इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर (रेवाड़ी) के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) द्वारा विश्वविद्यालय परिसर के राव तुलाराम ब्लॉक स्थित सेमिनार हॉल 2 में "आउटकम-बेस्ड एजुकेशन में मूल्यांकन एवं प्राप्ति कार्यप्रणाली" (Assessment and Attainment Methodology in Outcome-based Education) विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला के मुख्य संरक्षक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. असीम मिगलानी रहे। कार्यशाला में मुख्य वक्ता एवं विशेषज्ञ के रूप में आईक्यूएसी (IQAC) सलाहकार प्रो. संदीप ग्रोवर ने शिरकत की।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. असीम मिगलानी जी ने अपने संदेश में कहा कि आउटकम-बेस्ड एजुकेशन (OBE) आधुनिक समय में गुणवत्तापूर्ण और परिणाम-उन्मुख शिक्षा की मुख्य आधारशिला है। शिक्षण प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में व्यावहारिक ज्ञान, कौशल और नैतिक मूल्यों का विकास करना है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार की कार्यशालाएं शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की मूल्यांकन विधियों से अवगत कराने और उनकी शिक्षण क्षमता को निखारने में मील का पत्थर साबित होंगी। जब हमारे शिक्षक आधुनिक मूल्यांकन पद्धतियों में दक्ष होंगे, तभी हम अपने विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए पूरी तरह सक्षम बना पाएंगे। अंत में उन्होंने आईक्यूएसी टीम के प्रयासों की सराहना की।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह तथा अधिष्ठाता शैक्षणिक मामले (Dean Academic Affairs) प्रो. सुनील कुमार ने भी कार्यशाला के सफल आयोजन पर अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि यह कार्यशाला उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने और प्राध्यापकों की शिक्षण क्षमता को बढ़ाने में अत्यंत सहायक सिद्ध होगी।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता प्रो. संदीप ग्रोवर ने आउटकम बेस्ड एजुकेशन (OBE) के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए ज्ञानात्मक (Cognitive Domain), भावात्मक (Affective Domain) तथा मनोप्रेरणात्मक (Psychomotor Domain) क्षेत्रों का संतुलन आवश्यक है।
अपने व्याख्यान में उन्होंने विस्तृत रूप से समझाया कि संस्थान एवं विभागों के विजन व मिशन के साथ कार्यक्रमों के शैक्षणिक उद्देश्यों (PEOs) और कोर्स व प्रोग्राम आउटकम्स (CO-PO) का सही समन्वय किस प्रकार किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों का सटीक आकलन करने के लिए प्रत्यक्ष मूल्यांकन साधनों (जैसे - मध्य-अवधि व सत्रान्त परीक्षाएं, निरंतर मूल्यांकन, क्विज़, केस स्टडीज़, प्रेजेंटेशन और प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तथा अप्रत्यक्ष मूल्यांकन साधनों (जैसे - छात्र निकास सर्वेक्षण, नियोक्ता सर्वेक्षण, व पाठ्येतर गतिविधियां) के उपयोग पर बल दिया। प्रो. ग्रोवर ने प्रश्न पत्रों को कोर्स आउटकम्स (COs) के अनुरूप तैयार करने, प्रश्न पत्र सुधारों तथा 3-स्तरीय अटैनमेंट मापन प्रणाली पर भी विस्तार से चर्चा की।
कार्यशाला के अंतिम चरण में एक विचार-विमर्श व संवाद सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित प्राध्यापकों एवं शोधार्थियों ने विषय से संबंधित प्रश्न पूछे और विशेषज्ञ द्वारा उनकी शंकाओं का समाधान किया गया। कार्यक्रम में मंच संचालन डॉ. रीना हुड्डा द्वारा बहुत ही कुशल एवं प्रभावी ढंग से किया गया।
इस अवसर पर IQAC निदेशक प्रो. विकास बत्रा, प्रो. दीपक गुप्ता, प्रो. रीतू बजाज आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस प्रकार की गुणवत्ता संवर्धन (Quality Enhancement) कार्यशालाओं को शिक्षकों की कार्यकुशलता बढ़ाने और विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के निर्माण में अत्यंत उपयोगी बताया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के अध्यक्ष, प्राध्यापकगण एवं शोधार्थी भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।


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