अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया गया है। गांव धरचाना की महिलाओं द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया आज के कार्यक्रम में मुख्य अतिथ कैलाश चंद एड्वोकेट व सीमा एड्वोकेट रही, सीमा एड्वोकेट ने महिलाओं को आर्थिक विकास कैसे कर सकते बारे अवगत कराया, ओर कैलाश चंद एड्वोकेट ने महिलाओ को बताया कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस से जुड़ी कुछ बातें 8 मार्च को पूरी दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है इसकी शुरुआत आज से करीब एक सदी पहले समाजवादी आंदोलन से हुई थी आज इसका स्वरूप काफी बदल चुका है दुनिया के हर हिस्से में महिला दिवस अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है आपने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के बारे में या तो मीडिया से जाना होगा या फिर अपने आसपास के लोगो से इस बारे में बातें करते सुना होगा लेकिन अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया क्यों जाता है यह कोई वजह है या विरोध का नया तरीका और इसी तरह कोई अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस भी मनाया जाता है क्या ? पिछली एक सदी से भी ज्यादा समय से दुनिया भर में लोग 8 मार्च को महिलाओं के खास दिन के तौर पर मनाते आए हैं हम आपको बताते हैं कि इसकी क्या वजह है
Rewari News : गांव धरचाना बावल में महिलाओ ने मनाया अंतराष्ट्रीय महिला दिवस
महिला दिवस की शुरुआत कब हुई थी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस असल में एक मजदूर आंदोलन से उपजा है जिसे बाद में संयुक्त राष्ट्र ने सालाना आयोजन की मान्यता दी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की शुरुआत आज से 112 वर्ष पहले यानी साल 1960 में हुई थी जब अमेरिका ने न्यूयॉर्क शहर में करीब 15000 महिलाओं सड़कों पर उतरी थी यह महिलाएं काम के कम घंटों बेहतर तनखा और वोटिंग के अधिकार की मांग के लिए प्रदर्शन कर रही थी महिलाओं के इस विरोध प्रदर्शन के 1 साल बाद अमेरिका की सोशलिस्ट पार्टी ने पहले राष्ट्रीय महिला दिवस को मनाने की घोषणा की थी महिला दिवस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने का विचार एक महिला क्लारा जेटकिन का था क्लारा जेटकिन ने वर्ष 1910 में विश्व स्तर पर महिला दिवस मनाने का प्रस्ताव किया था क्लारा उस वक्त यूरोपीय देश डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में कामकाजी महिलाओं की अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में शिरकत कर रही थी इस कॉन्फ्रेंस में उस वक्त 100 महिलाएं मौजूद थी जो 17 देशों से आई थी इन सभी महिलाओं ने सर्वसम्मति से क्लारा के इस प्रस्ताव को मंजूर किया था पहला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस वर्ष 1911 में आस्ट्रेलिया डेनमार्क जर्मनी और स्विट्जरलैंड में मनाया गया था इसलिए तकनीकी रूप से इस साल हम 110 अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मना रहे हैं अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की औपचारिक मान्यता वर्ष 1975 में उस वक्त मिली जब संयुक्त राष्ट्र संघ में मनाना शुरू किया अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को पहली बार 1996 में एक टीम के तहत मनाया गया था उस साल संयुक्त राष्ट्र ने इसकी थीम तय की थी अतीत का भविष्य की योजना इस साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की थीम तय की गई है एक विश्व में समानता पर आधारित दुनिया इसके तहत लोगों से अपील की जाती है कि दुनिया की सभी देश और सभी नागरिक मिलजुलकर ऐसी दुनिया बनाई जहां महिलाओं और पुरुषों को बराबरी के अधिकार मिले आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस एक ऐसा दिन बन गया है जिसमें हम समाज में राजनीति में और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में महिलाओं की तरक्की का जश्न मनाते हैं जबकि इस आयोजन की राजनीति शाखाओं का मतलब दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन और हड़ताल का आयोजन करना होता है इसकी मदद से लोगों को इस बात से आगाह किया जाता है कि आज भी दुनिया में पुरुषों और महिलाओं के बीच कितनी मानता है कितना फर्क बड़ा फर्क है अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस कब है पूरी दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाता है महिला अधिकार कार्यकर्ता और उनके लिए कोई एक तारीख नहीं थी और इसे औपचारिक भी वर्ष 1938 की मांग करते हुए 4 दिनों की हड़ताल की इसके बाद उसके बाद अपना पद छोड़ना पड़ा इसके बाद रूस में बनी अस्थाई सरकार ने महिलाओं को वोट करने का अधिकार दिया उसमें यह हड़ताल हुई थी तो वहां जूलियन कैलेंडर चलता था जिसके अनुसार उस दिन 23 फरवरी की तारीख थी वही दुनिया के बाकी देशों में प्रचलित ग्रो ग्रो रियल में वह तारीख 8 मार्च थी इसलिए तब से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाने लगा
कैलाश चंद अधिवक्ता ने महिलाओं को बताया कि एक वो समय था जब महिलाएं सिर्फ चौका चूल्हा तक सीमित थी परन्तु आज की महिला प्रत्येक छेत्र में आगे है चाहे चांद की पहुच हो या वैज्ञानिकता की बात हो या राष्ट्र सुरक्षा की प्रत्येक छेत्र में महिला पुरुषों के साथ कंन्धे से कंधा मिलाकर चल रही है और महिलाओ के अधिकार, व कर्तव्यो बारे अवगत कराया और सरकार की योजनाओं बारे अवगत कराया कि महिलाओं हेतु सरकार द्वारा काफी योजनाये चल रही है बताया कि आज की
कैलाश चंद एड्वोकेट ने काफी सरकारी योजनाओं के फॉर्म भी निःशुल्क वितरित किये और निजी स्कूलों में निःशुल्क शिक्षा के बारे में भी अवगत करवाया आज के कार्यक्रम गांव धरचाना। पूनम, इंद्रा, बीरमति, सीमा, विना, मुनेश, सुदेश, कविता, पप्पी देवी, आदि सैकड़ों महिलाएं उपस्थित रही।

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