Rewari News :: मध्य प्रदेश के रीवा में आर्यिका माताजी दुर्घटना प्रकरण की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जाँच की माँग को लेकर जिला राजस्व अधिकारी को ज्ञापन सौंपा

मध्य प्रदेश के रीवा में हुए घटनाक्रम के खिलाफ जैन समाज में आक्रोश। एमपी में विहाररत जैन साधु-संतों की सुरक्षा हेतु विशेष सुरक्षा व्यवस्था, राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति एवं आर्यिका माताजी दुर्घटना प्रकरण की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जाँच की माँग। रेवाड़ी में जैन समाज ने जिला राजस्व अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।



मध्य प्रदेश के रीवा में सड़क किनारे पैदल विहार कर रही तीन जैन साध्वियों को कार द्वारा कुचलने की घटना के विरोध में सोमवार को देशभर में प्रदर्शन कर कार्रवाई की मांग को लेकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया। रेवाड़ी में भी जैन समाज के लोग जैन मंदिर पर एकत्रित हुए और लघु सचिवालय पहुंचकर गृह मंत्री के नाम जिला राजस्व अधिकारी प्रदीप देसवाल को ज्ञापन सौंपा।



ज्ञापन देने आए प्रधान महेंद्र जैन, तरुण जैन तथा प्रदीप जैन आदि ने कहा कि जैन समाज अत्यन्त दुःख एवं गहरी वेदना के साथ आपका ध्यान हाल ही में विहाररत आर्यिका माताजी के साथ हुई अत्यन्त दुखद घटना की ओर आकर्षित करना चाहते हैं, जिसमें संघ की पूज्य आर्यिकाओं का असामयिक निधन हो गया। यह घटना केवल एक सड़क दुर्घटना भर नहीं मानी जा सकती। उपलब्ध तथ्यों एवं वीडियो क्लिपों के आधार पर समाज में गहरी आशंका एवं चिंता का वातावरण निर्मित हुआ है। अतः इस प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं उच्चस्तरीय जाँच अत्यन्त आवश्यक है।




जैन साधु-संत पूर्णतः निहत्थे, अहिंसक एवं पैदल विहार करने वाले तपस्वी होते हैं। वे किसी प्रकार की सुरक्षा या सुविधाओं का उपयोग नहीं करते तथा समाज में शांति, संयम और अहिंसा का संदेश प्रसारित करते हैं। ऐसे संतों के साथ लगातार बढ़ती दुर्घटनाएँ एवं हमले सम्पूर्ण समाज के लिए अत्यन्त चिंताजनक विषय हैं। जैन समाज सदैव शांति, अहिंसा, कानून और संवैधानिक मर्यादाओं में विश्वास रखता है। हमारा उद्देश्य किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना एवं तपस्वी संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हमें पूर्ण विश्वास है कि प्रशासन इस अत्यन्त संवेदनशील विषय को गंभीरता से लेते हुए त्वरित एवं प्रभावी कदम उठाएगा। अतः हम निम्न माँगें आपके समक्ष विनम्रतापूर्वक प्रस्तुत करते हैं प्रमुख माँगें इस प्रकार है ::




1. घटना की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जाँच
• इस प्रकरण की SIT अथवा न्यायिक जाँच कराई जाए।

• घटना से संबंधित सभी CCTV, वीडियो एवं डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित किए जाएँ।
• दोषियों पर कठोरतम कानूनी कार्यवाही की जाए।
• यदि सुनियोजित कृत्य अथवा षड्यंत्र के तथ्य मिलें, तो तदनुसार कठोर धाराएँ लगाई जाएँ।

2. “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू किया जाए
विहाररत साधु-संतों की सुरक्षा हेतु:
• विहार मार्गों पर प्रशासनिक समन्वय,
• संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस सहयोग,
• ट्रैफिक नियंत्रण,
• चेतावनी संकेतक,
• हाईवे एवं भीड़भाड़ क्षेत्रों में विशेष सावधानी
सुनिश्चित की जाए।


3. “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” बनाई जाए
भारत सरकार द्वारा:
• पैदल विहार करने वाले संतों हेतु राष्ट्रीय guideline,
• सुरक्षा SOP,
• तथा संवेदनशील मार्गों हेतु विशेष प्रावधान
निर्मित किए जाएँ।

4. संतों के विरुद्ध अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखा जाए
क्योंकि:
• साधु-संत आत्मरक्षा नहीं करते,
• वाहन या सुरक्षा साधनों का उपयोग नहीं करते,
• तथा पूर्णतः अहिंसक जीवन जीते हैं।

5. प्रशासन एवं समाज के बीच समन्वय तंत्र बने
स्थानीय स्तर पर:
• “Sant Security Coordination Cell”
• एवं आपातकालीन संपर्क व्यवस्था
निर्मित की जाए।
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Editor - राजेश शर्मा : रेवाड़ी (हरियाणा)

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- राजीव कुमार (Editor-in-Chief)

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