नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों एवं आध्यात्मिक ज्ञान से जोड़ने के उद्देश्य से इस्कॉन सेंटर रेवाड़ी द्वारा भगवद्गीता ओलंपियाड का सफल आयोजन किया गया। इस अनूठी प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों को श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य संदेशों से परिचित कराते हुए उनके व्यक्तित्व, चरित्र, आत्मविश्वास एवं सकारात्मक जीवन दृष्टिकोण का विकास करना था। कार्यक्रम में कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और गीता के ज्ञान के प्रति विशेष रुचि दिखाई।
ओलंपियाड में रेवाड़ी के विभिन्न प्रतिष्ठित विद्यालयों के लगभग 250 विद्यार्थियों ने भाग लिया। इनमें आरपीएस हासाका, राज इंटरनेशनल स्कूल, जीएलएच स्कूल, अनेजा किडोज स्कूल सहित अन्य विद्यालयों के विद्यार्थी शामिल रहे। प्रतियोगिता से पूर्व विद्यार्थियों को श्रीमद्भगवद्गीता के महत्व एवं उसके जीवनोपयोगी संदेशों से परिचित कराने के लिए विभिन्न विद्यालयों में जागरूकता सत्र आयोजित किए गए। साथ ही विद्यार्थियों को निःशुल्क श्रीमद्भगवद्गीता की पुस्तकें वितरित की गईं तथा उनकी बेहतर तैयारी के लिए पाँच ऑनलाइन कक्षाओं का भी आयोजन किया गया। इन प्रयासों का उद्देश्य केवल परीक्षा कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को गीता के सिद्धांतों को समझकर उन्हें अपने दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करना था।
तीन जुलाई को आयोजित इस ओलंपियाड में विद्यार्थियों से श्रीमद्भगवद्गीता पर आधारित 100 बहुविकल्पीय एवं ज्ञानवर्धक प्रश्न पूछे गए। प्रश्नों के माध्यम से विद्यार्थियों की गीता के प्रति समझ, नैतिक मूल्यों की जानकारी तथा जीवन में उसके व्यावहारिक उपयोग का मूल्यांकन किया गया। प्रतियोगिता के पश्चात सभी प्रतिभागियों के लिए प्रसाद एवं जलपान की व्यवस्था की गई तथा भक्ति-कीर्तन एवं आध्यात्मिक गतिविधियों के माध्यम से कार्यक्रम को भक्तिमय वातावरण में संपन्न कराया गया।
इस प्रेरणादायक पहल की परिकल्पना इस्कॉन सेंटर रेवाड़ी के प्रभारी एच.जी. रूप सनातन प्रभु जी द्वारा की गई। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में बच्चों को केवल आधुनिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि नैतिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा भी समान रूप से आवश्यक है। श्रीमद्भगवद्गीता जीवन जीने की कला सिखाती है और विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मविश्वास, कर्तव्यनिष्ठा, सकारात्मक सोच तथा कठिन परिस्थितियों का धैर्यपूर्वक सामना करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि यदि बचपन से ही बच्चों को गीता के आदर्शों से जोड़ा जाए तो वे भविष्य में श्रेष्ठ नागरिक बनने के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का भी बेहतर निर्वहन करेंगे।
आयोजकों ने कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी सहभागी विद्यालयों, प्राचार्यों, शिक्षकों एवं अभिभावकों का हृदय से आभार व्यक्त किया। विशेष रूप से आरपीएस हासाका के प्राचार्य श्री विक्रम जी के सहयोग एवं प्रोत्साहन की सराहना की गई। कार्यक्रम के सफल संचालन में एच.जी. तुंगविद्या देवी दासी (तन्नु जी), एच.जी. प्राण गोविंद प्रभु जी (प्रणय जी) सहित अनेक समर्पित स्वयंसेवकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिनके अथक प्रयासों से यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस्कॉन सेंटर रेवाड़ी ने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजन नियमित रूप से किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी श्रीमद्भगवद्गीता की शिक्षाओं से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में सत्य, सेवा, करुणा, अनुशासन एवं मानवता के आदर्शों को अपनाएं तथा एक सशक्त, संस्कारित और जिम्मेदार समाज के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।




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