राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रेवाड़ी में आज 'शेर-ए-पंजाब' लाला लाजपत राय की जयंती अत्यंत गरिमा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने महान स्वतंत्रता सेनानी की मूर्ति पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।प्राचार्य विनोद यादव के मार्गदर्शन में आयोजित इस जयंती श्रृंखला में वरिष्ठतम व्याख्याता डॉ नम्रता सचदेवा ने कहा कि लालाजी ने भारतीय राजनीति को 'याचिका' के दौर से निकालकर 'अधिकार' के दौर में पहुँचाया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार रेवाड़ी से लाहौर तक के उनके शैक्षिक सफर ने उन्हें 'लाल-बाल-पाल' की अजेय त्रिमूर्ति का हिस्सा बनाया। पंजाब नेशनल बैंक की स्थापना से लेकर साइमन कमीशन के विरोध तक, उनका जीवन हर भारतीय के लिए प्रेरणास्रोत है।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए शिक्षाविद मनोज वशिष्ठ ने लाला लाजपत राय के जीवन और रेवाड़ी के ऐतिहासिक संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि रेवाड़ी की शैक्षिक विरासत लालाजी के व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला रही है। 1880 के दशक में लालाजी के पिता मुंशी राधाकृष्णन इसी विद्यालय (तत्कालीन राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय) में उर्दू शिक्षक थे और लालाजी ने अपनी कक्षा छठी की शिक्षा यहीं से प्राप्त की थी। वक्ताओं राजपाल यादव,राजेश कुमारी,शालू,जितेन्द्र यादव ने बताया कि लालाजी के भीतर नैतिकता, साहित्य प्रेम और स्वाभिमान का बीजारोपण इसी विद्यालय की चारदीवारी में हुआ था।बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी लालाजी द्वारा पंजाब नेशनल बैंक की स्थापना, स्वदेशी आंदोलन का नेतृत्व और शिक्षा के प्रसार में उनके योगदान को याद किया गया। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उनके प्रसिद्ध उद्घोष — "मेरे शरीर पर पड़ी हर लाठी ब्रिटिश साम्राज्य के ताबूत की आखिरी कील साबित होगी" — के माध्यम से देशभक्ति की अलख जगाई गई।विद्यालय के प्राचार्य विनोद यादव ने अपने संदेश में कहा कि यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि जिस विद्यालय प्रांगण में आज हम खड़े हैं, वहां कभी लाला लाजपत राय जैसे युगपुरुष ने शिक्षा प्राप्त की थी। इस विरासत को सहेजना और उनके आदर्शों पर चलना ही हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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