सनातन धर्म सभा के अध्यक्ष धर्म आचार्य पंडित दिलीप शास्त्री ने कहा कि रामभक्ति और समाज सुधार के सबसे बड़े संत कवि गोस्वामी तुलसीदास जी.
*गोस्वामी तुलसीदास जी* — रामभक्ति और समाज सुधार के सबसे बड़े संत कवि
- *जन्म*: विक्रम संवत 1554, श्रावण शुक्ल सप्तमी = *11 अगस्त 1532 ई.*
- *जन्म स्थान*: राजापुर, जिला बांदा, उत्तर प्रदेश। कुछ लोग सोरों, कासगंज भी मानते हैं।
- *माता-पिता*: माता हुलसी, पिता आत्माराम दूबे
2. जीवन की काबिलियत / विशेषताएँ*
भाषा के महारथी*: संस्कृत + अवधी + ब्रज + फारसी सब जानते थे। इसी वजह से रामकथा को आम जनता तक पहुंचाया।
*समन्वयकारी संत*: शैव-वैष्णव, निर्गुण-सगुण, ज्ञान-भक्ति सबको एक किया।
*लोकनायक*: उन्होंने धर्म को मंदिर से निकालकर घर-घर तक पहुंचाया।*त्यागी*: राजा-महाराजाओं के निमंत्रण ठुकराए। "तुलसी भरोसे राम के, निर्भय होकर सोय" वाली प्रवृत्ति।
प्रवृत्ति और स्वभाव*
- *विनम्र + निर्भीक*: मुगल काल में भी अन्याय के खिलाफ बोले।
- *मानवतावादी*: जाति-पाति, ऊंच-नीच के खिलाफ। "कनक-कामिनी त्याग" पर जोर।
- *मर्यादा पुरुषोत्तम राम के भक्त*: राम को आदर्श राजा, आदर्श बेटा, आदर्श पति के रूप में स्थापित किया।*4. समाज सुधार के लिए काम*
उस समय मुगल शासन + धार्मिक पाखंड + भ्रष्टाचार था। तुलसीदास जी ने:
1. *भक्ति को आसान बनाया*: संस्कृत की जगह अवधी में लिखा ताकि किसान, मजदूर भी समझें।
2. *नैतिकता सिखाई*: रामराज्य का आदर्श देकर भ्रष्ट शासकों को आईना दिखाया।
3. *नारी सम्मान*: "मातृ देवो भव" पर जोर। सीता को मर्यादा की प्रतीक बनाया।
4. *पाखंड का विरोध*: कर्मकांड की जगह नाम-स्मरण और चरित्र को बड़ा बताया।
5. रामचरितमानस की रचना*
- *कब*: संवत 1631 = *1574 ई.* में अयोध्या में शुरू, 2 साल 7 महीने में पूरी।
- *भाषा*: अवधी
- *7 कांड*: बालकांड से उत्तरकांड तक
- *उद्देश्य*: "स्वांतः सुखाय तुलसी रघुनाथ गाथा" — अपने आनंद और लोगों के कल्याण के लिए।
*6. आज के युग में प्रासंगिकता*
1. *राजनीति*: रामराज्य = बिना भेदभाव, भ्रष्टाचार मुक्त, प्रजा-पालन वाला शासन। आज भी नेताओं के लिए आदर्श।
2. *समाज*: "परहित सरिस धर्म नहिं भाई" — सेवा भाव। कोरोना में इसी भावना से लोग जुटे।
3. *परिवार*: राम-सीता-लक्ष्मण-भरत के रिश्ते आज भी आदर्श दाम्पत्य और भाईचारे की सीख देते हैं।
4. *मानसिक शांति*: "राम नाम" और दोहे आज भी तनाव में सहारा बनते हैं।
5. *राष्ट्रीय एकता*: उत्तर-दक्षिण, गरीब-अमीर सब एक साथ "जय श्री राम" बोलते हैं — ये मानस की देन है।
सबसे प्रसिद्ध दोहा:*
"मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी"
संक्षेप में: तुलसीदास जी ने भक्ति को, भाषा को और नैतिकता को जनता तक पहुंचाया। आज भी जब समाज में अधर्म बढ़ता है तो लोग मानस खोलकर "रामराज्य" याद करते हैं।
*सुंदर कांड* — रामचरितमानस का सबसे लोकप्रिय और सबसे "सुंदर" कांड माना जाता है
*सुंदर कांड सबसे खास क्यों है?*
*1. नाम में ही "सुंदर" है*
गोस्वामी तुलसीदास जी ने खुद लिखा:
_"सुंदरकांड नाम तब राखा। सुमति निबास राम नित भाषा।"_
मतलब इसमें राम जी की कथा, भक्ति और बुद्धि तीनों का सुंदर संगम है।
2. आशा और हिम्मत का कांड है*
- राम जी वन में सीता जी को खो चुके हैं, सब निराश हैं।
- हनुमान जी समुद्र लांघकर लंका जाते हैं और "राम काज कीन्हे बिना मोहि कहाँ विश्राम" वाला भाव दिखाते हैं।
- ये कांड हमें सिखाता है: _असंभव कुछ नहीं, अगर संकल्प और भक्ति हो_।
3. हनुमान जी का चरित्र*
पूरा कांड हनुमान जी के इर्द-गिर्द घूमता है।
- *शक्ति*: 100 योजन समुद्र कूद गए
- बुद्धि*: सीता जी से बात कैसे करनी है, रावण को कैसे समझाना है
भक्ति*: "राम दूत अतुलित बलधामा" — खुद को दास मानते हैं
इसीलिए इसे "हनुमान कांड" भी कहते हैं।
*4. भय से भक्ति तक की यात्रा*
इस कांड में डर है — लंका, राक्षस, समुद्र।
और अंत में जीत है — सीता जी से भेंट, लंका दहन।
इसलिए जब जीवन में परेशानी हो तो लोग सबसे पहले सुंदरकांड का पाठ करते हैं।सुंदर कांड की विशेषताएँ*
*विशेषता**विवरण**
फल संकट नाश, भय दूर, कार्य सिद्धि। मान्यता है इसे पढ़ने से हनुमान जी तुरंत प्रसन्न होते हैं
शुरुआत* "जामवंत के वचन सुहाए" से — गुरु के वचन से काम बनता है ये सीख
**सबसे प्रसिद्ध चौपाई** "नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।"
**लंका दहन** अहंकार का अंत। रावण के सोने की लंका जल जाती है, पर विभीषण का घर बचता है
**भाषा** सबसे मधुर और गेय। इसलिए सुंदरकांड का पाठ सबसे ज्यादा होता है
आज के युग में प्रासंगिकता*
1. *परीक्षा/इंटरव्यू से पहले*: हिम्मत और एकाग्रता देता है
2. *टेंशन में*: "प्रभु चरित सुनबे को रसिया" — मन शांत करता है
3. *नेतृत्व*: हनुमान जी जैसे बिना पद के भी सबसे बड़ा काम कर सकते ह
संक्षेप में
बालकांड = शुरुआत, अयोध्या कांड = संघर्ष, अरण्य कांड = खोज...
लेकिन *सुंदरकांड = उम्मीद*। यहाँ से राम जी की जीत की शुरुआत होती ह
इसीलिए लोग कहते हैं — "रामचरितमानस का दिल सुंदरकांड है"

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