Editorial: भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026: समावेशी विकास का नया अध्याय


भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में वैश्विक एआई बहस को नया आयाम दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्घाटन भाषण के माध्यम से प्रस्तुत एमएएनएवी विजन और सात चक्रों की रूपरेखा एआई को केवल तकनीक नहीं, बल्कि मानव कल्याण का साधन बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है।

समिट के सात चक्र—स्वास्थ्य, कृषि, सुरक्षित एआई, विज्ञान, समावेशन, संसाधनों का लोकतंत्रीकरण और आर्थिक विकास—'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' के सिद्धांत पर टिके हैं। ये चक्र लोगों, धरती और प्रगति के तीन सूत्रों को जोड़ते हुए एआई के व्यावहारिक उपयोग पर केंद्रित हैं। उदाहरणस्वरूप, स्वास्थ्य चक्र में एआई निदान को सुलभ बनाएगा, जबकि कृषि चक्र में जलवायु अनुकूलन सुनिश्चित करेगा। इनका उद्देश्य वैश्विक दक्षिण की चुनौतियों—जैसे भाषा बाधा, स्वास्थ्य पहुंच और आर्थिक असमानता—का समाधान करना है, जहां भारत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे UPI और आधार का मॉडल साझा कर रहा है।

पीएम मोदी का 'डिजाइन इन इंडिया, डिलीवर टू द वर्ल्ड' का आह्वान भारत को एआई संप्रभुता की दिशा में आगे बढ़ा रहा है। टाटा-ओपनएआई का 100 मेगावाट डेटा सेंटर और गूगल का विशाखापत्तनम हब जैसे कदम 38,000 जीपीयू वाले साझा प्लेटफॉर्म को मजबूत करते हैं। वैश्विक नेता जैसे सुंदर पिचाई और एंटोनियो गुटेरेस ने भारत के समावेशी दृष्टिकोण की सराहना की, जो एआई को 'सेफ्टी' से 'इम्पैक्ट' की ओर मोड़ रहा है। हालांकि, डेटा गोपनीयता और ऊर्जा खपत जैसी चुनौतियां बरकरार हैं, जिन्हें एमएएनएवी जैसे नैतिक ढांचे से संबोधित किया जा सकता है।

यह समिट 15 ठोस परिणामों के साथ एआई गवर्नेंस में बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देगा। भारत वैश्विक दक्षिण के लिए पुल का काम कर रहा है, जहां एआई रोजगार सृजन और टिकाऊ विकास को जोड़ेगा। यदि ये चक्र सफल हुए, तो एआई न केवल भारत, बल्कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए समृद्धि का स्रोत बनेगा।

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Editor - न्यूज डेस्क, नई दिल्ली. Mob- 8800256688

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- राजीव कुमार (Editor-in-Chief)

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