रेवाड़ी डीसी अभिषेक मीणा ने बताया कि देशभर में प्राचीन पांडुलिपियों, ताड़पत्रों एवं दुर्लभ अभिलेखों का सर्वेक्षण, प्रलेखन, संरक्षण एवं डिजिटलीकरण कर उन्हें शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों एवं आमजन के लिए सुलभ पहुंच बनाने के उद्देश्य से ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ चलाया जा रहा है। अभियान के तहत लगभग 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी पांडुलिपियों को प्राथमिकता दी जाएगी। यह सर्वेक्षण कार्य 15 जून तक चलाया जाएगा।
जिला स्तरीय समिति के अध्यक्ष एवं डीसी अभिषेक मीणा ने जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा और दर्शन को बौद्धिक धरोहर के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में पांडुलिपियों के संरक्षण और उन्हें भावी पीढिय़ों तक सुरक्षित पहुंचाने के उद्देश्य से ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान को जिला में प्रभावी रूप से चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह मिशन न केवल देश की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है, बल्कि इससे आने वाली पीढिय़ों को प्राचीन ज्ञान से जोडऩे का भी कार्य किया जा रहा है। उन्होंने सभी खंड विकास एवं पंचायत अधिकारियों (बीडीपीओ) को निर्देशित करते हुए कहा कि वे ग्राम सचिवों के माध्यम से गांव-गांव में स्थित मंदिरों, गुरुद्वारों, मस्जिदों तथा अन्य धार्मिक एवं सामाजिक संस्थानों में उपलब्ध हस्तलिखित पांडुलिपियों की जानकारी एकत्रित करें। यदि किसी स्थान पर पांडुलिपियां उपलब्ध होती हैं, तो उन्हें ‘ज्ञान भारतम् ऐप’ के माध्यम से जियो-टैग कर पोर्टल पर अपलोड किया जाए। वहीं, यदि किसी स्थान पर पांडुलिपियां उपलब्ध नहीं हैं, तो संबंधित महंत, इमाम या प्रबंधक से प्रमाण-पत्र प्राप्त किया जाए।
डीसी ने बताया कि ज्ञान भारतम् मिशन के तहत आम नागरिक भी अपनी पांडुलिपियों की जानकारी जिला प्रशासन को सीधे रूप से https://gyanbharatam.com/ वेबसाइट या https://play.google.com/store/apps/details?id=com.gyanbharatam.app&pli=1 मोबाइल ऐप के माध्यम से साझा कर सकते हैं। चिन्हित पांडुलिपियों को राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी में सुरक्षित रखा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अभियान में पांडुलिपि धारकों का स्वामित्व पूर्णतया सुरक्षित रहेगा।
सर्वेक्षण के तहत सरकारी पुस्तकालयों, विश्वविद्यालयों, संस्कृत पाठशालाओं तथा मंदिरों, गुरुद्वारों और मठों जैसे धार्मिक स्थलों में उपलब्ध पांडुलिपियों की पहचान और दस्तावेजीकरण करने के साथ-साथ पांडुलिपियों की भौतिक स्थिति का आकलन भी किया जाएगा।



0 comments:
एक टिप्पणी भेजें