इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) रेवाड़ी एवं आर्टेमिस हॉस्पिटल, गुरुग्राम के संयुक्त तत्वावधान में विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर सैकटर चार स्थित हुड्डा जिम खाना क्लब में एक भव्य मल्टी-स्पेशियलिटी सीएमई एवं जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रेवाड़ी एवं आसपास के क्षेत्रों से 60 से अधिक चिकित्सकों ने भाग लिया और चिकित्सा विज्ञान की नवीनतम तकनीकों के साथ-साथ तंबाकू एवं निकोटीन की बढ़ती लत से उत्पन्न चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम में आर्टेमिस हॉस्पिटल, गुरुग्राम से पधारीं वरिष्ठ हेमेटो-ऑन्कोलॉजिस्ट एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. सुकृति गुप्ता ने बच्चों एवं वयस्कों में होने वाले कैंसर, रक्त संबंधी रोगों तथा बोन मैरो ट्रांसप्लांट की आधुनिक तकनीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे शोध और तकनीकी प्रगति के कारण आज कई जटिल बीमारियों का सफल उपचार संभव हो रहा है तथा समय पर निदान और उचित उपचार से मरीजों को नया जीवन दिया जा सकता है।
वहीं वरिष्ठ स्पाइन सर्जन डॉ. धीरज बाठेजा ने स्पाइन सर्जरी में हो रहे नवीनतम बदलावों, मिनिमली इनवेसिव तकनीकों एवं आधुनिक उपचार पद्धतियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नई तकनीकों के कारण मरीजों को कम दर्द, कम अस्पताल प्रवास और शीघ्र स्वस्थ होने का लाभ मिल रहा है।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर आयोजित विशेष जागरूकता सत्र रहा। इस वर्ष की थीम “आकर्षण का पर्दाफाश करना – निकोटीन और तंबाकू की लत का मुकाबला करना” पर विस्तार से चर्चा की गई। आईएमए रेवाड़ी के अध्यक्ष डॉ. नीरज यादव ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) प्रत्येक वर्ष तंबाकू नियंत्रण को बढ़ावा देने और लोगों को जागरूक करने के लिए एक विशेष थीम निर्धारित करता है। इस वर्ष की थीम का उद्देश्य तंबाकू एवं निकोटीन उत्पादों को आकर्षक रूप में प्रस्तुत करने वाली भ्रामक रणनीतियों का पर्दाफाश करना तथा विशेष रूप से युवाओं को इनके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना है।
डॉ. नीरज यादव ने कहा कि तंबाकू सेवन आज भी कैंसर, हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारियों, स्ट्रोक और असमय मृत्यु का एक प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों की जिम्मेदारी केवल रोगों का उपचार करना नहीं, बल्कि समाजस्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना भी है। उन्होंने उपस्थित चिकित्सकों का आह्वान किया कि वे अपने अस्पतालों एवं क्लीनिकों में आने वाले प्रत्येक मरीज को तंबाकू, सिगरेट, ई-सिगरेट एवं अन्य निकोटीन उत्पादों के दुष्प्रभावों के बारे में अवश्य जानकारी दें।
इस अवसर पर उपस्थित सभी चिकित्सकों ने तंबाकूमुक्त समाज के निर्माण, युवाओं को नशे की लत से बचाने तथा मरीजों एवं आमजन को तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने की शपथ ली। सभी ने यह संकल्प भी लिया कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में जन-जागरूकता अभियान चलाकर स्वास्थ्य संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. अनुभूति सिंह एवं डॉ. भावना बूरा ने किया। इस अवसर पर डॉ. गजेन्द्र यादव, डॉ. रमेश यादव, डॉ. करतार यादव, डॉ. प्रभॉ अग्रवाल, डॉ. मीनाक्षी यादव, डॉ. अर्चना यादव, डॉ. महेश, डॉ. प्रशांत, डॉ. दीपक, डॉ. मोक्ष, डॉ. पुनीत, डॉ. प्रमोद, डॉ. अभिनव सहित क्षेत्र के अनेक वरिष्ठ एवं युवा चिकित्सक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी कार्यशालाएं चिकित्सकों को नवीनतम चिकित्सा ज्ञान और तकनीकों से अवगत कराने के साथ-साथ समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने का भी प्रभावी माध्यम हैं। आईएमए रेवाड़ी ने भविष्य में भी इसी प्रकार के अकादमिक एवं समाजहितैषी कार्यक्रमों के नियमित आयोजन का संकल्प दोहराया।








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