रेवाड़ी के इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर में 13 वर्षों की सफल अकादमिक यात्रा पूर्ण होने पर कल, 7 सितंबर 2026 को सुबह 10:30 बजे विश्वविद्यालय परिसर स्थित कल्पना चावला सभागार में 14वां स्थापना दिवस समारोह भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। 1 सितंबर से जारी सप्ताह भर के उत्सव का रंगारंग समापन कल मुख्य समारोह के साथ होगा।
इस गरिमामयी समारोह में हरियाणा के मुख्यमंत्री के ओएसडी (OSD) एवं SJHIFM के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे, जबकि गुरुग्राम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर संजय कौशिक विशिष्ट अतिथि (Guest of Honour) होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर असीम मिगलानी करेंगे।
समारोह के दौरान सप्ताह भर आयोजित हुई विभिन्न प्रतियोगिताओं—जैसे सोलो डांस, सोलो सिंगिंग, एक्टिंग, मिमिक्री/कॉमेडी, रील मेकिंग, रैंप वॉक, कविता पाठ, भाषण, पेंटिंग, रंगोली, क्ले मॉडलिंग, कार्टूनिंग, कोलाज और पोस्टर मेकिंग—के विजेता विद्यार्थियों को अतिथियों द्वारा सम्मानित किया जाएगा।
13 वर्षों की यात्रा एवं प्रमुख उपलब्धियां:
स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर विश्वविद्यालय की 13 वर्षों की सफल यात्रा और उपलब्धियों की जानकारी साझा करते हुए कुलपति प्रोफेसर असीम मिगलानी ने कहा कि सितंबर 2013 में स्थापित इस विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक विस्तार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के क्रियान्वयन, कौशल विकास, अनुसंधान, सांस्कृतिक संरक्षण, आधारभूत संरचना तथा गुणवत्ता संवर्धन के क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति की है:
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व करियर अवसर: कुलपति प्रो. असीम मिगलानी ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने, अनुसंधान को सुदृढ़ करने, कौशल विकास को बढ़ावा देने तथा उनके लिए बेहतर शैक्षणिक एवं करियर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।
NEP 2020 एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रम: उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को पूर्ण भावना के साथ लागू किया गया है। इसके तहत बी.एससी. (ऑनर्स—भौतिक, जीवन विज्ञान व गणित), बी.कॉम. (ऑनर्स), लॉजिस्टिक्स एवं सप्लाई चेन मैनेजमेंट में बी.कॉम., बीसीए, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग में बी.टेक., मास्टर ऑफ होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी तथा एलएल.एम. जैसे नए पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। आने वाले वर्षों में कई और रोजगारपरक, कौशल आधारित एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना है।
सांस्कृतिक विरासत व पारंपरिक ज्ञान: भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, भाषाओं एवं पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण पर जोर देते हुए कुलपति ने बताया कि 'भारतीय ज्ञान प्रणाली केंद्र' तथा 'संस्कृत विभाग' की स्थापना की गई है। भारतीय भाषाओं के संवर्धन के लिए समन्वयक नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही संस्कृत में एम.ए. तथा भगवद्गीता में डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी संचालित किया जा रहा है।
अनुसंधान एवं नवाचार: एक मजबूत व जीवंत अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए लगभग सभी विभागों में पीएच.डी. कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। प्रो. मिगलानी ने रेखांकित किया कि विश्वविद्यालय का अनुसंधान प्रदर्शन इसके रिसर्च स्कोर, एच-इंडेक्स, उद्धरणों की संख्या तथा संकाय सदस्यों द्वारा प्राप्त परियोजना अनुदानों में निरंतर परिलक्षित हो रहा है।
संस्थागत साझेदारियां (MoUs) व अंतरराष्ट्रीयकरण: उन्होंने बताया कि शैक्षणिक, अनुसंधान, उद्योग एवं ज्ञान आधारित सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रतिष्ठित राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, ताकि शिक्षकों व विद्यार्थियों का आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान और व्यापक शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराए जा सकें।
आधारभूत संरचना विकास: कुलपति ने आधारभूत संरचना के विकास को प्राथमिकता बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की बढ़ती आवश्यकताओं के अनुरूप अवसंरचना को मजबूत और विस्तारित करने के लिए विभिन्न परियोजनाओं पर कार्य जारी है।
भविष्य की दृष्टि (Future Vision): विकास के अगले चरण के बारे में बोलते हुए प्रो. असीम मिगलानी ने कहा कि एक सशक्त, भविष्य के लिए तैयार एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी संस्थान के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जो भारतीय मूल्यों एवं सांस्कृतिक परंपराओं से मजबूती से जुड़ा रहेगा।
प्रो. असीम मिगलानी ने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय शैक्षणिक उत्कृष्टता की अपनी यात्रा को निरंतर आगे बढ़ाते हुए एक अग्रणी संस्थान के रूप में उभरेगा। इसके साथ ही कुलसचिव प्रोफेसर दिलबाग सिंह ने भी पूरे IGU परिवार को स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।



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