एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, बावल में आज भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) रेवाड़ी द्वारा महिला स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस सत्र में सौ से अधिक महिलाओं एवं छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और खुलकर अपनी जिज्ञासाएँ व्यक्त कीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ आईएमए रेवाड़ी के अध्यक्ष डॉ. नीरज यादव के प्रेरणादायक संबोधन से हुआ। उन्होंने “किशोरावस्था में पोषण एवं संतुलित आहार” विषय पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन तथा आवश्यक विटामिन्स की कमी से किशोरियों के शारीरिक एवं मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
🔹डॉ. नीरज यादव ने स्वच्छता पर विशेष बल देते हुए हाथ धोने के 7 चरणों को विस्तार से समझाया और कहा कि सही तरीके से हाथ धोना अनेक संक्रमणों से बचाव का सबसे सरल और प्रभावी उपाय है। उन्होंने यह भी कहा कि आईएमए रेवाड़ी समाज में स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने के लिए निरंतर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करती रही है और भविष्य में भी यह अभियान जारी रहेगा।
🔹 डॉ. पद्मा ने “सामान्य मासिक धर्म चक्र”, “सामान्य एवं असामान्य दर्द” तथा “रेड फ्लैग संकेतों” के विषय में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कब मासिक धर्म का दर्द सामान्य माना जाता है और किन परिस्थितियों में स्त्री रोग विशेषज्ञ से तुरंत परामर्श लेना आवश्यक है।
🔹 डॉ. किरण ने मासिक धर्म स्वच्छता पर प्रकाश डालते हुए सेनेटरी पैड, टैम्पॉन और मेंस्ट्रुअल कप के सही एवं सुरक्षित उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने पीरियड्स से जुड़े प्रचलित मिथकों—जैसे व्यायाम न करना, स्नान न करना या इसे अशुद्ध मानना—को वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर दूर किया।
🔹 डॉ. पूनम यादव ने मासिक ब्रेस्ट सेल्फ एग्जामिनेशन (स्वयं स्तन जांच) की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि प्रत्येक महिला को हर महीने स्वयं जांच करनी चाहिए ताकि किसी भी असामान्य गांठ या परिवर्तन का समय रहते पता लगाया जा सके। उन्होंने स्तन कैंसर के लक्षणों, जोखिम कारकों एवं समय पर जांच के महत्व पर भी विस्तृत चर्चा की
इस अवसर पर कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर, बावल के प्रिंसिपल डॉ. नरेश कौशिक सहित
डॉ. अमरजीत (एग्रोनॉमी),
डॉ. भरत तेंदू जैन (जेनेटिक्स एवं प्लांट ब्रीडिंग),
डॉ. आर.एस. सुथार (लाइवस्टॉक मैनेजमेंट) तथा
डॉ. तन्वी (माइक्रोबायोलॉजी) उपस्थित रहे।
प्रिंसिपल डॉ. नरेश कौशिक ने आईएमए रेवाड़ी की पूरी टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम छात्राओं एवं महिलाओं के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन हेतु पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में महिलाओं एवं छात्राओं ने खुलकर प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा सरल एवं संतोषजनक उत्तर दिया गया। संपूर्ण कार्यक्रम ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं अत्यंत प्रभावी रहा।
यह जागरूकता अभियान महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग, आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ।






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