Haryana News :: एसी कमरे, धूल और खराब वेंटिलेशन से बढ़ सकता है सांस संबंधी परेशानी का खतरा :: डॉक्टर शिवांशु

गर्मी के मौसम में एयर कंडीशनर घर, ऑफिस और कार्यस्थल में राहत देने का एक जरूरी साधन बन गया है। हालांकि, लंबे समय तक बंद और वातानुकूलित कमरों में रहने से कुछ लोगों को सांस संबंधी असहजता का सामना करना पड़ सकता है, खासकर जब कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन न हो, धूल जमा रहती हो या एसी की नियमित सफाई और सर्विसिंग न की जाती हो। गले में खराश, सूखी खांसी, बार-बार छींक आना, सिरदर्द, नाक बंद होना, आंखों में जलन या एलर्जी और अस्थमा के लक्षण बढ़ना कुछ ऐसे संकेत हैं, जो खराब इनडोर एयर क्वालिटी से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि, केवल एयर कंडीशनिंग को इन समस्याओं का कारण मानना सही नहीं है। कमरे की सफाई, नमी, ताजी हवा का आवागमन और एसी सिस्टम का रखरखाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लोग दिन का बड़ा हिस्सा घरों, ऑफिस या अन्य बंद जगहों में बिताते हैं, इसलिए इनडोर एयर क्वालिटी का श्वसन स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है। कमरे के अंदर धूल के कण, डस्ट माइट्स, परागकण, पालतू जानवरों से निकलने वाले एलर्जेन, नमी वाले स्थानों में फफूंद के कण, धुआं तथा सफाई के उत्पादों, पेंट या अन्य रसायनों से निकलने वाले धुएं जैसे प्रदूषक मौजूद हो सकते हैं। एसी कमरे को ठंडा जरूर करता है, लेकिन इससे अपने आप पर्याप्त वेंटिलेशन सुनिश्चित नहीं होता।



*मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, द्वारका के पल्मोनोलॉजी, रेस्पिरेटरी एंड स्लीप मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर एवं यूनिट हेड डॉ. शिवांशु राज गोयल ने बताया* “कुछ लोगों में ठंडी, शुष्क या धूलयुक्त हवा श्वसन तंत्र को अधिक संवेदनशील बना सकती है। अस्थमा, एलर्जी या अन्य पुरानी सांस की बीमारियों से जूझ रहे लोगों में धूल, फफूंद, परागकण और तापमान में अचानक बदलाव जैसे ट्रिगर लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों को भी इनडोर प्रदूषकों के प्रति अधिक संवेदनशील माना जाता है। " धूल घर में दरवाजों-खिड़कियों, जूतों और कपड़ों के जरिए आ सकती है तथा कालीन, पर्दों, सोफे, बिस्तर और अन्य सतहों पर जमा हो सकती है। एसी के फिल्टर भी हवा में मौजूद धूल और कणों को रोकते हैं, लेकिन लंबे समय तक उनकी सफाई न होने पर एयरफ्लो और फिल्ट्रेशन की क्षमता प्रभावित हो सकती है। 


*डॉ. शिवांशु ने आगे बताया* “इनडोर एयर क्वालिटी बेहतर रखने के लिए मौसम और बाहरी हवा की गुणवत्ता अनुकूल होने पर पर्याप्त वेंटिलेशन और ताजी हवा का आदान-प्रदान सुनिश्चित करना चाहिए। किचन और बाथरूम में उचित एग्जॉस्ट वेंटिलेशन भी जरूरी है। फर्श, सतहों, बिस्तर, पर्दों और फर्नीचर की नियमित सफाई से धूल और एलर्जेन कम किए जा सकते हैं। धूल उड़ाने के बजाय गीले कपड़े से सफाई करना उपयोगी हो सकता है, जबकि कालीन और अपहोल्स्ट्री के लिए वैक्यूम क्लीनिंग मददगार है। कमरे को जरूरत से ज्यादा ठंडा या अत्यधिक शुष्क रखने से बचना चाहिए। यदि लगातार खांसी, घरघराहट, सीने में जकड़न, सांस लेने में कठिनाई या बार-बार एलर्जी के लक्षण बने रहें, तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। एसी से पूरी तरह बचना जरूरी नहीं है; बल्कि इसे साफ, उचित तापमान और नमी के साथ इस्तेमाल करना तथा कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण है। साफ-सुथरा, अच्छी तरह से मेंटेन किया गया और पर्याप्त रूप से हवादार इनडोर वातावरण सांस के स्वास्थ्य के साथ-साथ समग्र आराम के लिए भी बेहतर हो सकता है।

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Editor - राजेश शर्मा : रेवाड़ी (हरियाणा)

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- राजीव कुमार (Editor-in-Chief)

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