हरियाणा के रेवाड़ी जिले में शिव मंदिर के सामने राम तलाई कुतुबपुर मै भव्य हिन्दू सम्मलेन आयोजन समिति के तत्वावधान में आज एक भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में हिंदू समाज के लोग शामिल हुए। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हिंदू एकता को मजबूत करना और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की 100 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा पर चर्चा करना था। सम्मेलन में संत श्रद्धानंद जी महाराज, आरएसएस प्रचारक प्रदीप जी ने ओजस्वी वाणी से सभी को मंत्रमुग्ध किया। इस कार्यक्रम में आरएसएस की स्थापना से लेकर अब तक की उपलब्धियों और समाज में लाए गए पांच प्रमुख परिवर्तनों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।
सम्मेलन की शुरुआत वेद मंत्रों के उच्चारण, हवन और राष्ट्रगान से हुई। संत श्रदानंद जी महाराज और ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि हिंदू समाज को अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए आधुनिक चुनौतियों का सामना करना चाहिए। उन्होंने आरएसएस को राष्ट्र निर्माण का मजबूत स्तंभ बताते हुए कहा, "आरएसएस ने पिछले 100 वर्षों में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और सेवा के माध्यम से लाखों युवाओं को प्रेरित किया है। आज का सम्मेलन इसी यात्रा का एक हिस्सा है, जो हिंदू समाज को एकजुट करने का संदेश देता है।"
मुख्य वक्ता श्रीमान प्रदीप जी ने आरएसएस की 100 वर्ष की यात्रा पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि आरएसएस की स्थापना 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा की गई थी, और यह संगठन आज दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठनों में से एक है। श्रीमती प्रतिभा जी ने आरएसएस द्वारा लाए गए पांच प्रमुख परिवर्तनों पर विशेष जोर दिया। अपने वक्तव्य के दौरान उन्होंने संघ द्वारा प्रतिपादित पञ्च परिवर्तन—सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवन शैली और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता—पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन पाँच परिवर्तनों को व्यवहार में अपनाकर समाज आत्मनिर्भर और सुदृढ़ बन सकता है। आज के समय में प्रत्येक नागरिक को इन विषयों पर आत्ममंथन करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, "आरएसएस की यह शताब्दी यात्रा सिर्फ एक संगठन की कहानी नहीं, बल्कि पूरे हिंदू समाज की प्रगति की कहानी है। इन पांच परिवर्तनों ने भारत को एक मजबूत राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज हमें इनसे प्रेरणा लेकर आगे बढ़ना चाहिए।" उनके भाषण ने श्रोताओं में जोश भर दिया और सभी ने तालियों से उनका स्वागत किया।
इस सम्मेलन में विभिन्न वक्ताओं ने हिंदू समाज की वर्तमान चुनौतियों, जैसे धर्मांतरण, सांस्कृतिक आक्रमण और सामाजिक एकता पर भी चर्चा की। आयोजकों ने बताया कि यह कार्यक्रम आरएसएस की शताब्दी समारोह की श्रृंखला का हिस्सा है, जो पूरे देश में चल रहा है। रेवाड़ी जिले में यह सम्मेलन स्थानीय हिंदू संगठनों और आरएसएस शाखाओं के सहयोग से आयोजित किया गया।
सम्मेलन में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की बड़ी संख्या में भागीदारी देखी गई। कार्यक्रम के अंत में सभी ने राष्ट्र की एकता और अखंडता की शपथ ली। कार्यक्रम संयोजक महेश जी ने कहा कि ऐसे सम्मेलनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने मीडिया से अपील की कि इस तरह के कार्यक्रमों को प्रचारित कर हिंदू समाज की एकता को मजबूत किया जाए।
यह सम्मेलन न केवल आरएसएस की उपलब्धियों का उत्सव था, बल्कि मातृ पितृ पूजन के रूप में भी बनाया गया , पूजन और कार्यक्रम की सह संयोजका श्रीमती श्रुति जी ने माता पिता के सम्मान पर जोर दिया.एक मार्गदर्शक भी साबित हुआ। उम्मीद है कि ऐसे आयोजन आगे भी जारी रहेंगे और हिंदू समाज को नई दिशा प्रदान करेंगे। इस अवसर पर अमन जी गौ उपचार शाला के सभी सदस्य उपस्थित रहे पारस,,जी संघ से योगेश त्यागी जी उपस्थित रहे। मंच का कुशल संचालन श्रुति शर्मा द्वारा किया गया।



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