रेवाड़ी के मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय कल्पना चावला सभागार में आज 'महाराजा अग्रसेन जयंती' के पावन अवसर पर एक भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। हरियाणा प्रदेश वैश्य महासम्मेलन के सहयोग से आयोजित इस संगोष्ठी का मुख्य विषय 'अग्रसेन दर्शन: आधुनिक युग में प्रासंगिकता: सामाजिक उत्तरदायित्व से नवोन्मेष (स्टार्टअप) और व्यावसायिक उत्कृष्टता' रहा।
कार्यक्रम में हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री श्री विपुल गोयल (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, शहरी स्थानीय निकाय और नागरिक उड्डयन मंत्री) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। संगोष्ठी की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. असीम मिगलानी ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में हरियाणा प्रदेश वैश्य महासम्मेलन के प्रदेश अध्यक्ष एवं महापौर (सोनीपत) श्री राजीव जैन तथा मुख्य वक्ता के रूप में प्रख्यात सनद लेखाकार (चार्टर्ड अकाउंटेंट) श्री नवीन सिंघल (रेवाड़ी) उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के शुभारंभ पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. असीम मिगलानी ने मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल, राजीव जैन तथा अन्य अतिथियों का विश्वविद्यालय परिसर में औपचारिक स्वागत किया और उन्हें स्वागत पटका पहनाकर एवं अमूल्य शॉल भेंट कर आदर-पूर्वक सम्मानित किया।
*पीठ (चेयर) की स्थापना और कुलपति द्वारा अतिरिक्त विद्या वाचस्पति (Ph.D.) सीट देने पर मुख्य अतिथि विपुल गोयल ने व्यक्त किया आभार*
मुख्य अतिथि एवं कैबिनेट मंत्री श्री विपुल गोयल ने विश्वविद्यालय में 'महाराजा अग्रसेन पीठ' (चेयर) की स्थापना के लिए कुलपति प्रो. असीम मिगलानी और विश्वविद्यालय प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महाराजा अग्रसेन जी की दूरदर्शी सोच और जीवन मूल्य संपूर्ण मानवता के लिए कल्याणकारी हैं, जिन्हें जन-जन तक पहुँचाना आज के युग की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उन्होंने घोषणा की कि पीठ के अंतर्गत शुरू होने वाले विद्या वाचस्पति (Ph.D.) शोध के लिए पीठ की तरफ से 15,000 रुपये की वित्तीय सहायता (छात्रवृत्ति) प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही, शोध कार्य को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. असीम मिगलानी जी द्वारा शोध के लिए 1 अतिरिक्त Ph.D. सीट प्रदान किए जाने पर श्री विपुल गोयल जी ने पीठ की तरफ से कुलपति महोदय का विशेष रूप से धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक सुविधा पहुँचाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच को रेखांकित किया और यज्ञशाला निर्माण में सहयोग देने वाले दानदाताओं को सम्मानित किया।
*युवाओं को रोजगार प्रदाता और उद्यमी बनने का आह्वान: कुलपति प्रो. असीम मिगलानी*
अपने अध्यक्षीय संबोधन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. असीम मिगलानी ने कहा कि आज हमारे लिए अत्यंत गौरव का विषय है कि हम महाराजा अग्रसेन के महान विचारों और आदर्शों पर मंथन करने के लिए एकत्र हुए हैं। महाराजा अग्रसेन के विचार आज के समय में अत्यधिक प्रासंगिक हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का जिक्र करते हुए कुलपति महोदय ने कहा कि यह नीति कौशल, मूल्य और उद्यमिता को बढ़ावा देती है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल रोजगार तलाशने वाले बनने के बजाय रोजगार देने वाले बनें और कृषि तथा जल संरक्षण जैसी स्थानीय समस्याओं के समाधान में अपने ज्ञान का उपयोग करें। उन्होंने यज्ञशाला के निर्माण कार्य को विश्वविद्यालय और वैश्य महासम्मेलन के संयुक्त प्रयासों से आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
महाराजा अग्रसेन के आदर्शों और पीठ (Chair) के परस्पर सहमति पत्र (MoU) पर श्री राजीव जैन का बल.
विशिष्ट अतिथि श्री राजीव जैन (प्रदेश अध्यक्ष, हरियाणा प्रदेश वैश्य महासम्मेलन एवं महापौर, सोनीपत) ने अपने संबोधन में 'महाराजा अग्रसेन पीठ' की स्थापना और विश्वविद्यालय के साथ हुए सहमति पत्र (MoU) पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महासम्मेलन और विश्वविद्यालय के इस संयुक्त प्रयास के माध्यम से महाराजा अग्रसेन के विचारों पर शोध और समाजोपयोगी कार्य आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों और समाजसेवियों का आह्वान करते हुए कहा कि हमें महाराजा अग्रसेन जी के महान सिद्धांतों, अहिंसा, समाजवाद और सहकारिता के मार्ग का निष्ठापूर्वक अनुसरण करना चाहिए।
*नवोन्मेष (स्टार्टअप), व्यावसायिक उत्कृष्टता और आर्थिक दर्शन पर सीए नवीन सिंघल के विचार*
मुख्य वक्ता सीए नवीन सिंघल ने महाराजा अग्रसेन के आर्थिक और सामाजिक सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महाराजा अग्रसेन से बड़ा कोई अर्थशास्त्री नहीं हुआ। उन्होंने 'एक ईंट, एक रुपया' के सिद्धांत को समझाते हुए बताया कि यह दान नहीं बल्कि आधुनिक नवोन्मेष (स्टार्टअप) संस्कृति, बैंकिंग प्रणाली और आवर्ती जमा (रिकरिंग डिपॉजिट) का प्राचीन रूप था, जो सहकारिता पर आधारित था। उन्होंने बल दिया कि केवल अपनी उन्नति नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाना ही सच्ची सफलता है। उन्होंने व्यवसाय में नैतिकता, धर्म और ईमानदारी को अपनाने की प्रेरणा दी।
*कार्यक्रम के अन्य मुख्य आकर्षण, गरिमामयी उपस्थिति एवं कुलसचिव द्वारा मांग व धन्यवाद ज्ञापन:*
*स्वागत एवं रूपरेखा:* डॉ. ममता अग्रवाल (प्रभारी, महाराजा अग्रसेन पीठ) ने संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत की और पीठ के माध्यम से विभिन्न वर्षों में हुए कार्यक्रमों की जानकारी दी।
*प्रमुख उपस्थिति: इस अवसर पर श्री मुकेश गुप्ता (भट्टे वाले), श्री अजय मित्तल, डॉ. मनदीप गोयल, वैश्य महासम्मेलन के जिला अध्यक्ष श्री बृज लाल गोयल, जिला सचिव श्री रिपुदमन गुप्ता सहित अनेक सामाजिक प्रतिनिधि, विश्वविद्यालय के अधिकारीगण तथा शिक्षक उपस्थित रहे।
*मंच संचालन: कार्यक्रम का सफल एवं कुशल मंच संचालन श्री दुर्गा दत्त गोयल (सचिव, HPVM) द्वारा किया गया।
*कुलसचिव द्वारा मांग एवं धन्यवाद ज्ञापन:* विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह ने मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल जी विश्वविद्यालय में एक बड़े विशाल भवन/सभागार के निर्माण के लिए विशेष आग्रह किया। उन्होंने बताया कि यह भवन भविष्य में बड़े कार्यक्रमों को सुगमता से आयोजित कराने में अत्यधिक सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने मंत्री महोदय से इस मांग को हरियाणा सरकार तक पहुँचाने और इसके निर्माण हेतु आवश्यक वित्तीय अनुदान प्रदान करवाने का निवेदन किया।
यज्ञशाला के निर्माण और इस गरिमामयी आयोजन को सफल बनाने में विश्वविद्यालय के अधिकारियों, समाजसेवियों तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही।








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