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Rewari News : विश्व टीबी दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन, टीबी विश्व का खतरनाक इन्फेकशन : CMO

रेवाड़ी, 24 मार्च। सीएमओ डॉ सुशील माही ने कहा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डबल्यूएचओ) के तत्वाधान में पूरे विश्व में विश्व टीबी दिवस पर टीबी से संबंधित कई कार्यक्रम चलाए जाते हैं, जिसका उद्देश्य इस वैश्विक बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करना और इसे खत्म करना है।



डॉ सुशील माही आज यहां विश्व टीबी दिवस पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने बताया कि 1882 में 24 मार्च के दिन जर्मन फिजिशियन एवं माइक्रोबायोलॉजिस्ट रॉबर्ट कोच ने इस जानलेवा बीमारी के कारक बैक्टीरिया के पहचान करने की पुष्टि की थी, जिसके फलस्वरूप टीबी के निदान और इलाज में बड़ी मदद मिली।
सीएमओ ने बताया कि विश्व टीबी दिवस, हर वर्ष एक विशेष थीम के साथ आयोजित किया जाता है। इस वर्ष 2021 के लिए इसका थीम ‘द क्लॉक इज टिकिंग’ रखा गया है, इसका अर्थ है कि समय अपनी गति से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में यही समय टीबी को खत्म करने का है। उन्होंने कहा कि टीबी विश्व का खतरनाक इन्फेकशन है, इस बिमारी से हर रोज 4 हजार लोगों की मौत हो जाती है और 2800 नए लोग टीबी से संक्रमित हो जाते है।


खांसी और छींक से भी फैलती है यह बीमारी
  टीबी नोडल अधिकारी व एसएमओ डॉ राजबीर ने बताया कि टीबी खांसी और छींक से फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के करीब रहने से टीबी होने की आशंका बढ़ जाती है। यह इन्फेक्शन आसानी से हवा में घुल जाता है। शुरुआत में यह बीमारी फेफड़ों पर असर करती है। बाद में बैक्टीरिया खून के जरिये शरीर के अन्य हिस्सों को प्रभावित करता है। लक्षण महसूस करते ही समय पर जांच कराएं तो इसका इलाज हो सकता है। उन्होंने कहा कि दो हफ्ते से ज्यादा खांसी, शाम के समय बुखार, बलगम में खून आना, रात को पसीना आना, भूख व वजन में कमीन टीबी के लक्षण हो सकते है।
उन्होंने कहा कि टीबी के लक्षण होने पर घबराएं नहीं, नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में जाकर अपने बलगम की जांच कराएं। उन्होंने कहा कि पूरा कोर्स लेकर टीबी की बिमारी से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार भी 500 रूपए प्रति माह मरीज को पोषण भत्ता के रूप में देती है। उन्होंने बताया कि जिले में इस समय 1135 टीबी के मरीजों का ईलाज चल रहा है।
इस दौरान टीबी पर जिंगल चलाई गई तथा आशा वर्कर्स व एएनएम को टीबी के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए बताया गया।
टीबी की रोकथाम
क्षयरोग की रोकथाम और नियंत्रण के लिए मुख्य रूप से शिशुओं के बैसिलस कैल्मेट-ग्यूरिन (बीसीजी) का टीकाकरण कराना चाहिए। बच्चों में यह 20 प्रतिशत से ज्यादा संक्रमण होने का जोखिम कम करता है। उन्होंने कहा कि सक्रिय मामलों के पता लगने पर उनका उचित उपचार किया जाना चाहिए। टीबी रोग का उपचार जितना जल्दी शुरू होगा, उतनी जल्दी ही रोग से निदान मिलेगा। उन्होंने कहा कि टीबी रोग से संक्रमित रोगी को खांसते वक्त मुंह पर कपड़ा रखना चाहिए और भीड़- भाड़ वाली जगह पर या बाहर कहीं भी नहीं थूकना चाहिए। उन्होंने कहा कि साफ-सफाई के ध्यान रखने के साथ-साथ कुछ बातों का ध्यान रखने से भी टीबी के संक्रमण से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि ताजे फल, सब्जी और कार्बोहाइड्रेड, प्रोटीन, फैटयुक्त आहार का सेवन कर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। अगर व्यक्ति की रोक प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी तो भी टीबी रोग से काफी हद तक बचा जा सकता है।
विश्व टीबी दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम में डॉ एके रंगा, डॉ रनबीर, डॉ सुमित, डॉ रजनीश, डॉ अशोक कुमार, डॉ पवन गोयल, डॉ राजीव विज, डॉ शिव रतन, डॉ संजय, टीबी प्रोग्राम कोर्डिनेटर सीमा अंसारी, पीपीएचसी विनित, एसटीएलएस भावना, बिट्टïू, एसटीएस सतेन्द्र, लोकेश, विकास, संजीव, जितेन्द्र सहित आशा वर्कर्स व एनएनएम उपस्थित रहें।
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Editor - राजेश शर्मा : रेवाड़ी (हरि.) - 9813263002

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