ग्राम समाचार, भागलपुर। शब-ए-बरात अल्लाह की तरफ से बंदों के लिए दी गई वह मुबारक रात है। जिसमें अगर इंसान सच्चे दिल से तौबा कर के गुनाहों का रास्ता छोड़ने का मुकम्मल इरादा कर लेता है तो अल्लाह भी उसके गुनाहों को माफ फरमा देते हैं। यह माफी की रात है। इस रात में लोगों को चाहिए कि वह ज्यादा से ज्यादा अल्लाह की इबादत कुरान-ए-पाक की तिलावत और नमाज तौबा और अस्तगफार में वक्त गुजारें। शब-ए-बारात मुबारक रात है, जिसमें अल्लाह की तरफ से आम माफी का ऐलान कर दिया जाता है। चार लोगों को छोड़कर सब की मगफिरत हो जाती है, पहला शराब का आदी, दूसरा मां-बाप का ना फरमान जो उनकी बात ना मानता हो, तीसरा हसद-जलन रखने वाला और चौथा गुरुर घमंड के साथ अपने कपड़े को लटका कर चलने वाला मुशरिक को छोड़कर अल्लाह की तरफ से मांफी मांगने वालों की तौबा कुबूल कर ली जाती है और उनके गुनाह माफ हो जाते हैं। शब-ए-बारात के साथ होली का पावन त्यौहार भी एक साथ मनाया जा रहा है। इसलिए दोनों समुदाय के लोगों को चाहिए कि सौहार्द पूर्वक और भाई चारे के साथ त्यौहार की खुशियां मनाएं और एक दूसरे का सम्मान करते हुए लोगों को दिल से लगाएं और जैसे एक परिवार के लोग मिलकर खुशियां मनाते हैं। हमें चाहिए कि हम भी इसी अंदाज से त्यौहार की खुशियां बांटे। शब-ए-बारात की रात मुकद्दस और पवित्र रात है। इस रात में घर की तन्हाई में अल्लाह की इबादत में मशगूल रहना इससे ज्यादा बेहतर है कि आदमी भीड़ में रहकर अल्लाह की इबादत में पूरी तरह मशगूल ना हो सके नफिल नमाज और इबादत मस्जिद से बेहतर घर में है। साथ ही जिन रिश्तेदारों और इमान वालों का इंतकाल हो चुका है। उनकी बक्शीश के लिए भी विशेष रूप से दुआएं होनी चाहिए। इस मुबारक रात में आतिशबाजी से पूरी तरह परहेज करना जरूरी है और अपनी तरफ से किसी भी व्यक्ति को तकलीफ ना पहुंचे इसका भी ख्याल रखना अनिवार्य है। कोरोना वायरस के मद्देनजर केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा दिए गए गाइडलाइन का पूरी तरह से अमल करने की जरूरत है। इसके लिए सफाई के साथ साथ दो गज दूरी का ख्याल रखने की आवश्यकता है।
Bhagalpur News:शब-ए-बारात की रात होती है मगफिरत : सैयद हसन, सरकार के दिए गाइड लाइन पर अमल करने की आवश्यकता
ग्राम समाचार, भागलपुर। शब-ए-बरात अल्लाह की तरफ से बंदों के लिए दी गई वह मुबारक रात है। जिसमें अगर इंसान सच्चे दिल से तौबा कर के गुनाहों का रास्ता छोड़ने का मुकम्मल इरादा कर लेता है तो अल्लाह भी उसके गुनाहों को माफ फरमा देते हैं। यह माफी की रात है। इस रात में लोगों को चाहिए कि वह ज्यादा से ज्यादा अल्लाह की इबादत कुरान-ए-पाक की तिलावत और नमाज तौबा और अस्तगफार में वक्त गुजारें। शब-ए-बारात मुबारक रात है, जिसमें अल्लाह की तरफ से आम माफी का ऐलान कर दिया जाता है। चार लोगों को छोड़कर सब की मगफिरत हो जाती है, पहला शराब का आदी, दूसरा मां-बाप का ना फरमान जो उनकी बात ना मानता हो, तीसरा हसद-जलन रखने वाला और चौथा गुरुर घमंड के साथ अपने कपड़े को लटका कर चलने वाला मुशरिक को छोड़कर अल्लाह की तरफ से मांफी मांगने वालों की तौबा कुबूल कर ली जाती है और उनके गुनाह माफ हो जाते हैं। शब-ए-बारात के साथ होली का पावन त्यौहार भी एक साथ मनाया जा रहा है। इसलिए दोनों समुदाय के लोगों को चाहिए कि सौहार्द पूर्वक और भाई चारे के साथ त्यौहार की खुशियां मनाएं और एक दूसरे का सम्मान करते हुए लोगों को दिल से लगाएं और जैसे एक परिवार के लोग मिलकर खुशियां मनाते हैं। हमें चाहिए कि हम भी इसी अंदाज से त्यौहार की खुशियां बांटे। शब-ए-बारात की रात मुकद्दस और पवित्र रात है। इस रात में घर की तन्हाई में अल्लाह की इबादत में मशगूल रहना इससे ज्यादा बेहतर है कि आदमी भीड़ में रहकर अल्लाह की इबादत में पूरी तरह मशगूल ना हो सके नफिल नमाज और इबादत मस्जिद से बेहतर घर में है। साथ ही जिन रिश्तेदारों और इमान वालों का इंतकाल हो चुका है। उनकी बक्शीश के लिए भी विशेष रूप से दुआएं होनी चाहिए। इस मुबारक रात में आतिशबाजी से पूरी तरह परहेज करना जरूरी है और अपनी तरफ से किसी भी व्यक्ति को तकलीफ ना पहुंचे इसका भी ख्याल रखना अनिवार्य है। कोरोना वायरस के मद्देनजर केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा दिए गए गाइडलाइन का पूरी तरह से अमल करने की जरूरत है। इसके लिए सफाई के साथ साथ दो गज दूरी का ख्याल रखने की आवश्यकता है।

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