Rewari News :: 'भारतीय भाषा ग्रीष्म शिविर' ​भाषाई विविधता और सांस्कृतिक एकता का महापर्व :: शिक्षाविद मनोज वशिष्ठ

भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय एवं हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के दिशा-निर्देशों की अनुपालना में आज राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, रेवाड़ी के प्रांगण में 'भारतीय भाषा ग्रीष्म शिविर 2026' के प्रथम दिवस का उद्घाटन सत्र अत्यंत हर्षोल्लास और अभूतपूर्व उत्साह के साथ संपन्न हुआ। 1 जून से 7 जून तक चलने वाले इस सात दिवसीय शिविर का उद्देश्य विद्यार्थियों को बहुभाषाई कौशल से समृद्ध करना है।

​दीप प्रज्ज्वलन और गरिमामयी उपस्थिति:



​शिविर का विधिवत शुभारंभ माँ भारती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस पावन वेला में डाइट से अंग्रेजी व्याख्याता बबीता यादव, विद्यालय प्रभारी डॉ. नम्रता सचदेवा, हिंदी व्याख्याता सरोज यादव एवं शिक्षाविद मनोज कुमार वशिष्ठ ने सामूहिक रूप से दीप प्रज्ज्वलित किया। इस गरिमामयी अवसर पर बबीता राजपाल, सोनिया सेतिया, सरोज धनखड़ एवं कार्यालय लिपिक अशोक बेरवाल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।


​प्रमुख व्यक्तित्वों के अद्वितीय और प्रेरक वर्ज़न:

— डॉ. नम्रता सचदेवा, विद्यालय प्रभारी

​"तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के आधुनिक युग में बहुभाषावाद समय की सबसे बड़ी मांग है। भारतीय भाषाओं का गहरा ज्ञान हमारे विद्यार्थियों को रोजगार के नए अवसरों से जोड़ने के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता की कड़ियों को मजबूत करेगा। इस शिविर की सबसे बड़ी खूबसूरती 'भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL)' का समावेश है, जो हमारी 'समावेशी शिक्षा' के संकल्प को सिद्ध करती है। विभागीय नियमावली के तहत खेल-खेल में बिना किसी मानसिक दबाव के सीखना बच्चों की कल्पनाशक्ति को नई उड़ान देगा।"



— शिक्षाविद मनोज वशिष्ठ, 

"यह शिविर केवल भाषा सिखाने का माध्यम नहीं, बल्कि 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' के सपने को धरातल पर उतारने की एक सांस्कृतिक चेतना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के अनुरूप यह आयोजन बच्चों को अपनी मातृभाषा के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं के सौंदर्य से परिचित कराएगा। प्रथम दिन बच्चों ने खेल विधि से वर्णमाला, संख्या और अभिवादन जैसी बुनियादी बातें सीखीं, जो उनकी भाषाई समझ को एक नया विस्तार देंगी।"


​प्रथम दिवस की रोचक गतिविधियाँ:

​उद्घाटन सत्र के उपरांत विभागीय नियमावली के अनुसार प्रथम दिवस के क्रियाकलाप अत्यंत रोचक ढंग से संपन्न कराए गए। विद्यार्थियों ने समूहों में बैठकर एक-दूसरे को अन्य भारतीय भाषाओं में परिचय दिया, अभिवादन और अभिव्यक्ति के वाक्यों का सस्वर अभ्यास किया तथा संख्याओं व वर्णमाला की बारीकियों को समझा। विशेष आकर्षण का केंद्र रही भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL), जिसके माध्यम से बच्चों ने सांकेतिक हस्ताक्षर करना सीखा। खेल-खेल में सीखने की इस अनूठी पद्धति में बच्चों की जिज्ञासा और सहभागिता देखते ही बनती थी।

​समारोह के समापन पर विद्यालय परिवार ने शिविर की भव्य शुरुआत के लिए सभी सम्मानित अतिथियों, कर्मठ शिक्षक वर्ग और ऊर्जावान विद्यार्थियों का सहृदय आभार व्यक्त किया।

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Editor - राजेश शर्मा : रेवाड़ी (हरियाणा)

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- राजीव कुमार (Editor-in-Chief)

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