रेवाड़ी में संबंधित प्राधिकरणों से लगातार आग्रह करने के बावजूद इंटरनेट के माध्यम से हो रही अवैध दवा बिक्री पर कोई प्रभावी कार्यवाही न होने के विरोध में आज रेवाड़ी में दवा विक्रेताओं ने एक दिवसीय सांकेतिक विरोध जताया। देशभर के लाखों केमिस्ट एवं दवा विक्रेताओं में व्याप्त गहरे असंतोष के कारण ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स तथा हरियाणा राज्य केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के आह्वान पर रेवाड़ी जिले के समस्त केमिस्ट एवं दवा विक्रेताओं ने संयुक्त एवं सर्वसम्मति से इस आंदोलन में भाग लिया और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
इसके उपरांत रेवाड़ी केमिस्ट एंड ड्रगिस्टस एसोसिएशन के प्रधान अनिल शर्मा की अगुवाई में दवा विक्रेताओं ने नगराधीश को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंप जन स्वास्थ्य एवं मरीजों की सुरक्षा से जुड़े अत्यंत गंभीर विषयों की से अवगत कराया।उन्होंने कहा कि बिना किसी स्पष्ट वैधानिक प्रावधान के ऑनलाइन माध्यम से दवाओं की बिक्री, फर्जी ई-प्रिस्क्रिप्शन, बिना वैध चिकित्सकीय परामर्श के घर-घर दवा वितरण तथा अत्यधिक छूट (Deep Discounting) जैसी गतिविधियाँ करोड़ों मरीजों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं। साथ ही, ये देशभर के लाखों लाइसेंसधारी छोटे केमिस्ट एवं दवा व्यापारियों के अस्तित्व पर भी सीधा संकट उत्पन्न कर रही हैं। ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 एवं नियम 1945 में ऑनलाइन दवा बिक्री का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं होने के बावजूद विभिन्न ऑनलाइन कंपनियाँ वर्षों से दवाओं की बिक्री कर रही हैं। वर्ष 2018 में केवल जनमत आमंत्रित करने हेतु जारी अधिसूचना GSR 817(E) अब अप्रासंगिक एवं निरर्थक हो चुकी है। इसी प्रकार कोविड महामारी जैसी असाधारण परिस्थिति में जारी GSR 220163, जिसकी आवश्यकता केवल आपातकालीन समय में थी, वर्तमान सामान्य परिस्थितियों में आवश्यक नहीं है। किंतु इसका दुरुपयोग विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म एवं शिंक कॉमर्स कंपनियों द्वारा अनियंत्रित होम डिलीवरी हेतु किया जा रहा है।
इन समस्त विषयों को समय-समय पर प्रमाण सहित केंद्र सरकार एवं संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष प्रस्तुत किया गया, किंतु अवैध गतिविधियों को स्वीकार किए जाने के बावजूद कोई ठोस एवं प्रभावी कार्यवाही दृष्टिगोचर नहीं हुई। जनस्वास्थ्य तथा छोटे केमिस्टों एवं दवा व्यापारियों को होने वाली अपूरणीय क्षति को रोकने हेतु निम्रलिखित प्रमुख मांगें हैं -
1. अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री के विरुद्ध तत्काल एवं कठोर कार्यवाही की जाए।
2. बिना वैध एवं सत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन के दवाओं की बिक्री एवं होम डिलीवरी पूर्णतः प्रतिबंधित की जाए।
3. GSR 817(E) एवं GSR 220(E) को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।
4. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म द्वारा अपनाई जा रही अत्यधिक छूट (Deep Discounting) एवं Predatory Pricing नीति पर रोक लगाई जाए।
उन्होंने कहा कि देशभर के केमिस्ट एवं दवा विक्रेता सदैव स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था एवं औषधि आपूर्ति तंत्र की मजबूत रीढ़ रहे हैं। कोविड महामारी जैसे कठिन समय में भी दवा व्यापारियों ने पूरे देश में निर्बाध दवा आपूर्ति सुनिश्चित कर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसलिए जनहित, जनस्वास्थ्य एवं मरीजों की सुरक्षा के व्यापक हित में इस विषयों पर तत्काल हस्तक्षेप कर आवश्यक कार्यवाही की जाए।

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