Rewari News :: दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल द्वारका की बड़ी उपलब्धि, कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के जरिए एक पेशेंट को नया जीवन दिया

दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल द्वारका की बड़ी उपलब्धि। कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी कर एक पेशेंट को नया जीवन दिया। रेवाड़ी की तीन साल की बेटी आराध्या को सुनने में सक्षम बनाया। आराध्या की चिकित्सक मां ने मैक्स हॉस्पिटल की टीम का आभार जताया।




रेवाड़ी की एक तीन वर्षीय बच्ची आराध्या, जो जन्म से सुनने और बोलने में असमर्थ थी को दिल्ली स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल द्वारका के डॉक्टरों ने नई जिंदगी दी है। अस्पताल में सफल कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के माध्यम से उसकी सुनने और बोलने की क्षमता लौट आई है, जिससे उसने पहली बार अपनी मां की आवाज़ सुनी। रेेवाड़ी में जन्मजात सुनने की समस्या से जूझ रही तीन वर्षीय आराध्या ने जब पहली बार अपनी मां की आवाज सुनी तो उसका चेहरा खुशी से खिल उठा। बच्ची को नया जीवन देने पर चिकित्सक मां डॉक्टर रेखा यादव भावुक हो गई और मैक्स हॉस्पिटल के विशेषज्ञ डॉक्टर्स की पूरी टीम का आभार जताया।





रेवाड़ी के सरकारी अस्पताल में डर्मेटोलॉजिस्ट के पद पर कार्यरत बच्ची की माँ जो स्वयं भी पेशे से चिकित्सक है उन्होंने बताया कि कॉक्लियर इम्प्लांट की सफल सर्जरी के बाद यह दृश्य परिवार के लिए भावनात्मक और यादगार बन गया। आराध्या, रेवाड़ी निवासी, लंबे समय से गंभीर श्रवण समस्या के कारण सामान्य बच्चों की तरह प्रतिक्रिया नहीं दे पाती थी। वह अपना नाम पुकारे जाने पर भी प्रतिक्रिया नहीं देती थी और उसकी बोलने की क्षमता भी उम्र के अनुसार विकसित नहीं हो पा रही थी। परिजनों ने बच्ची को इलाज के लिए मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, द्वारका के ईएनटी विशेषज्ञों से संपर्क किया। जांच में सामने आया कि बच्ची के दाहिने कान में अत्यंत गंभीर सेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस और बाएं कान में मध्यम श्रवण हानि है। बच्ची 'सेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस' से पीड़ित थी। मैक्स द्वारका के ईएनटी विशेषज्ञों की टीम ने जटिल सर्जरी कर उसे यह नई खुशियां दी है।





अस्पताल के ईएनटी विभाग के डायरेक्टर एवं यूनिट हेड डॉ. सुमित मृग तथा डॉक्टर समृद्धि निझवान ने बताया कि बच्ची की स्थिति को देखते हुए हाइब्रिड कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की गई। लगभग दो घंटे चली इस सर्जरी में उसकी बची हुई सुनने की क्षमता को सुरक्षित रखते हुए इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन के जरिए सुनने की क्षमता बहाल की गई। सर्जरी के लगभग एक सप्ताह बाद इम्प्लांट को सक्रिय किया गया, जिसके बाद आराध्या ने ध्वनियों को पहचानना शुरू किया और धीरे-धीरे उसकी भाषा विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।




विशेषज्ञों ने कहा कि जन्मजात हियरिंग लॉस की समय पर पहचान और कॉक्लियर इम्प्लांटेशन से बच्चों के जीवन में बड़ा बदलाव संभव है। समय पर इलाज से बच्चे सामान्य जीवन की ओर लौट सकते हैं। आपको बता दें कि दिल्ली के द्वारका स्थित यह अत्याधुनिक मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल 300 बिस्तरों का अस्पताल है, जहाँ रेवाड़ी सहित आसपास के क्षेत्रों के मरीज रोबोटिक सर्जरी, ऑन्कोलॉजी तथा कार्डियोलॉजी जैसी उन्नत चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं।
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Editor - राजेश शर्मा : रेवाड़ी (हरियाणा)

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- राजीव कुमार (Editor-in-Chief)

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