रेवाड़ी के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (बाल) में आयोजित भारतीय भाषा ग्रीष्म शिविर का सातवाँ और अंतिम दिन आज उत्साह के साथ संपन्न हुआ। समापन सत्र में पूरे सप्ताह सीखी गई सभी गतिविधियों को छात्रों ने विधिवत और रुचिपूर्वक संपन्न किया।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक खेलों से हुई। शिक्षाविद एवं साहित्यकार मनोज वशिष्ठ ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए और बच्चों को पारंपरिक खेलों में शामिल किया। इन गतिविधियों में डीपीई जितेन्द्रा का विशेष सहयोग रहा। बच्चों ने सप्ताहभर के अनुभवों पर आधारित प्रतिभा प्रदर्शन भी किया और प्रेरणादायक बातें साझा कीं।शिक्षाविद साहित्यकार मनोज वशिष्ठ ने कहा, "भाषा केवल शब्द नहीं, संस्कृति की धड़कन है। इस शिविर में बच्चों ने खेल-खेल में अपनी मातृभाषा से जुड़ाव महसूस किया। पारंपरिक खेल और देशभक्ति गीतों ने उनमें आत्मविश्वास और देशप्रेम दोनों जगाए।"समापन अवसर पर स्कूल प्रभारी डॉ. नम्रता सचदेवा ने सभी प्रतिभागी छात्रों को रिफ्रेशमेंट, पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र वितरित किए। इस सफल आयोजन में जितेन्द्र दखोरा एवं अशोक बेरवाल का सराहनीय योगदान रहा। कार्यक्रम का समापन समूह फोटो सत्र के साथ हुआ।डॉ. नम्रता सचदेवा ने कहा, "इस 7 दिवसीय शिविर का उद्देश्य बच्चों में भाषा के प्रति प्रेम और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ाना था। परिचय से लेकर इतिहास-भूगोल तक, हर दिन की गतिविधि ने बच्चों को भारतीयता से जोड़ा। बच्चों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखकर लगता है कि यह प्रयास सार्थक रहा।"
सात दिवसीय शिविर में बच्चों को परिचय-अभिवादन, शहर-बातचीत, कला-संस्कृति, भोजन-रसोई, महान व्यक्तियों की जानकारी, इतिहास-भूगोल और पारंपरिक खेलों के माध्यम से भारतीय भाषा और संस्कृति से जोड़ा गया। सभी दिनों में प्रार्थना सभा, उपस्थिति, फोटो-वीडियो और फीडबैक जैसी सामान्य गतिविधियाँ भी करवाई गईं।


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