रेवाड़ी के राज इंटरनेशनल स्कूल में समाज सुधारक और नारी-शिक्षा के अग्रदूत महात्मा ज्योतिबा फुले की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया। महात्मा ज्योतिबा फुले को अपनी श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए राजेन्द्र सैनी , चेयरमैन राज इंटरनेशनल स्कूल, रोशन लाल सैनी (पूर्व प्रधान सैनी सभा रेवाड़ी), मुकेश सैनी (CM विंडो एमिनेंट पर्सन), गिरधारी लाल सैनी, हरीश सैनी, रतनलाल सैनी, नरेश सैनी, महेंदर सैनी, हेमंत सैनी और राहुल सैनी सहित समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहें। इस मौक़े पर आल इंडिया सैनी सेवा समाज दक्षिण हरियाणा के प्रधान नवीन सैनी और समाज के गणमान्य व्यक्तियों ने उनकी तस्वीर पर पुष्पांजलि एवं माल्यार्पण किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रधान श्री नवीन सैनी ने कहा कि ज्योतिबाई फुले ने वंचित, शोषित और उपेक्षित वर्गों के उत्थान के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम मानते हुए जातिगत भेदभाव और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध दृढ़तापूर्वक आवाज उठाई, जिससे भारतीय समाज को नई चेतना और दिशा मिली। महात्मा ज्योतिबा फुले का कहना था शिक्षा वह शेरनी का दूध हैं जो पीएगा वो दहाड़ेगा इससे उनका अभिप्राय समाज में आने वाली जागरूकता से था I उन्होंने अपनी स्मृति को याद करते हुए आगे कहा उनके दादा स्वर्गीय श्री गुरदयाल सिंह सैनी महात्मा ज्योतिबा फुले के शिद्धान्तो को अनुसरण करने वाले व्यक्ति थे और उन्ही के मार्गदर्शन में उन्होंने अपने जीवन में शिक्षा क्षेत्र में काम करने का लक्ष्य बनाया और आज भी वह अपने जीवन में शिक्षा क्षेत्र में जो भी कार्य कर रहे हैं उसकी प्रेरणा कही न कही महात्मा ज्योतिबा फुले हैं।
प्रधान नवीन सैनी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि फुले जी की विचारधारा आज भी सामाजिक समानता, नारी सशक्तीकरण और न्यायपूर्ण समाज व्यवस्था की स्थापना के लिए प्रेरक शक्ति बनी हुई है। उनके मानवीय मूल्य आगामी पीढ़ियों को निरंतर मार्गदर्शन देते रहेंगे। उनके पदचिह्नों पर चलते हुए हम भी समाज के बहुमूल्य विकास के लिए हमेशा अग्रसर रहेंगे । कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और सभी ने फुले जी के आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया ।
पूर्व प्रधान रोशन लाल सैनी ने अपने संबोधन में कहा ज्योतिबा को संत-महत्माओं की जीवनियाँ पढ़ने में बड़ी रुचि थी। उन्हें ज्ञान हुआ कि जब भगवान के सामने सब नर-नारी समान हैं तो उनमें ऊँच-नीच का भेद क्यों होना चाहिए। स्त्रियों की दशा सुधारने और उनकी शिक्षा के लिए ज्योतिबा ने 1848 में एक स्कूल खोला। यह इस काम के लिए देश में पहला विद्यालय था। लड़कियों को पढ़ाने के लिए अध्यापिका नहीं मिली तो उन्होंने कुछ दिन स्वयं यह काम करके अपनी पत्नी सावित्री को इस योग्य बना दिया। मुकेश सैनी ने अपने संबोधन में कहा उन्होंने बाल-विवाह का विरोध किया और विधवा-विवाह का समर्थन किया, तथा किसानों और मजदूरों के अधिकारों के लिए भी आवाज उठाई। फुले ने अपने जीवन को महिलाओं, वंचितों और शोषित किसानों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया. उन्होंने समाज में जाति और लैंगिक असमानताओं को चुनौती दी।उनके काम और विचार डॉ. भीमराव अंबेडकर के लिए भी प्रेरणा बने।

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