Bhagalpur News:कलाकेंद्र के संस्थापक स्व.बंकिम चंद्र बनर्जी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित

ग्राम समाचार,भागलपुर। कलाकेंद्र के संस्थापक स्व.बंकिम चंद्र बनर्जी की पुण्यतिथि को लेकर दिवाकर घोष की अध्यक्षता में श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई। बंकिम बाबू को याद करते हुए वरिष्ठ रंगकर्मी उदय ने कहा कि स्व. बंकिम बाबू ने भागलपुर में कला कर्म को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया था और इसी संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने कलाकेंद्र जैसे संस्थान की नींव डाली। शांतिनिकेतन से शिक्षा प्राप्ति के बाद जब वह भागलपुर आए और बिहार के सांस्कृतिक पिछड़ेपन को मिटाने हेतु विश्वभारती के प्रारूप में कला सांस्कृतिक संस्थान गढ़ने की कोशिश की। इसी संदर्भ में वे शांतिनिकेतन आते जाते रहते। उन्होंने भारत के पूर्व राष्ट्रपति जाकिर हुसैन, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी, न्यायमूर्ती एस आर दास सहित अनेक राज्य के मुख्यमंत्री,राज्यपाल,मंत्री, उच्च स्तरीय अफसर, शिक्षाविद,कलाकारों,संस्कृतिकर्मियों से सहयोग व समर्थन प्राप्त किया। तत्कालीन बिहार विश्व विद्यालय में फैकल्टी ऑफ फाइन आर्ट्स की स्थापना कराई। यह कलाकेंद्र बंकिम बाबू का ब्रेन चाइल्ड है। बंकिम बाबू बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। कला व साहित्य के क्षेत्र में उनके कई आलेख देशभर में अलग-अलग पत्र-पत्रिकाओं में छपते रहते थे जिससे उनकी विशेष पहचान बनी थी। अपनी बात रखते हुए कला केंद्र के प्राचार्य राम लखन सिंह गुरु जी ने अपना संस्मरण लोगों के सामने रखते हुए कहा कि बंकिम बाबू बहुत ही मिलनसार और सहज थे। छात्रों के साथ उनका व्यवहार बहुत ही सहज था। आज भागलपुर ही नहीं पूरे बिहार को कला के क्षेत्र में कलाकेंद्र बंकिम बाबू का बहुत अप्रतिम योगदान है। इसके सैकड़ों छात्र कलाकार बनकर देश भर में नाम कमाकलाकेंद्। ललन ने उनके विचार और जीवन पर बात रखते हुए बताया के बंकिम बाबू ने जब संकल्प लिया तो शांतिनिकेतन के उनके मित्र और शिक्षकों ने उनसे पूछा था कि तुमने जो कला संस्कृति को बढ़ाने का संकल्प लिया है उसके लिए क्या कर रहे हो? उसी आसपास 1954 में कला केंद्र की स्थापना की गई। उन्होंने श्रीमती शारदा वेदालंकार के साथ मिलकर कला केंद्र ही नहीं बल्कि सुन्दरवती महिला कॉलेज को स्थापित करने में भी उन्होंने बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बिहार विश्वविद्यालय से कलाकेंद्र जुड़ जाने के बाद यह विश्वविद्यालय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो गया था। यही कारण है कि जब(तिलकामांझी)भागलपुर विश्वविद्यालय की स्थापना हुई तब भी बिहार विश्वविद्यालय कलाकेंद्र को अपने साथ ही रखना चाहता था। इसे लेकर दोनों विश्वविद्यालय में कुछ दिनों तक खींचातानी चलती रही थी। बंकिम बाबू लगातार कलाकेंद्र के विकास के लिए प्रयासरत रहे। कलाकेंद्र के अध्यक्ष रंगकर्मी दिवाकर घोष ने बताया कि बादल सरकार कृत "पगला घोड़ा" नाटक मंचन से हिंदी नाटक कलाकेंद्र में होने लगा था और उसमें बंकिम बाबू की धर्मपत्नी ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी! श्री रामशरण ने कहा कि तब बंगला संस्कृति का केंद्र रहा था कलाकेंद्र। फिर से कलाकेन्द्र को विभिन्न संस्कृतियों का समागम स्थल के रूप में विकसित करना बंकिम बाबू को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस अवसर पर पूर्व छात्र जयप्रकाश कुमार एवं वर्तमान में शिक्षण से जुड़े विजय कुमार ,राहुल एवम अन्य कई वक्ताओं ने भी अपने संस्मरण प्रस्तुत किये। सर्वसम्मति से निर्णय भी लिया गया कि कलाकेंद्र का स्थापना दिवस मनाया जाए। बंकिम बाबू की एक प्रतिमा स्थापना दिवस पर अनावरण करने का भी निर्णय हुआ जिसका निर्माण कार्य चल रहा है। कार्यक्रम का प्रारम्भ बंकिम चन्द्र बनर्जी के पोट्रेट पर पुष्पार्पण से हुआ।
            बिजय शंकर, ग्राम समाचार, भागलपुर
Share on Google Plus

Editor - सुनील कुमार

ग्राम समाचार से आप सीधे जुड़ सकते हैं-
Whatsaap Number -8800256688
E-mail - gramsamachar@gmail.com

* ग्राम समाचार का संवाददाता बनने के लिए यहां क्लिक करें

- राजीव कुमार (Editor-in-Chief)

- राजीव कुमार (Editor-in-Chief)
    Blogger Comment
    Facebook Comment

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें