Market News: दलाल स्ट्रीट पर 'ब्लैक थर्सडे'—क्या यह केवल सुधार है या गहरे संकट की आहट ?

 

भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। जिस बाजार ने सुबह की शुरुआत हरे निशान और उत्साह के साथ की थी, वह शाम होते-होते 1,236 अंकों (सेंसेक्स) की भारी गिरावट के साथ लहूलुहान होकर बंद हुआ। निफ्टी भी 25,500 के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे फिसल गया। निवेशकों के लिए यह दिन इसलिए भी भयावह रहा क्योंकि महज 6 घंटों के भीतर 7 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति खाक हो गई।

गिरावट का ट्रिगर: वैश्विक अनिश्चितता और युद्ध की आहट

आज की गिरावट के पीछे कोई एक कारण नहीं, बल्कि घरेलू और वैश्विक कारकों का एक घातक मिश्रण रहा। सबसे बड़ा झटका अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से लगा। जैसे ही अंतरराष्ट्रीय मीडिया में अमेरिका द्वारा संभावित सैन्य कार्रवाई की खबरें आईं, वैश्विक बाजारों में 'रिस्क-ऑफ' (Risk-off) की स्थिति बन गई। निवेशकों ने जोखिम वाली संपत्तियों (शेयरों) से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश (सोना और डॉलर) की ओर रुख किया।


भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए ब्रेंट क्रूड का $70 प्रति बैरल के पार जाना हमेशा से चिंता का विषय रहा है। आज तेल की कीमतों में आए उछाल ने सीधे तौर पर भारतीय रुपये और राजकोषीय घाटे पर दबाव बढ़ा दिया। इसके साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ताजा बयान, जिसमें ब्याज दरों में कटौती को लेकर स्पष्टता का अभाव था, ने बाजार की कमर तोड़ दी।

तकनीकी नजरिए से देखें तो पिछले तीन दिनों की तेजी के बाद बाजार में एक सुधार (Correction) अपेक्षित था। लेकिन आज जो हुआ, वह केवल सुधार नहीं बल्कि पैनिक सेलिंग की श्रेणी में आता है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPIs) की निरंतर बिकवाली और मिडकैप-स्मॉलकैप शेयरों में अत्यधिक ऊंचे वैल्यूएशन ने आग में घी का काम किया। आईटी सेक्टर, जो शुरुआत में बाजार को सहारा दे रहा था, वह भी अंततः बिकवाली के दबाव को झेल नहीं पाया।

बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन काफी उतार-चढ़ाव भरे हो सकते हैं। जब तक भू-राजनीतिक मोर्चे पर शांति नहीं लौटती, भारतीय बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी।

 आज की गिरावट उन निवेशकों के लिए एक चेतावनी है जो बाजार की एकतरफा तेजी के आदी हो चुके थे। निवेश के बुनियादी नियम—विविधीकरण (Diversification) और धैर्य—ही इस अस्थिरता में सुरक्षा कवच बन सकते हैं। बाजार फिलहाल एक 'वेट एंड वॉच' (Wait and Watch) की स्थिति में है, जहाँ हर उछाल पर बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है।

- राजीव कुमार

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- राजीव कुमार (Editor-in-Chief)

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