणवत्ता बनाए रखने की रणनीति" मानता हूं।विशेषीकृत AI विश्वविद्यालय हेतु बजट में 3 नए 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर AI' की स्थापना का प्रस्ताव है।मेरे अनुसार, यह भारत को चौथी औद्योगिक क्रांति (Industry 4.0) के लिए तैयार करेगा।ग्रामीण क्षेत्रों में मॉडल स्कूल एवं पीएम-श्री (PM-SHRI) स्कूलों के विस्तार के लिए अतिरिक्त फंड ग्रामीण भारत में शिक्षा के स्तर को सुधारने की कुंजी है। मैं इसे 'सामाजिक न्याय का शैक्षिक संस्करण' मानता हूं।उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसंधान हेतु आवंटित निधि पर मेरी राय है कि यह 'ब्रेन ड्रेन' के अभिशाप को 'ब्रेन गेन' के वरदान में बदलने वाली है।यह बजट शिक्षा की पुरानी जर्जर नौका को त्यागकर, आधुनिकता के महासागर में उतरने वाला एक 'स्वर्ण-पोत' है।इसमें सुदूर ग्रामीण अंचल के अंतिम छोर पर खड़े छात्र के लिए भी संभावनाओं का आकाश है और महानगरीय मेधा के लिए वैश्विक क्षितिज।"

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