ग्राम समाचार न्यूज़ : रेवाड़ी : हरियाणा : रेवाड़ी के गांव बालियार खुर्द निवासी हितेंद्र कुमार ने कैलाश चंद एड्वोकेट से सहयोग लेकर प्रसाशन विवाह की अनुमति ली ओर आज मानेसर जिला गुरुग्राम में पहुच कर ज्योति निवासी न्यू कालोनी मानेसर से विवाह रचाया। दूल्हा अपने साथ दुल्हन ज्योति के लिये गिफ्ट के तौर पर लेकर सेनेटाइजर ओर मास्क गया। हितेंद्र विवाह में सिर्फ 5 लोगो के साथ गए न भीड़ न बैंड बाजा, बिना सोर शराबे के विवाह की सभी रश्मे निभाई गई। विवाह करवाने वाले पंडित भी मास्क लगा कर पहुंचे। सबसे पहले दूल्हा ओर दुल्हन को सेनेटाइज करवाया गया उसके उपरांत पंडित ने मंत्रोपचार किया और फेरे शुरू करवाये गए। फूल माला को भी सेनेटाइज करवाया गया दूल्हा-दुल्हन ने एक दूसरे को माला पहनाई। दुल्हन ज्योति को भी दान दहेज के तौर पर मास्क ओर सेनेटाइजर प्राप्त हुआ दूल्हा ओर दुल्हन दोनो ने कैलाश चंद एड्वोकेट का आभार प्रकट किया ओर कहा कि इस मुश्किल की घड़ी में सहयोग किया वर-वधु दोनो गरीब परिवार से सम्बन्ध रखते हैं। दोनो के पिता का स्वर्गवास काफी समय पहले हो गया था, दोनो परिवारो की न तो इतनी हैसियत थी कि विवाह में ज्यादा खर्च कर सके इसलिये कैलाश चंद एड्वोकेट के माध्यम से बेकार के खर्चे से भी दोनों पक्ष बच गए।
Rewari News : लॉकडाउन-4.0 की शुरुआत में विवाह बंधन में बंधे हितेंद्र-ज्योति
ग्राम समाचार न्यूज़ : रेवाड़ी : हरियाणा : रेवाड़ी के गांव बालियार खुर्द निवासी हितेंद्र कुमार ने कैलाश चंद एड्वोकेट से सहयोग लेकर प्रसाशन विवाह की अनुमति ली ओर आज मानेसर जिला गुरुग्राम में पहुच कर ज्योति निवासी न्यू कालोनी मानेसर से विवाह रचाया। दूल्हा अपने साथ दुल्हन ज्योति के लिये गिफ्ट के तौर पर लेकर सेनेटाइजर ओर मास्क गया। हितेंद्र विवाह में सिर्फ 5 लोगो के साथ गए न भीड़ न बैंड बाजा, बिना सोर शराबे के विवाह की सभी रश्मे निभाई गई। विवाह करवाने वाले पंडित भी मास्क लगा कर पहुंचे। सबसे पहले दूल्हा ओर दुल्हन को सेनेटाइज करवाया गया उसके उपरांत पंडित ने मंत्रोपचार किया और फेरे शुरू करवाये गए। फूल माला को भी सेनेटाइज करवाया गया दूल्हा-दुल्हन ने एक दूसरे को माला पहनाई। दुल्हन ज्योति को भी दान दहेज के तौर पर मास्क ओर सेनेटाइजर प्राप्त हुआ दूल्हा ओर दुल्हन दोनो ने कैलाश चंद एड्वोकेट का आभार प्रकट किया ओर कहा कि इस मुश्किल की घड़ी में सहयोग किया वर-वधु दोनो गरीब परिवार से सम्बन्ध रखते हैं। दोनो के पिता का स्वर्गवास काफी समय पहले हो गया था, दोनो परिवारो की न तो इतनी हैसियत थी कि विवाह में ज्यादा खर्च कर सके इसलिये कैलाश चंद एड्वोकेट के माध्यम से बेकार के खर्चे से भी दोनों पक्ष बच गए।

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