मैं पिछले 17 वर्षों से गोड्डा जिला अंतर्गत महागामा प्रखंड के मध्य विद्यालय चिल्हा में सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत हूं। आमतौर पर आदिकाल से ही शिक्षकों का गौरवपूर्ण इतिहास रहा है। साथ उनका दिव्य आभामंडल भी। वक्त के अनेक जाने-अनजाने थपेड़ों से लहूलूहान होकर भी एक उन्नत समाज निर्माण के दायित्व का भार भी शिक्षकों पर ही है। जिसका वे पूरी ईमानदारी और निष्ठा से निर्वहन करते चले आ रहे हैं। जिनमें डॉ० राधाकृष्णन और अबुल कलाम आजाद जैसे अनगिनत विभूतियों ने अपनी आहुतियां दी हैं। वे ही हमारे आदर्श भी हैं। मैं भी निष्ठा पूर्वक अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए इसी गौरवपूर्ण श्रृंखला की एक कड़ी मात्र हूं।
तमाम निराशाजनक परिदृश्य के बावजूद हमारे द्वारा शिक्षकों के लिए निर्धारित सरकारी दायित्वों के साथ-साथ सामाजिक सरोकार के कार्यों का ईमानदारी और निष्ठापूर्वक निर्वहन किया जाता रहा है। जो प्रतिकूल परिस्थितियों में एक मशाल जलाए रखने का प्रयास भर है। यही एक शिक्षक का दायित्व भी है।
मैं एक दीपक की तरह जलना चाहता हूं ताकि तारे जमीं पर के भविष्य के नींव को मजबूत बना सकूं, अपने स्कूल के मासूम फूलों को एक सुंदर क्यारी में सुगंधित, पुष्पित, पल्लवित होता देख सकूं। इन चिरागों को जो हमारे देश का भविष्य हैं को, हंसते-मुस्कुराते और रौशन होता देख सकूं। उन्हें आज के बिखरते सामाजिक ताना-बाना को एक कुशल जुलाहे की तरह जोड़ना सीखा सकूं। अपने छात्रों को जीवन पथ पर अग्रसर कर सकूं। मैंने एक शिक्षक के तौर पर यही लक्ष्य निर्धारित किया है।
मैं इस प्रखंड के परिवर्तन दल एवं निष्ठा दल का भी सदस्य हूं। रिसोर्स पर्सन भी। ज्ञानसेतु और एफएलएन जैसे महती कार्यक्रम का फैसिलिटेटर होने के साथ-साथ अनुश्रवण दल का भी सदस्य हूं। मैं बतौर प्रशिक्षक अनेक ट्रेनिंग प्रोग्राम को भी लीड कर चुका हूं। जिसमें हमारे द्वारा अपने वरीय सहकर्मी, गुरुजनों तथा अपने छोटे भ्राता सामान शिक्षकों को प्रशिक्षण देने का सफलतापूर्वक कार्य किया है। यह हमारे लिए हर्ष और गर्व का भी विषय है।
शिक्षा के प्रति मेरी व्यक्तिगत सोच है कि यह कोई व्यवसाय अथवा जीवन निर्वाह का साधन नहीं है। बल्कि एक सुंदर, सहनशील, विवेकपूर्ण और विकसित समाज निर्माण की दिशा में पहला कदम और प्रयास है। और मुझे यह गौरवपूर्ण दुर्लभ अवसर मिला है। सरकार और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों एवं दायित्वों को बखूबी समझता हूं। और इस दिशा में सतत प्रयत्नशील भी रहता हूं।
आज शिक्षा एक ऐसा क्षेत्र बनकर उभर रहा है जो मौजूदा प्रोफेशनल युग में लोगों की तमाम अपेक्षाओं के बावजूद भी अनेक गरीब, बेबस और असहाय ग्रामीण परिवारों के लिए ज्ञान और संस्कार की एकमात्र उम्मीद है। शिक्षा ही उन्हें मुख्य धारा में शामिल करने और उनके उत्थान को लेकर शक्तिशाली हथियार भी है। यह महायज्ञ की तरह से है। मैं भी जिसका एक दीपक हूं, एक माध्यम। यह हमारे लिए एक मिशन है।
मेरे लिए शिक्षण कार्य केवल एक दिनचर्या और जीवन यापन का माध्यम नहीं है। अपितु संवेदनशील रहकर जीवन का सबसे बेसकीमती जज्बात है। केवल पढ़ना ही नहीं बल्कि पढ़ना भी मेरे लिए जीवन जीने की संजीवनी बन चुकी है। मैं सतत अध्ययनशील रहकर विद्यालय में अध्यापन कार्य करता हूं। निरंतर अध्ययन जीवन के प्रति अपना दृष्टिकोण समझने और अध्यापन के दौरान विद्यालय में अभिनव प्रयोग करने की दिशा में अत्यंत मददगार साबित हुआ है। शिक्षक और छात्रों के बीच, शिक्षक और शिक्षक के बीच, शिक्षक और अभिभावक के बीच, शिक्षक और प्रशासन के बीच, यहां तक की विद्यालय प्रबंधन और स्थानीय लोकल राजनीतिज्ञों के साथ भी इस अध्ययन और अध्यापन ने एक सुंदर सामंजस्य बैठा कर अपने विद्यालय को अच्छी ग्रेडिंग दिलाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
यह मिशन तो हमारे जीवन का उद्देश्य बन ही चुका है। जीवन का शेष भाग भी इस ज्ञान यज्ञ को ही समर्पित है।
- ग्राम समाचार, गोड्डा।

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