ग्राम समाचार,बौंसी,बांका।
हर पुरुष की कामयाबी के पीछे स्त्री का हाथ होता है और स्त्रियों के प्रेरक बनते हैं पुरुष। वह स्त्री चाहे मां के रूप में हो, चाहे पत्नी के रूप में हो, चाहे बहन के रूप में हो, जन्म से लेकर मृत्यु तक औरतें दूसरों की बनाई रेखाओं पर अपने जीवन का चित्र बनाती और मिटाती रही है। इसी कारण आज भी महिलाएं एक इंसान के रूप में सम्मानित जीवन नहीं जी पा रही है। उनकी स्थिति दोयम दर्जे की बनी हुई है। स्त्रियों को उनका अधिकार दिलाना ही अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का मुख्य उद्देश्य है। महिलाओं को एक पीढ़ी को दूसरी पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास किया है। यानी यह सुनिश्चित करना है कि, हर पीढ़ी की महिलाएं एक-दूसरे को सशक्त करें।
दूसरा हर आयु वर्ग की महिलाएं अपने अधिकारों को समझें। ताकि जब एक किशोरी महिला बने तो उसका व्यक्तित्व विकसित हो और वह एक समान पूर्ण सुंदर जीवन जी सकें। जिन महिलाओं के आंखों में अपनी एक पहचान बनाने का सपना पालती है। उसी में एक समृद्ध दृष्टिकोण के साथ उन सपनों को साकार करने का हौसला भी होता है। प्रत्येक महिला के जीवन का यह सपना तभी संभव हो पाएगा, जब उसका अस्तित्व पराधीन नहीं होगा। तभी महिलाएं सशक्त होंगी। इसलिए कहा गया है कि, स्त्री जन्म नहीं लेती, बनाई जाती है। यह कथन एक गुड़तत्व समेटे हैं। बल्कि एक आईना है। जिसमें तमाम स्त्रियां अपना चेहरा देख सके।
"नारी वह सागर है जिसमें रत्नों का प्यार भरा, नारी वह गंगा है जिसमें हर आंसू का प्यार भरा, नारी वह धारा है जिसमें ममता का विश्वास भरा, नारी वह संगम है जिसमें सुर संगम का प्यार भरा।"
साभार:- वरिष्ठ समाजसेवी मदन मेहरा
कुमार चंदन, ग्राम समाचार संवाददाता, बौंसी।

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