सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति ज्योमाल्या बागची की खंडपीठ द्वारा बार और बेंच के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों का संज्ञान लेने का रेवाड़ी में भी असर देखने को मिला। जिला एवं सत्र न्यायालय के कई दिनों से चले आ रहे बार द्वारा बहिष्कार को बुधवार को बार एवं बेंच ने सौहार्दपूर्ण ढंग से मिल बैठकर सुलझा लिया। न्याय आपके द्वार अभियान के संयोजक वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश चौहान ने सर्वोच्च न्यायालय की सिफारिश का स्वागत करते हुए ऐसी समाधान समितियां में चुनावी गुटबाजी से तटस्थ वरिष्ठ अधिवक्ताओं को भी शामिल करने की अपील की है।
उल्लेखनीय है कि आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय से संबंधित बार और बेंच के विवाद पर बार काउंसिल आफ इंडिया और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की पिटीशन पर सुनवाई करते हुए सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह के सुझाव पर सहमति जताते हुए उच्च न्यायालयों को जिला और तालुका स्तर पर ऐसी समाधान समितियां का गठन करने पर विचार करने को कहा जो सद्भाव पूर्वक, प्रभावी ढंग से, समय रहते ऐसे विवादों का निपटारा कर सके। इन समितियां में बार काउंसिल और बार एसोसिएशन के सदस्यों को शामिल किया जाना चाहिए। बेंच ने जजों को भी धैर्य, करुणा और प्रोत्साहन की भावना से काम करने की सलाह दी ताकि युवा अधिवक्ताओं को न्यायपालिका के क्षेत्र में अपना बेहतर कैरियर बनाने के लिए आकर्षित किया जा सके। अनुशासन और नैतिकता सिर्फ बार के लिए नहीं है बल्कि बेंच के लिए भी उतनी ही जरूरी है।

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