Chandan News: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस एव माता साबित्री बाई फुले के परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर महिला अधिकार मार्च का आयोजन

ग्राम समाचार,चांदन,बांका। प्रखंड क्षेत्र कुसुम जोरी पंचायत करवामारन ज्ञान भवन में मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस एवं माता साबित्री बाई फुले के परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर महिला अधिकार मार्च निकाली गई जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में दलित मुक्ति मिशन के डायरेक्टर महेंद्र रोशन की अध्यक्षता में बिहार दलित विकास समिति, साबित्री बाई माता समिति एवं दलित मुक्ति मिशन के महिला के द्वारा अधिकार मार्च का सुभारम्भ तथा दिप जलाकर किया गया। इस कार्यक्रम 

का उदघाटन पूर्व पंचायत समिति सदस्य कुसुमजोरी व जिला परिषद सदस्य (चांदन दछिनी 21) के भावी उम्मीदवार श्रीमती सुनीता देवी ने किया। जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता रानी शर्मा, उत्प्रेरक बिहार दलित विकास समिति झाझा ने किया। महिला अधिकार मार्च गोवर्दाहा मोड़ से कुसुमजोरी पंचायत मुख्ययालय तक में सैकड़ों महिलाओं से भाग लिया। महिलाओं ने मार्च में झंडा-बैनर, पोस्टर, स्लोगन के साथ विभिन्न नारा जैसे-अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस जिंदाबाद।, माता साबित्री बाई फुले अमर रहे। महिला-पुरूष एक समान। आदि अन्य जोश भरी नारा लगाया। इस अवसर पर दलित मुक्ति मिशन के निदेशक महेंद्र कुमार रौशन ने बताया कि सदियों से समाज में महिलाओं को भेदभाव, अपमान, सामाजिक 

प्रताड़ना जैसी कुरीतियां को झेलना पड़ा है।। महिला अधिकार के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लम्बे संघर्ष के बाद 1941 में महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार को दुनिया भर के लोगों ने माना और उसी दिन 8 मार्च से यह प्रचलन शुरू हुआ। जिसे महिला दिवस की संज्ञा दी गई। आज के दिन में देश के प्रथम महिला शिक्षक माता सावित्री बाई का नाम लेना आवश्यक हो जाता है, जिन्होंने ने अपना पूरा जीवन महिलाओं को न केवल पढ़ाने में वल्कि उनके हक-अधिकार को दिलाने के दिशा में संघर्षरत रही। उनके अथक प्रयास से अनेकों विद्यालय -महाविद्यालय खोली गई। बाबा साहब डॉ0 भीमरावअंबेडकर भी के इनसे काफी प्रेरित 

हुए हैं और तभी तो देश आजादी के बाद भारतीय संविधान में मानवाधिकार तथा मौलिक अधिकार को प्राथमिकता दिया है साथी उन्होंने महिला शिक्षा पर बल दिया था। आज भी दलित महिलाएं बहुत ही कम शिक्षा हासिल कर पाई हैं। भलेही सरकार के अनुसार महिलाएं आज हर छेत्र में आगे बढ़ रही हैं, किन्तु उनमें दलित महिलाओं की भागीदारी अपेक्षा कृत बहुत कम है। आज भी दलित-आदिवासी महिलाएं भेदभाव तथा जोर-जबरदस्ती के शिकार हो रही है। जबकि भारतीय संविधान में मौलिक तथा मानवाधिकार के तहत सबको बराबरी का अधिकार प्राप्त है। इन महिलाओं को शिक्षा, स्वरोजगार तथा अन्य जीवीकोपार्जन की 

जरूरत है। तथा अपने बच्चों को उच्च शिक्षा के प्रेरित करने की आवश्यकता है। इस अवसर पर उदघाटन कर्ता श्रीमती सुनीता देवी, रवि कुमार प्रधानाध्यापक उत्क्रमित मध्य विद्यालय करवामारन, शिक्षक देवराज कुमार, रामु ताती, सामुदायिक नेता बालो पुझार, सामाजिक कार्यकर्ता दीनदयाल दास, उषा देवी एवं रीमा देवी सिधुडीह, गीता देवी कुसुमजोरी, तरवा देवी, लक्ष्मी देवी भैरोपुर तथा टिंकू कुमार बलियादिह आदि अन्य वक्ताओं ने बताया कि महिलाओं को एक शुत्र में बंधकर अपनी आवाज बुलंद करना होगा। सभा में कई महिलाओं ने महिला शिक्षा एवं विकास के मुद्दे पर गीत गाकर लोगों को आकर्षित किया। 

उमाकान्त साह,ग्राम समाचार संवाददाता,चांदन,बांका।

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Editor - कुमार चंदन, प्रधान संपादक, बाँका, (बिहार)

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