ग्राम समाचार, भागलपुर। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सोमवार को महिला चौपाल का आयोजन परिधि संस्था द्वारा कला केंद्र भागलपुर में किया गया। परिधि लगभग 35 वर्षों से यह आयोजन कर रहा है। आज ही महिला दिवस सप्ताह का समापन भी हुआ। महिलाओं का पगड़ी बांधो कार्यक्रम परिधि महिला चौपाल का मुख्य आकर्षण था। इस अवसर पर प्रतियोगिता और संवाद भी हुआ। मौके पर महिलाओं ने अपने दुःख सुख भी आपस में बांटे। महिला चौपाल में बिहार बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष हरपाल कौर ने .कहा कि महिलाओं को एटीएम बनाना महिलाओं का विकास या महिला समता नहीं है। बाजार और लूट पर आधारित वर्तमान विकास महिलाओं को स्किल डेवलपमेंट और तकनीकी शिक्षा देकर केवल और केवल आर्थिक गतिविधि के लिए तैयार कर रही है। महिलाओं की असली लड़ाई बराबरी और आजादी है जो सांस्कृतिक परिवर्तन से ही संभव है। पगड़ी आन बान शान का प्रतीक है। जिसे मर्दानगी का पर्याय मान लिया गया है। पगड़ी सम्मान और इज्जत का प्रतीक भी माना गया जिसे केवल पुरुष धारण करते हैं। मतलब सम्मान के हकदार केवल पुरुष हैं। इस मिथक को तोड़ने की जरूरत है। पगड़ी विभिन्न संस्कृतियों का समन्वय भी है। महिलाऐं भी पगड़ी धारण कर सकती हैं। ये सोच ही सांस्कृतिक बदलाव है। प्राची, मृदुला सिंह, नूतन देवी, चंदा देवी, लाडली राज, रश्मि, कोमल, दीपप्रिया, साक्षी, कृष्णा आदि के पगड़ी को लोगों ने बहुत सराहा। चौपाल का संचालन करते हुए संगीता ने कहा कि परिधि हमेशा से ही सांस्कृतिक बदलाव को ही नर नारी समता का आधार मानती है। आर्थिक परिवर्तन तुरंत दिखाई देने वाला बदलाव है। जबकि संस्कृति मूल्य बोध का बदलाव है। छाया पांडे ने कहा कि यूं तो महिलाएं आगे बढ़ रही है, परंतु हम बराबरी की बात करते हैं। बिना बराबरी के सार्थक बदलाव संभव नहीं है। परिधि द्वारा आयोजित "महिला चौपाल" में महिलाओं ने एक दूसरे को पगड़ी बांधकर सांस्कृतिक परिवर्तन को तेज करने का संकल्प दुहराया। कार्यक्रम में महिलाओं ने खूब ठहाके लगाए और कई तरह के खेल बैलून दौड़, म्यूज़िकल चेयर रेस आदि के प्रतियोगिताओ़ में हिस्सा लिया। खेला बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पूर्व अध्यक्ष डॉ हरपाल कौर के हाथों पुरस्कार वितरण के साथ परिधि के महिला दिवस सप्ताह का समापन हुआ। कार्यक्रम में छाया पांडे, अनीता शर्मा, मोनिषा प्रांशु, दिप शिखा, तेहरुन निशा, अंशु प्रिया, देवी कमला देवी लीना दास, सरिता गर्ग, चंदा देवी, नूतन कुमारी, आदित्य प्रिया, मृदुला सिंह आदि मौजूद थीं। महिला चौपाल में कई प्रतियोगिताएं भी हुई जिसमें महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और बचपन की तरह इस दिन को जिया।



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