Chandan News: जल मीनार तो जैसे तैसे पर चापानल भी खराब पड़े

ग्राम समाचार,चांदन,बांका। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी सात निश्चय योजना के तहत घर घर नल जल पहूचाने का योजना तो लगभग प्रखंड क्षेत्र में सोभा का वस्तु बना हुआ है। और प्रखंड मुख्यालय में बैठे अधिकारी खुब ताल ठोक कर खाना पुर्ती कर लोगों को शुद्ध जल मिलने की बात करते हैं। लेकिन जल मीनार से पानी मिलना तो दूर विभागीय उदासीनता के कारण प्रखंड दर्जनों चापनल ख़राब होने से लोगों पानी पिने के तरस रहे हैं, ताजा मामला चांदन प्रखंड क्षेत्र के चांदन कटोरिया मुख्य मार्ग के ग्राम रगदाडीह स्थित पूरन यादव के घर के समीप स्थित चापाकल विगत कई महीनों से खराब पड़ा है। इस कारण आस पास व राहगीरों को खासी परेशानी हो रही है। विदित हो कि उक्त स्थान पर दो चापाकल है, और दोनों चापाकल खराब पड़ा हुआ है। लेकिन पीएचडी विभाग की ओर से हर साल श्रावणी मेला वक्त उस चापाकल का रंगाई- पुताई कर कागजों पर खानापूर्ति कर ली जाती है।मतलब साफ है कि पीएचडी विभाग के द्वारा पीले रंग की, अगर रंगाई चापाकल का हो गई है।

तो मान लीजिए की निश्चित चापाकल की मरम्मती हो गई। भले चापाकल आपका चलता नहीं हो लेकिन कागजों पर खानापूर्ति हो गई। यह मार्ग में हमेशा यात्रियों का आवागमन का मार्ग है। जहां कभी-कभी यात्रीगण रुक कर अपनी विश्राम स्थल बनाकर राहगीर खाना बनाते हैं, विश्राम करते हैं। लेकिन जब चापाकल अपनी आपबीती सुनाती है कि मेरी पाइप खराब है पानी नहीं दे पा रही हूं। तो क्या कहना यात्रीगण सारी ठहराव की व्यवस्था करने के बावजूद चापाकल की दयनीय स्थिति देखकर पुनः दूसरे स्थान की तलाश में जाना पड़ता है। उसी स्थान में कई घरों का बसेरा बना हुआ है। जिन्हें नित्य दिन पानी की तलाश में घर से हाफ किलोमीटर दूर जाकर आदिवासी टोला में पानी लाना पड़ रहा है। कुछ ही महीनों बाद गर्मी का मौसम आ रहा है अगर विभागीय उदासीनता के कारण पेयजल कूप की व्यवस्था या मरम्मत नहीं की गई तो, इस क्षेत्र में पानी की घोर किल्लत हो जाएगी। रगदाडीह गांव के दर्जनों परिवार के लोग इसी चापाकल पर आश्रित है। चापाकल खराब होने से लोगों को दूर दराज स्थित पेयजल स्रोतों से काम चलाना पड़ रहा है । गृहिणियों व पशुपालकों को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई बार विभागीय पदाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से भी गुहार लगाई जा चुकी है। कई बार गांव के लोगों द्वारा आपस मे चंदा कर चापाकल की मरम्मत कराते रहे हैं। इस संबंध में कौशल्या देवी, मंजू देवी, सीमा देवी ने बतायी कि हमसब गरीब आदमी हैं, चापाकल का मरम्मत करवाना चाहती हूं काफी अधिक रुपया मिस्त्री मांगता है ऐसी स्थिति में आर्थिक तंगी रहने के कारण मजबूरी बस दूर से ही पानी लाना बच्चों को पालन करना उचित समझती हूं।

उमाकांत साह,ग्राम समाचार संवाददाता,चांदन।

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Editor - कुमार चंदन,ब्यूरो चीफ,बाँका,(बिहार)

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